प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का दो दिवसीय असम दौरा केवल एक सरकारी यात्रा नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर भारत के विकास, सम्मान और आत्मविश्वास को नई ऊंचाई देने वाला क्षण बनकर उभरा है। यह दौरा इस मायने में ऐतिहासिक है कि इसमें अधोसंरचना विकास, सांस्कृृतिक सम्मान, भावनात्मक जुड़ाव, शैक्षिक प्रेरणा और औद्योगिक विस्तार- सभी आयाम एक साथ दिखाई दिए। असम, जो लंबे समय तक भौगोलिक और राजनीतिक उपेक्षा का शिकार रहा, अब राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा में तेजी से आगे बढ़ता नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री के गुवाहाटी पहुंचते ही लोकप्रिय गोपीनाथ बरदर्लै अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के नए अत्याधुनिक टर्मिनल का उद्घाटन इस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा। लगभग 1.4 लाख वर्गमीटर में फैला यह टर्मिनल सालाना 1.3 करोड़ यात्रियों को संभालने में सक्षम है। 4000 करोड़ रुपए की लागत से बने यह टर्मिनल में स्थानीय बांस का उपयोग 'वोकल फॉर लोकलÓ और टिकाऊ विकास की अवधारणा को साकार करता है। यह केवल एक हवाई अड्डा नहीं, बल्कि असम की सांस्कृृतिक पहचान और आधुनिक भारत की विकास दृष्टि का संगम है। इसी क्रम में असम के प्रथम मुख्यमंत्री और स्वतंत्रता सेनानी लोकप्रिय गोपीनाथ बरदलै की लगभग 80 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण एक अत्यंत भावनात्मक और प्रतीकात्मक कदम रहा। यह प्रतिमा न केवल असम के राजनीतिक इतिहास को सम्मान देती है, बल्कि यह भी संदेश देती है कि राष्ट्र निर्माण में क्षेत्रीय नेताओं के योगदान को अब राष्ट्रीय स्तर पर उचित पहचान मिल रही है। प्रधानमंत्री की ओर से शहीद स्मारक जाकर असम आंदोलन के 860 शहीदों को श्रद्धांजलि देना राज्य की भावनाओं के प्रति केंद्र सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। असम आंदोलन राज्य की सामाजिक-राजनीतिक चेतना का महत्वपूर्ण अध्याय रहा है और शहीदों को स्मरण करना अतीत के घावों को सम्मान के साथ स्वीकार करने जैसा है। इसके बाद भाजपा के राज्य कार्यालय 'अटल बिहारी वाजपेयी भवनÓ का दौरा राजनीतिक दृष्टि से भी ऐतिहासिक रहा, क्योंकि यह पहली बार हुआ जब कोई प्रधानमंत्री असम भाजपा कार्यालय पहुंचा। इस दौरे का एक विशेष और अनोखा पहलू रहा ब्रह्मपुत्र नदी के बीच आयोजित 'परीक्षा पे चर्चाÓ कार्यक्रम। 25 चयनित विद्यार्थियों के साथ प्रधानमंत्री का संवाद परीक्षा तनाव, लक्ष्य निर्धारण और आत्मविश्वास जैसे विषयों पर केंद्रित रहा। यह कार्यक्रम दर्शाता है कि सरकार केवल भौतिक विकास तक सीमित नहीं, बल्कि युवाओं के मानसिक और भावनात्मक सशक्तिकरण को भी समान रूप से महत्व दे रही है। औद्योगिक विकास के मोर्चे पर नामरूप में प्रस्तावित अमोनिया-यूरिया परियोजना का शिलान्यास असम के आर्थिक भविष्य के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। लगभग 10 हजार करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली यह परियोजना सालाना 12 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का उत्पादन करेगी। इससे न केवल किसानों को सस्ती और सुलभ खाद मिलेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसर भी सृजित होंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह असम दौरा विकास की योजनाओं से कहीं आगे जाकर सम्मान, विश्वास और भविष्य निर्माण का संदेश देता है। यह यात्रा इस बात का संकेत है कि असम अब केवल भौगोलिक रूप से ही नहीं, बल्कि विकास की सोच में भी भारत के केंद्र में अपनी मजबूत जगह बना रहा है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री का असम दौरा यहां के लोगों के लिए काफी लाभकारी रहा। कई परियोजनाओं का उद्घाटन हुआ। नई परियोजनाओं की नींव रखी गई, इसलिए असमवासियों की नजर में यह यात्रा काफी सफल रही।
पीएम की असम यात्रा