कट्टरपंथ से भारत को खतरा

बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के सत्ता मे आने के बाद भारत विरोधी गतिविधियों में काफी तेजी आई है। मोहम्मद यूनुस की सरकार के शासन में कट्टरपंथियों का बोलबाला है। हाल ही में बांग्लादेश की राष्ट्रीय नागरिक पार्टी (एनसीपी) के नेता हसनत अब्दुल्ला ने भारत को धमकी देते हुए कहा है कि अगर बांग्लादेश अस्थिर हुआ तो भारत के सातों राज्य भारत से कट जाएंगे। बांग्लादेश पूर्वोत्तर के उग्रवादियों को अपने यहां शरण देगा। बांग्लादेशी नेता की इस धमकी के बाद भारत सरकार हरकत में आ गई है। विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश के उच्चायुक्त को तलब कर ढाका में स्थित भारतीय दूतावास की सुरक्षा बढ़ाने को कहा है। पिछले कुछ महीनों से भारत और बांग्लादेश दे के संबंधों में तनाव बना हुअ है। इससे पहले बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने ढाका स्थित भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को तलब कर बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री को बांग्लादेश विरोधी बयान देने से रोकने को कहा था। मालूम हो कि बांग्लादेश की अदालत ने छात्र आंदोलन के दौरान मानवता के खिलाफ अपराध करने के आरोप में शेख हसीना को फांसी की सजा सुनाई थी। उसके बाद बांग्लादेश शेख हसीना को बांग्लादेश को सौंपने की मांग कर रह है, क्योंकि हसीना अभी भारत में हैं। चौतरफा दबाव के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने 12 फरवरी को आम चुनाव कराने की घोषणा की है। वहां की सरकार ने शेख हसीना तथा उसकी पार्टी आवामी लीग पर चुनाव में भाग लेने से प्रतिबंध लगा रखा है। शेख हसीना ने वर्तमान चुनाव को अवैध सरकार के अवैध चुनाव आयोग द्वारा घोषित चुनाव बताकर कड़ी आलोचना की है। हसीना ने कहा है कि वर्तमान अंतरिम सरकार के तहत स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव नहीं हो सकती। उन्होंने आवामी लीग प्रतिबंध लगाने के फैसले को भी गलत बताया है। ऐसी स्थिति में अब आवामी लीग के नेता और कार्यकर्ता खुलेआम सड़कों पर उतर कर अंतरिम सरकार द्वारा घोषित चुनाव का विरोध कर रहे हैं। शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश में सक्रिय कट्टरपंथी ताकतें अपना प्रभाव बढ़ाने में जुट गई हैं। पाकिस्तानी सेना तथा वहां की गुप्तचर एजेंसी आईएसआई ऐसे कट्टरपंथियों के साथ मिलकर भारत विरोधी भावनाएं भड़काने में लगी हुई हैं। बांग्लादेश के नेता तथा पूर्व सैन्य अधिकारी लगातार भारत विरोधी बयान दे रहे हैं। अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस अपनी चीन यात्रा के दौरान भारतीय सीमा के पास अपना सैन्य अड्डा बनाने के लिए आमंत्रण भी दे चुके हैं। भारत सरकार ने भी बांग्लादेश को सबक सिखाने के लिए कुछ आॢथक प्रतिबंध भी लगाए हैं, जिसका खामियाजा वहां के उद्योगपतियों एवं व्यापारियों को भुगतना पड़ रहा है। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है, ङ्क्षकतु वहां की सरकार इससे सबक लेने को तैयार नहीं है। अगर आवामी लीग के बिना बांग्लादेश में अंतरिम चुनाव हुआ तो निश्चित रूप से वहां भारत विरोधी सरकार का ही गठन होगा, जो भारत के लिए खतरा है। मोहम्मद यूनुस नहीं चाहते हैं कि सत्ता उनके हाथ से निकल जाए। सबसे पहले तो उन्होंने चुनाव को ही डालने का प्रयास किया, ङ्क्षकतु चौतरफा बढ़ते दबाव के कारण ऐसा संभव नहीं हो पाया। वर्ष 2024 के जनवरी में बांग्लादेश में चुनाव हुए थे, जिसमें शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग को भारी बहुमत मिला था। उस वक्त कुछ हल्कों में चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए थे, क्योंकि मुख्य विपक्षी पार्टी ने उस चुनाव का बहिष्कार किया था। कुल मिलाकर बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति काफी विस्फोटक बनी हुई है। बांग्लादेश के कई नेता पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी स्थित चिकेन नेक को ही भारत से काटने का बयान दे रहे हैं। भारत सरकार ने बांग्लादेश की इस धमकी के बाद सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करते हुए चिकेन नेक के नजदीक तीन जगहों पर अपना सैन्य अड्डा बना दिया है। कुल मिलाकर भारत और बांग्लादेश के संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं, जिस पर भारत को कड़ी नजर रखनी होगी।