अमरीका से होने वाली ट्रेड डील पर अनिश्चितता बरकरार रहने तथा वैश्विक दबाव के कारण रुपया पर लगातार दबाव बना हुआ है। गुरुवार को रुपया 54 पैसे टूट कर अब तक के सबसे निचले स्तर 90.48 के स्तर तक पहुंच गया है। पिछले बुधवार तक डॉलर के मुकाबले रुपया 89.94 था, जो गिर कर 90.48 तक पहुंच गया। आॢथक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमरीका के बीच ट्रेड डील पर अंतिम मुहर लग सकती है। लेकिन अभी भी कृृषि, डेयरी एवं कुछ अन्य क्षेत्रों में गतिरोध बरकरार है। भारत सरकार किसी भी कीमत पर कृृषि एवं डेयरी क्षेत्र को अमरीकी कारोबारियों के लिए खोलना नहीं चाहती है। भारत का यह सेक्टर सीधे किसानों से जुड़ा हुआ है। किसानों की रोजी-रोटी कृृषि एवं डेयरी क्षेत्र से चलती है। अमरीका चाहता है कि भारत कृृषि एवं डेयरी क्षेत्र को खोल दे। अमरीका के किसानों द्वारा मक्का, सोयाबीन, गेहूं तथा कपास आदि की खेती होती है। अमरीका मक्का और सोयाबीन के लिए भारतीय बाजार की तलाश कर रहा है। अगर कृृषि एवं डेयरी क्षेत्र को खोला गया तो भविष्य में भारतीय किसानों का जीना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि अमरीकी उत्पाद भारत के बाजार में छा जाएंगे। भारतीय किसान अमरीकी किसानों से प्रतिस्पद्र्धा नहीं कर पाएंगे। हाल ही में अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारत अमरीका में सस्ते चावल भेज कर बाजार पर कब्जा कर रहा है। उन्होंने इसके खिलाफ भारी टैरिफ लगाने की मंशा भी जाहिर की है। भारत में निवेश करने वाले अमरीकी निवेशक अपना निवेश बेच कर निकल रहे हैं, जिसका रेङ्क्षटग पर भी प्रभाव पड़ रहा है। 1947 में डॉलर के मुकाबले रुपया 3.30 प्रतिशत था जो 2025 में बढ़कर 90.48 तक पहुंच गया है। बाजार में निवेश करने वाले निवेशक जोखिम से बचने तथा डॉलर की मजबूत मांग को देखकर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। अब तो दक्षिण अमरीका के देश मैक्सिको ने भी भारत सहित एशियाई देशों से आने वाले माल पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की बात कही है। यह आदेश नए साल से लागू हो जाएगा। देखना है कि इस 50 प्रतिशत टैरिफ का भारतीय बाजार पर कितना असर होगा। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमरीका को ग्रेट बनाने के लिए दुनिया के देशों पर भारी टैरिफ लगा रहे हैं। रूस से तेल खरीदने को लेकर अमरीका ने भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत सहित कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है। भारत द्वारा अमरीकी टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए ब्याज दरों एवं जीएसटी दरों में कमी लाकर असर कम करने का प्रयास किया जा रहा है। राजनीतिक हलकों में कहा जा रहा है कि व्यापार पर समझौते के लिए भारत और अमरीका के बीच व्यापार वार्ता प्रगति पर है। अगर व्यापार वार्ता में बाधा पड़ती है तो इसका असर नवीकरण, ऊर्जा, पावर युटिलिटी एवं टोल रोड पर पड़ेगा। ऐसे में इन सेक्टरों में काम करने वाली कंपनियों के प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इससे उनके क्रेडिट रेङ्क्षटग पर विपरीत असर होगा। भारत अमरीकी टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए वैकल्पिक देशों की तलाश कर रहा है। अब तक दो दर्जन से ज्यादा देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता हो चुका है। यूरोपीय यूनियन के साथ भी वार्ता प्रगति पर है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों तथा अरब देशों के साथ भी पहल हो रही है। अमरीकी राष्ट्रपति के लगातार बदलते बयान तथा यू-टर्न मारने की स्थिति को लेकर दुनिया के अन्य देशों के साथ-साथ भारत भी प्रभावित हो रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक को अपनी अर्थ-व्यवस्था तथा रुपया को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाना चाहिए। अमरीकी व्यापार प्रतिनिधि जेेमिसन ग्रीर ने कहा है कि दोनों देशों के बीच शुरू हुई दो दिवसीय वार्ता में विवादित मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश हो रही है। दोनों ही पक्ष द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। भारत सरकार भी डॉलर के मुकाबले गिरते रुपए की साख को बचाने के लिए कोशिश कर रही है, ङ्क्षकतु अभी तक इसमें सफलता नहीं मिली है। उम्मीद है कि जल्द इस पर काबू पा लिया जाएगा।