रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे थे। भारत ने उनके स्वागत में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रोटोकॉल तोडक़र नई दिल्ली के पालम हवाई अड्डे पर पहुंच कर उनकी आगवानी की। दोनों नेता एक ही कार में बैठकर पीएम निवास (सेवा तीर्थ) पहुंचे। पीएम निवास को भी भव्य रूप से सजाया गया था। पुतिन के भारत दौरे पर अमरीका, पश्चिमी देशों सहित पूरे विश्व की नजर थी। अमरीका और पश्चिमी देश नहीं चाहते थे कि पुतिन की भारत यात्रा हो। भारत में पुतिन का गर्मजोशी से हुआ स्वागत ने दुनिया को एक बड़ा कूटनीतिक संदेश दिया है कि भारत-रूस की दोस्ती अटूट है तथा समय की कसौटी पर हमेशा खड़ा उतरा है। राष्ट्रपति पुतिन तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि दोनों देशों की दोस्ती ध्रुवतारे की तरह है। वर्ष 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद चार वर्षों के अंतराल पर पुतिन भारत की यात्रा पर पहुंचे। भारत और रूस के बीच प्रत्येक वर्ष सालाना शिखर सम्मेलन का आयोजन होता है। इस वर्ष 23वां शिखर सम्मेलन का आयोजन नई दिल्ली में हुआ जिसे पुतिन और मोदी ने संबोधित किया। इस बार की यात्रा के दौरान मुख्य रूप से अर्थ-व्यवस्था, व्यापार, निवेश तथा बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दों पर विशेष रूप से केंद्रित रहा। राष्ट्रपति पुतिन के साथ उनके सात मंत्रियों एवं कई कंपनियों के सीईओ का आना यह दर्शाता है कि दोनों देश अपने आॢथक  संबंधों को मजबूत करने पर कितना जोर दे रहे हैं। अभी तक भारत रूस से हथियार एवं दूसरे रक्षा उपकरणों की ज्यादा खरीददारी करता रहा है। वर्तमान में भारत में रक्षा उपकरणों के क्षेत्र में रूसी हथियारों एवं उपकरणों का हिस्सा लगभग 35 प्रतिशत है। अमरीका तथा पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों को देखते हुए अब दोनों देशों ने अपने राष्ट्रीय मुद्रा में व्यापार करने में तरजीह देना शुरू किया है। रूसी राष्ट्रपति ने भारत में स्पष्ट रूप से कहा कि दोनों देशों का व्यापार लगभग 96 प्रतिशत रुपए-रूबल में हो रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार सालाना लगभग 65 अरब डॉलर का होता है, जिसको बढ़ाकर 2030 तक 100 अरब डॉलर करने का लक्ष्य है। पुतिन की वर्तमान यात्रा के दौरान इसको लेकर एक रोड मैप तैयार किया गया है। दोनों देशों के बीच वर्तमान व्यापार रूस की तरफ झुका हुआ है। उसको संतुलित करने के लिए प्रयास किये जा रहे हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद अमरीका तथा पश्चिमी देशों ने रूस के खिलाफ प्रतिबंध लगा रखा है। भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने के कारण अमरीका ने भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत सहित कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगा रखा है। पुतिन की यात्रा के दौरान इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। रूस ने स्पष्ट कहा है कि भारत को ईंधन (तेल) की आपूॢत निर्बाध जारी रहेगी। किसानों की जरूरतों को देखते हुए उर्वरकों की भी आपूॢत होगी। दोनों देश समुद्री लॉजिस्टिक, औद्योगिक उत्पादन, परमाणु ऊर्जा, स्वच्छ ऊर्जा एवं सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे। भारत यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ मुक्त व्यापार समझौता के लिए बातचीत कर रहा है। रूस यूरेशियन का सदस्य है। दोनों ही देश नया जलमार्ग विकसित करने के लिए प्रयासरत हैं, ताकि व्यापार बिना बाधा के चल सके। पुतिन की वर्तमान यात्रा के दौरान फार्मास्युटिकल, सूचना एवं प्रौद्योगिकी तथा अंतरिक्ष के क्षेत्र में मिलकर काम करने पर सहमति बनी है। पहले से यह अनुमान किया जा रहा था कि पुतिन की यात्रा के दौरान एयर डिफेंस सिस्टम एस-400 तथा पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान एसयू-57 सहित कई मुद्दों पर बड़े रक्षा समझौते होंगे, ङ्क्षकतु भारत और रूस ने इस क्षेत्र को तरजीह नहीं दी। रक्षा विश्लेषकों को मानना है कि इन मुद्दों पर गुप्त समझौता हुआ होगा जिसका खुलासा समय आने पर होगा। भारत ने रूस का गर्मजोशी से स्वागत कर यह दिखा दिया है कि भारत किसी एक गुट के प्रभाव में नहीं रहेगा। भारत बहुध्रुवीय विश्व का पक्षधर है। वह अपने राष्ट्रीय हितों के साथ कोई समझौता नहीं करते हुए सभी पक्षों के साथ दोस्ताना संबंध चाहता है।