चीन ने शंघाई हवाई अड्डे पर भारत के अरुणाचल प्रदेश की महिला नागरिक प्रेमा वांगजोम थोंगडोक के साथ पासपोर्ट को लेकर जो हरकत की उससे चीन की असली मंशा का पता चल गया है। भारत से दोस्ती करने का नाटक करने वाले चीन को ऐसी हरकत करना शोभा नहीं देता। अमरीका द्वारा शुरू किये गए ट्रेड वार के बाद चीन भारत के साथ संबंध सुधार कर भारतीय बाजारों में अपने उत्पादों को बेचना चाहता है। लेकिन वह दुनिया में भारत की बढ़ती ताकत को देखते हुए नीचा दिखाने के लिए हरकत करने से बाज नहीं आता। चीन अरुणाचल को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा मानता है, जबकि भारत अरुणाचल प्रदेश को अपना अभिन्न अंग मानता है। चीनी अधिकारियों ने अरुणाचल की महिला को 18 घंटे तक इसलिए रोक कर रखा, क्योंकि उनके पास मिले पासपोर्ट में अरुणाचल प्रदेश का जिक्र था। वैसे भी चीन ने तिब्बत पर जबर्दस्ती कब्जा कर रखा है। अरुणाचल पर अपना कब्जा दिखाने के लिए चीन कुल 90 जगहों जिसमें पहाड़, नदियां भी शामिल हैं, के नाम को बदल चुका है। अरुणाचल प्रदेश के तवांग का इलाका सामरिक एवं रणनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है जो उत्तरी क्षेत्र में चीन पर भारत को सामरिक बढ़त दिलाता है। दुनिया में भारत के बढ़ते कद ने चीन को असहज कर दिया है। एक सप्ताह पहले भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने चीनी जासूस को पकड़ा जो भारत के बारे में संवेदनशील जानकारी जुटाने में लगा हुआ था। इसके बाद भारत ने अपने मिसाइल के परीक्षण के लिए नोटम जारी किया था, ङ्क्षकतु टेस्ट होने से पहले ही चीनी जासूसी जहाज ङ्क्षहद महासागर में पहुंच चुके थे। दिल्ली में हुए बम विस्फोट की घटना में परोक्ष रूप से चीन के हाथ होने से इनकार नहीं किया जा सकता। यह सबको मालूम है कि पाकिस्तानी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई और चीनी खुफिया एजेंसियों के बीच अच्छा तालमेल है। ऑपरेशन ङ्क्षसदूर के दौरान यह स्पष्ट हो चुका है। हाल ही में दक्षिण अफ्रीका में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री के बीच सामरिक एवं रणनीतिक सहयोग पर सहमति बनी है जिससे चीन भीतर ही भीतर नाराज है। भारत फिलीपींस, वियतनाम, इंडोनेशिया जैसे चीन के पड़ोसी देशों के साथ सामरिक संबंध बेहतर कर रहा है जो चीन की आंखों में खटक रहा है। चीन संबंध सुधारने की बात करता है, ङ्क्षकतु वह भारत को कमजोर करने से परहेज नहीं करता। भारत और चीन के बीच लगभग 3500 किलोमीटर सीमा लगती है। आक्साई चीन का बड़ा इलाका अभी भी चीन के कब्जे में है। चीन सीमा समस्या का स्थायी समाधान नहीं चाहता, क्योंकि वह इसके माध्यम से भारत पर दबाव बनाये रखना चाहता है। ङ्क्षहद-प्रशांत क्षेत्र में  स्थित चीन के सभी पड़ोसी देश उसकी दादागिरी से परेशान है। ये देश भारत से सहयोग की अपेक्षा रखते हैं, जिससे चीन चिढ़ा हुआ है। अब भारत भी चीन से लगी सीमा के पास अपनी सामरिक स्थिति और तेजी से मजबूत कर रहा है। भारत ने अरुणाचल के मामले में चीन को कड़ा कूटनीतिक जवाब भी दिया है। भारत को चीन से सावधान रहने की हमेशा जरूरत है।