टीम इंडिया की शर्मनाक हार
भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच गुवाहाटी में खेले गए दूसरे क्रिकेट टेस्ट मैच में मेहमान दक्षिण ने भारत को 408 रन के भारी अंतर से करारी शिकस्त दी है। इसके साथ ही भारत 0-2 से शृंखला भी गंवा चुका है। अपनी जमीन पर यह भारत की सबसे बड़ी हार है। इससे पहले भारत ने पिछले वर्ष न्यूजीलैंड से 0-3 से शृंखला गंवाई थी। इसके अलावा आस्ट्रेलिया में बोर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में भारत को हार मिली थी। 25 साल में पहली बार भारत अपनी सरजमीं पर दक्षिण अफ्रीका से हारा है। दक्षिण अफ्रीका से मिली हार के लिए विरोधी टीम को पूरा श्रेय देना होगा, क्योंकि उसने पूरी शृंखला में दबदबा बनाये रखा। दक्षिण अफ्रीका के ऑफ स्पिनर साइमन हार्मर की फिरकी गेंदों पर भारतीय बल्लेबाज बेबस नजर आये। उन्हें इस शृंखला का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया। दूसरे टेस्ट में मार्को यानसन को उनके हरफनमौला प्रदर्शन के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया। उन्होंने पहली पारी में 93 रन बनाये और इस मैच में सात विकेट लिये। अपनी बल्लेबाजी के लिए अजेय दीवार माने जाने वाली भारतीय टीम के बल्लेबाज सस्ते में आउट होते रहे। भारत के महान स्पिनर आर अश्विन, आक्रामक बल्लेबाज रोहित शर्मा एवं विराट कोहली की अनुपस्थिति में दक्षिण अफ्रीका के धारदार आक्रमण के सामने भारतीय खिलाड़ी असफल रहे। भारतीय खिलाडिय़ों के बल्लेबाजी क्रम में लगातार परिवर्तन से खिलाडिय़ों में असुरक्षा की भावना पैदा हुई जिसका असर उनके खेल में दिखा। शुभमन गिल, साई सुदर्शन, करुण नायर, वाङ्क्षशगटन सुंदर जैसे नए खिलाडिय़ों को ज्यादा मौका मिला, ङ्क्षकतु वे कसौटी पर खड़ा नहीं उतरे। हर मैच में कम से कम दो बदलाव किये गए। क्रिकेट विशेषज्ञों के अनुसार पिच की रणनीति तथा आक्रामकता ने भारतीय टीम की लुटिया डुबोने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पिछली चार पारियों में भारतीय टीम का स्कोर 202 रन से आगे नहीं बढ़ा। भारतीय टीम की हार में खराब बल्लेबाजी सबसे बड़ा कारण है। हालांकि गेंदबाजी के क्षेत्र में भी दक्षिण अफ्रीका भारत से काफी आगे रहा। पिछले 13 महीनों में भारत की पांचवीं हार को क्रिकेट प्रेमी पचा नहीं पा रहे हैं। इससे पहले भारत को वर्ष 2012 से 2024 के बीच पांच बार शिकस्त मिली थी। भारतीय टीम की हार के पीछे खेल रणनीति, चयन और सोच की असंगति मुख्य रूप से जिम्मेवार है। भारत की करारी हार के बाद मुख्य कोच गौतम गंभीर तथा टीम प्रबंधन के दूसरे लोगों पर उंगली उठना स्वाभाविक है। अनेक क्रिकेट खिलाडिय़ों का कहना है कि हार के लिए भारतीय टीम के रवैये, स्थिरता का अभाव और हरफनमौलाओं पर अत्यधिक निर्भरता ने टीम को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया। भारतीय टीम में बदलाव की रणनीति पर भी अनिल कुंबले जैसे खिलाड़ी ने प्रश्न उठाया है। टेस्ट मैच में टी-20 एवं एकदिवसीय मैचों से अलग हटकर मानसिकता की जरूरत होती है। भारतीय टीम को अपनी पराजय को लेकर आत्ममंथन करने की जरूरत है। बीसीसीआई को भारतीय टीम में आई खामियों को दूर करने के लिए पहल करना चाहिए। खिलाडिय़ों के चयन में पक्षपात या राजनीति नहीं होनी चाहिए।