दक्षिण अफ्रीका की राजधानी जोहांसबर्ग में जी-20 शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भाग नहीं लिया। अमरीका के निचले स्तर के अधिकारी ने सम्मेलन में हिस्सा लिया। रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने भी अंतर्राष्ट्रीय बाध्यता के कारण शिरकत नहीं की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी-20 शिखर सम्मेलन में छाये रहे। सबसे बड़ी बात यह है कि अमरीका की सहमति के बिना संयुक्त घोषणा पत्र जारी हुआ, जो भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में तीन बड़े वैश्विक मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद एवं ड्रग तस्करी के खिलाफ पूरी दुनिया को एकजुट होकर कदम उठाने की जरूरत है। भारत का आतंकवाद और ड्रग तस्करी के खिलाफ स्पष्ट रुख रहा है। ड्रग तस्करी का सीधा संबंध आतंकवाद से है, क्योंकि आतंकियों को ड्रग तस्करी के जरिये वित्तीय मदद मिलती है। मोदी ने वैश्विक पारंपरिक ज्ञान कोष प्रणालियों को एक मंच पर लाने और उन्हें सुरक्षित, संरक्षित एवं उपयोगी बनाने का प्रयास करने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने जी-20 अफ्रीका स्कील्स मल्टीप्लायर इनिशिएटिव पर जोर दिया, ताकि युवाओं के कौशल विकास को तेज कर अफ्रीका में रोजगार और नवाचार के नए अवसर तैयार किया जा सके। मालूम हो कि भारत ने ही वर्ष 2023 में अफ्रीकन यूनियन को जी-20 से जोड़ा था। मोदी ने जी-20 नेताओं से अपील की कि वे वैश्विक संस्थाओं में ग्लोबल साउथ की आवाज बुलंद करने के लिए मिलकर काम करें। मालूम हो कि दक्षिण अफ्रीका इस बार जी-20 की अध्यक्षता कर रहा है। मोदी ने पर्यटन, खाद्य सुरक्षा, कृृत्रिम बुद्धिमता, डिजिटल अर्थ व्यवस्था, नवाचार और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों की महत्ता पर प्रकाश डाला तथा कहा कि नई दिल्ली जी-20 शिखर सम्मेलन में जो ऐतिहासिक पहल शुरू की गई थी उसे और आगे बढ़ाया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि अफ्रीका की बहुत बड़ी आबादी संसाधनों से वंचित रह गई है। अब समय आ गया है कि उन्हें इसका लाभ पहुंचाया जाए। भारत ग्लोबल साउथ के देशों के साथ लगातार संबंध बढ़ा रहा है। भारत उनके विकास में हर तरह की सहायता दे रहा है ताकि वे अपने पैरों पर खड़ा हो सके। जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री ने कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों एवं शासनाध्यक्षों के साथ द्विपक्षीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर भारत ने कनाडा के साथ नए रिश्तों की शुरुआत करते हुए बड़ी साझेदारी का ऐलान किया है। कनाडा के प्रधानमंत्री के साथ हुई बैठक के दौरान इस बारे में व्यापक सहमति बनी है। मालूम हो कि जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में भारत और कनाडा के संबंध काफी बिगड़ गए थे। दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे, लेकिन कनाडा में सत्ता परिवर्तन के बाद परिस्थिति में बदलाव आया है। अब तो दोनों देशों के बीच बनी साझेदारी में आस्ट्रेलिया भी शामिल हो गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस त्रिपक्षीय साझेदारी को आगामी पीढिय़ों का भविष्य करार दिया है। जहां कनाडा अभी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भेदभावपूर्ण नीति से त्रस्त है वहीं आस्ट्रेलिया ङ्क्षहद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की दादागिरी से परेशान है। तीनों देशों का साथ आना विश्व के लिए एक बड़ा संकेत है। अमरीकी राष्ट्रपति की अनुपस्थिति के बावजूद जिस तरह जी-20 ने आम मुद्दों पर सहमति बनाई है वह भारत के कद को दर्शाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के साथ भी द्विपक्षीय एवं वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। कुल मिलाकर देखा जाए तो दक्षिण अफ्रीका में जी-20 शिखर सम्मेलन आयोजित होने से अफ्रीकी देशों में विकास के नए अवसर पैदा होंगे। अफ्रीका में दुर्लभ खनिज पदार्थों एवं दूसरे प्राकृृतिक संसाधनों की भरमार है। इन देशों को वित्तीय एवं तकनीकी सहायता की जरूरत है। भारत इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा सकता है। भारत स्पष्ट रूप से कह चुका है कि वह ग्लोबल साउथ के देशों की आवाज बनने को तैयार है।