बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने नीतीश कुमार के शपथग्रहण समारोह को ऐतिहासिक बनाकर अपना शक्ति प्रदर्शन किया है। राजग के घटक दल की सभी पाॢटयों के शीर्ष नेता, मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री पटना के गांधी मैदान में आयोजित शपथग्रहण समारोह में शामिल हुए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंच से गमछा लहराकर समारोह को और रोचक बना दिया। इससे पहले प्रधानमंत्री ने भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय में आयोजित विजय समारोह में गमछा लहराकर अपनी खुशी का इजहार किया था। नीतीश कुमार के नेतृत्व में कुल 26 मंत्रियों ने 20 नवंबर को शपथ ली। भाजपा कोटे से कुल 14 मंत्री मंत्रिमंडल में शामिल हुए हैं जिसमें दो उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एवं विजय सिन्हा शामिल हैं। बाकी मंत्रियों के नाम क्रमश: दिलीप जायसवाल, नितिन नवीन, रामकृृपाल यादव, मंगल पांडेय, सुरेन्द्र मेहता, नारायण प्रसाद, रमा निषाद, लखेन्द्र रोशन, श्रेयसी ङ्क्षसह, संजय ङ्क्षसह टाइगर, डॉ. प्रमोद चन्द्रवशी एवं अरुण प्रसाद हैं। जदयू कोटे से विजय कुमार चौधरी, श्रवण कुमार, विजेन्द्र कुमार यादव, अशोक चौधरी, लेसी ङ्क्षसह, मदन सहनी, सुनील कुमार एवं जमां खान हैं। लोक जनशक्ति पार्टी-आर की तरफ से संजय कुमार ङ्क्षसह एवं संजय कुमार, ङ्क्षहदुस्तानी अवाम मोर्चा की तरफ से संतोष सुमन तथा राष्ट्रीय लोक मोर्चा की तरफ से दीपक प्रकाश मंत्री बनाये गए हैं। मंत्रिमंडल के गठन में सोशल इंजीनियङ्क्षरग का पूरा ख्याल रखा गया है। नीतीश मंत्रिमंडल में दलित समुदाय से पांच एवं वैश्य समुदाय से चार मंत्री शामिल किये गए हैं। अगर जातिवादी दृष्टिकोण से नजर डालें तो राजपूत से चार, ब्राह्मण से तीन, कुर्मी से दो, यादव से दो, भूमिहार से दो, कुशवाहा से तीन, निषाद से दो तथा कायस्थ से एक मंत्री शामिल किये गए हैं। मंत्रिमंडल में सात मंत्री बारहवीं, छह मंत्री ग्रेजुएट, पांच मंत्री पोस्ट ग्रेजुएट, चार मंत्री डॉक्टरेट, एक प्रोफेशनल ग्रेजुएट तथा एक दसवीं पास डिग्री धारी हैं। भाजपा के 14 मंत्रियों में से 12 करोड़पति हैं, जबकि जदयू के नौ में आठ मंत्री करोड़पति हैं। विधानसभा चुनाव में राजग ने महिला एवं युवा (एमवाई) मतदाताओं पर फोकस किया था, जिसका लाभ चुनाव में मिला। यही कारण है कि भाजपा ने अपने कोटे में युवा एवं महिलाओं को मंत्रिमंडल के गठन में तरजीह दी है। हालांकि नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने मंत्रिमंडल के गठन में अपने पुराने भरोसेमंद नेताओं पर ही विश्वास जताया है। इस चुनाव में चिराग पासवान की नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी-आर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 29 में 19 सीटों पर जीत हासिल की है। चिराग पासवान अपनी पार्टी से किसी विधायक को उपमुख्यमंत्री का पद दिलवाना चाहते थे, ङ्क्षकतु ऐसा नहीं हो पाया। राजग को इस चुनाव में मिली भारी जीत के बाद मतदाताओं की अपेक्षा भी बढ़ गई है। ऐसी स्थिति में नीतीश सरकार के सामने चुनाव में किये गए वादे को पूरा करने की चुनौती होगी। चुनाव में किये गए वादों के साथ-साथ युवकों को रोजगार देने की दिशा में सरकार को पहल करनी पड़ेगी। भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में एक करोड़ युवाओं को सरकारी एवं प्राइवेट नौकरी देने का वादा किया है। बिहार में औद्योगिक विकास के बिना यह वादा पूरा करना मुश्किल है। अब नीतीश कुमार के कौशल, अनुभव एवं बुद्धि की परीक्षा होगी।
बिहार में राजग का शक्ति प्रदर्शन