नीतीश कुमार फिर बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने आज सर्वसम्मति से नीतीश कुमार को विधायक दल का नेता चुन लिया। भाजपा विधायक दल के नेता एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नीतीश के नाम का प्रस्ताव किया, जबकि विजय सिन्हा, उपेन्द्र कुशवाहा, संतोष सुमन, प्रेम कुमार, रामकृृपाल यादव, स्नेहलता कुशवाहा सहित कई विधायकों ने उनके नाम का समर्थन किया। इस मौके पर जदयू एवं भाजपा के साथ-साथ लोक जनशक्ति पार्टी-आर, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा तथा राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के नेतागण उपस्थित थे। नीतीश कुमार ने नेता चुने जाने के बाद बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान से भेंट कर अपना इस्तीफा सौंपा तथा सरकार बनाने का दावा पेश किया। नीतीश कुमार 20 नवंबर की सुबह पटना के गांधी मैदान में शपथ लेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ ङ्क्षसह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, राजग शासित राज्यों के मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री शपथग्रहण समारोह का हिस्सा बनेंगे। असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा भी इस समारोह में शिरकत करेंगे। 19 नवंबर का दिन बिहार की राजनीति के लिए सबसे व्यस्त दिन रहा। सुबह में भाजपा विधायक दल की बैठक हुई जिसमें सम्राट चौधरी नेता तथा विजय सिन्हा को उपनेता मनोनीत किया गया। इधर जदयू विधायक दल की बैठक में नीतीश कुमार को फिर विधायक दल का नेता निर्वाचित किया गया। नीतीश कुमार दसवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। वे वर्ष 2005 से ही बिहार के मुख्यमंत्री हैं। ऐसी खबर है कि राजग की सभी सहयोगी पाॢटयों ने मिलकर मंत्रिमंडल के गठन की रूप रेखा तैयार कर ली है। भाजपा इस बार कुछ नए युवा चेहरों को मौका देगी, जबकि जदयू लगभग अपने सभी पुराने मंत्रियों को मौका देगी। मंत्रिमंडल के गठन के लिए फार्मूला भी तय कर लिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मंत्रिमंडल के गठन को लेकर 19 नवंबर को ही पटना पहुंचेंगे तथा पार्टी नेताओं के साथ विचार-विमर्श करेंगे। शपथग्रहण समारोह को ऐतिहासिक बनाने के लिए गांधी मैदान में जोरदार तैयारी चल रही है। भाजपा और जदयू के अलावे लोक जनशक्ति पार्टी-आर से दो मंत्री तथा ङ्क्षहदुस्तानी अवाम मोर्चा एवं राष्ट्रीय लोक समता पार्टी से एक-एक विधायक को मंत्री बनाया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष तथा गृह मंत्रालय को लेकर भाजपा और जदयू के बीच खींचतान चल रही थी। ऐसी खबर है कि गृह मंंत्रालय पहले की तरह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास रहेगा, जबकि विधानसभा अध्यक्ष का पद भाजपा के पास रहेगा। इससे पहले के कार्यकाल में नन्दकिशोर यादव विधानसभा के अध्यक्ष चुने गए थे। नीतीश कुमार के कंधों पर राजग द्वारा दिये गए वादों को पूरा करने की चुनौती होगी। इस बार महिलाओं तथा युवाओं ने नीतीश सरकार पर विश्वास जताया है। उनके विश्वास पर खड़ा उतरने की नीतीश सरकार के समक्ष चुनौती होगी। बिगड़ती कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाना नीतीश सरकार की पहली प्राथमिकता होगी।
नीतीश को फिर बिहार की कमान