243 सदस्यीय बिहार विधानसभा के लिए दो चरणों में भारी मतदान हुआ है। इस बार भी वर्ष 2020 की तरह महिला मतदाताओं ने रिकॉर्ड मतदान किया है। लोकतंत्र के लिए भारी मतदान शुभ संकेत है। 6 नवंबर को प्रथम चरण में 65.08 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि 11 नवंबर को दूसरे चरण में 68.79 प्रतिशत मतदान हुआ जो पिछले चुनाव के मुकाबले 9.6 प्रतिशत ज्यादा है। पहले चरण में 18 जिलों के 121 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 1314 उम्मीदवार थे, जबकि दूसरे चरण में 20 जिलों के 122 विधानसभा क्षेत्रों में 1302 उम्मीदवार प्रतिद्वंद्विता कर रहे हैं। मतदाता सूची संशोधन के लिए बिहार में एसआईआर के तहत 60 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाये गए। इस बार 14 लाख नए वोटरों के नाम मतदाता सूची में शामिल किये गए हैं। प्रथम चरण के ज्यादा सीटों पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का गढ़ माना जाता है, जबकि दूसरे चरण वाली सीटों पर महागठबंधन की अच्छी पैठ है। प्रशांत किशोर की नेतृत्व वाली जन सुराज पार्टी के मैदान में उतरने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। अनेक एजेंसियों द्वारा कराये गए एग्जिट पोल में राजग को बहुमत दिखाया जा रहा है। सभी सर्वे में महागठबंधन के सत्ता में लौटने की संभावना को खारिज किया जा रहा है। एग्जिट पोल में राजग को 133 से लेकर 209 तक का आंकड़ा दिखाया जा रहा है। हालांकि कई मौकों पर एग्जिट पोल के आंकड़े गलत साबित हुए हैं। असली तस्वीर मतगणना के बाद ही साफ होगी। दोनों गठबंधन रिकॉर्ड मतदान को अपने-अपने पक्ष में बता रहे हैं। महिला एवं युवा मतदाताओं को अपनी तरफ खींचने के लिए राजग एवं महागठबंधन दोनों ने कई लुभावने वायदे किये हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चुनाव प्रक्रिया घोषित होने से ठीक पहले बिहार के 1.27 करोड़ महिलाओं के खाते में 10-10 हजार रुपए देने की घोषणा की थी। चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद ये पैसे लाभाॢथयों के खाते में पहुंचे। इसका असर मतदान के दिन देखा गया। पत्रकारों से बातचीत के दौरान कई महिलाओं ने मतदान के पीछे नीतीश सरकार के 10 हजार के तोहफे का जिक्र किया। इस हिसाब से अगर देखा जाए तो ज्यादा महिला मतदाताओं का झुकाव राजग की तरफ देखा गया। महागठबंधन ने भी महिला मतदाताओं को लुभाने के लिए माई-बहिन योजना के तहत प्रत्येक माह 2500 रुपए देने का वादा किया। लेकिन जनता वादों पर कम तत्काल फायदा पर ज्यादा विश्वास करती है। जन सुराज पार्टी शुरू में जिस तेजी के साथ अपनी पकड़ मजबूत कर रही थी, बाद में ऐसा नहीं कर पायी। जन सुराज के अनेक उम्मीदवार भाजपा के समर्थन में मैदान से हट गए या चुप हो गए। महागठबंधन के लिए बड़ा झटका तेजप्रताप यादव भी रहे। तेजप्रताप ने जन शक्ति जनता दल का गठन कर 44 उम्मीदवारों को मैदान में उतार दिया जिसने महागठबंधन के लिए निश्चित रूप से परेशानी खड़ा किया है। बिहार का सीमांचल इलाका जो अल्पसंख्यक मतदाताओं का गढ़ है वहां से महागठबंधन को ओवैशी से कड़ी चुनौती मिली है। कुल मिलाकर देखा जाए तो बिहार विधानसभा का चुनाव राजग और महागठबंधन दोनों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ है। बिहार विधानसभा चुनाव का प्रभाव राष्ट्रीय राजनीति पर निश्चित रूप से पड़ेगा। अगर बिहार में राजग की जीत होती है तो अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा की स्थिति मजबूत होगी। साथ ही मोदी सरकार का अंतर्राष्ट्रीय जगत में कद बढ़ेगा। अगर महागठबंधन राजग को सत्ता से बाहर करने में सफल रहता है तो विपक्ष मोदी सरकार पर ज्यादा हमलावर होगा। अब सभी उम्मीदवारों के भाग्य ईवीएम में बंद हो गए हैं और परिणाम का इंतजार है।