भारत और इजराइल के बीच पहले से ही मधुर संबंध रहे हैं। भले ही भारत हर मुद्दे पर इजराइल का समर्थन नहीं करता हो, ङ्क्षकतु इजराइल हर मुसीबत के वक्त भारत के साथ खड़ा दिखाई देता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों के संबंध पहले से अधिक प्रगाढ़ हुए हैं। इजराइल पिछले एक वर्ष से ज्यादा समय से हमास, हिज्बुल्लाह जैसे आतंकी संगठनों के साथ युद्ध में फंसा हुआ है। ईरान के साथ भी इजराइल का लगभग एक सप्ताह तक युद्ध चला। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप के बाद इजराइल-हमास के बीच शांति समझौता हुआ है। हालांकि अभी भी हमास हथियार डालने से इनकार कर रहा है। इसी बीच इजराइली विदेश मंत्री की भारत यात्रा ने कूटनीतिक गलियारे में सरगर्मी बढ़ा दी है। खासकर पाकिस्तान और चीन इजराइल के विदेश मंत्री की भारत यात्रा पर पैनी नजर रख रहे हैं। भारत और इजराइल इंडो मिडिल ईस्ट इकोनॉमिक कॉरिडोर (आईएमईसी) परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए आगे बढ़ना चाहते हैं। आईएमईसी परियोजना के पूरा होने से चीन की बीआरआई परियोजना प्रभावित होगी। चीन पाकिस्तान में चीन-पाकिस्तान आॢथक गलियारा (सी-पैक) योजना खटाई में पड़ जाएगी। भारत और इजराइल तीन स्तरीय योजना के तहत भारत और यूरोप के बीच नए व्यापार लाइन बनाना चाहते हैं। भारत के बंदरगाह से माल संयुक्त अरब अमीरात पहुंचेगा। फिर वहां से रोड या रेल मार्ग द्वारा साऊदी अरब और जोर्डन होते हुए इजराइल के हाईफा बंदरगाह तक पहुंचेगा। उसके बाद माल यूरोप के देशों तक पहुंच जाएगा। इस मार्ग के पूरा होने से ऊर्जा की बचत होगी तथा कम लागत पर माल यूरोप के देशों तक पहुंचेगा। इससे दूसरा लाभ यह होगा कि भारत को स्वेज नहर वाले मार्ग पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा जो काफी जाम रहता है। इस मार्ग के शुरू होने से इजराइल का हाईफा बंदरगाह काफी उपयोगी हो जाएगा। भारत नहीं चाहता है कि चीन और पाकिस्तान का सी-पैक पाक अधिकृृत कश्मीर (पीओके) से गुजरे। भारत पीओके को अपना अभिन्न अंग मानता है। इजराइल के विदेश मंत्री के भारत आने से पाक वैसे भी चौकन्ना हो जाता है। यह सबको मालूम है कि इजराइल कभी भी पाकिस्तान को मजबूत सैन्य शक्ति के रूप में देखना नहीं चाहता है। इजराइल पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने के लिए हमेशा कोशिश में लगा रहता है। इजराइली विदेश मंत्री की भारत यात्रा के दौरान निश्चित रूप से सैन्य सहयोग पर विस्तार से चर्चा हुई है। इजराइल भारत को उन्नत हथियार एवं तकनीक मुहैया करा रहा है। सीमा पर निगरानी के मामले में भी भारत उन्नत तकनीक दे रहा है। भारत और पाकिस्तान के संबंध कभी भी अच्छे नहीं रहे हैं। पाकिस्तानी सरकार तथा सेना भारत के खिलाफ हमेशा साजिश रचने में व्यस्त रहती है। भारत राजस्थान और गुजरात की सीमा पर बड़ा सैन्य अभ्यास त्रिशूल शुरू करने जा रहा है। वर्ष 1971 के बाद पाकिस्तानी सीमा पर यह सबसे बड़ा युद्धाभ्यास है, जिसमें तीनों सेनाओं के घातक कमांडो एवं साजो-सामान हिस्सा लेंगे। भारत इजराइल की दोस्ती हमेशा कसौटी पर उतरी है।