बिहार विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण में 18 जिलों के 121 विधानसभा क्षेत्र में 6 नवंबर को मतदान होगा। इस चरण में 3.75 करोड़ मतदाता 1314 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। राज्य के दो उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एवं विजय कुमार सिन्हा, इंडिया गठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव तथा 16 मंत्रियों की किस्मत दांव पर है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव राघोपुर से तीसरी बार जीत दर्ज करने की कोशिश में हैं, जबकि उनका मुकाबला भाजपा के सतीश कुमार तथा जन सुराज पार्टी के नेता चंचल ङ्क्षसह से है। यहां तेजस्वी को अपने बड़े भाई तेज प्रताप यादव से भितरघात का खतरा भी बना हुआ है। बिहार में मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद 60 लाख लोगों के नाम कट गए हैं। अब बिहार में मतदाताओं की कुल संख्या 7.24 करोड़ हो गई है। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के मैदान में उतरने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। अन्य चॢचत उम्मीदवारों में भाजपा से युवा लोकगायिका मैथिली ठाकुर (अलीनगर), राजद से भोजपुरी अभिनेता खेसारीलाल यादव (छपरा) और जन सुराज पार्टी के गायक रितेश पांडेय (करगहर) से शामिल हैं। सबसे ज्यादा मोकामा सीट को लेकर चर्चा है, जहां जदयू तथा राजद दोनों ओर से बाहुबलियों की जोर आजमाईश है। 121 सीटों में से पटना के दीघा विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 4.8 लाख मतदाता हैं, जबकि बरबीघा (शेखपुरा) में सबसे कम 2.32 लाख मतदाता हैं। प्रथम चरण में कुल मतदाताओं में से 10.72 लाख नए मतदाता हैं। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए ग्रामीण इलाकों में विशेष निगरानी की व्यवस्था की गई है। पहले चरण में मधेपुरा, सहरसा, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, सिवान, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, बेगुसराय, खगरिया, मुंगेर, लखीसराय, शेखपुरा, नालंदा, पटना, भोजपुर और बक्सर जिलों में मतदान होगा। इस बार सभी पाॢटयां बागी उम्मीदवारों से रू-ब-रू हो रही हैं। लगभग तीन दर्जन बागी उम्मीदवार राजनीतिक पाॢटयों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। महागठबंधन में कई सीटों पर मित्रवत मुकाबला भी हो रहा है। अगर बागी उम्मीदवार अपेक्षा के अनुसार वोट अपने पाले में खींच ले गये तो समीकरण बदल भी सकता है। पिछले चुनाव में 11 सीटों पर 1000 से भी कम मतों से हार-जीत का फैसला हुआ था। बिहार के चुनाव में अब भी जातीय समीकरण, स्थानीय असंतोष एवं व्यक्तिगत प्रदर्शन उम्मीदवारों के चयन का पैमाना बना रहेगा। हालांकि युवा वर्ग के आगे आने से जातिवाद का मुद्दा कमजोर हुआ है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन तथा महागठबंधन दोनों का फोकस युवा और महिला मतदाताओं को अपने पाले में खींचना है। यह सबको मालूम है कि यादव तथा मुस्लिम मतदाता पहले से ही राष्ट्रीय जनता दल के समर्थक रहे हैं। इसी तरह सवर्ण एवं अतिपिछड़ा एवं दलित मतदाता का ज्यादा झुकाव राजग की तरफ रहा है। यही कारण है कि दोनों गठबंधन अपने मूल मतदाताओं के अलावे दूसरे क्षेत्रों पर फोकस कर रहे हैं। वर्ष 2020 में हुए विधानसभा चुनाव में महिला मतदाताओं ने काफी बढ़-चढ़कर मतदान किया था जिसमें 37.25 प्रतिशत मत भाजपा के पक्ष में रहा था। उस वक्त 54.5 प्रतिशत महिला मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। यही कारण है कि नीतीश सरकार ने चुनाव से पहले ही महिलाओं के लिए कई योजनाओं की घोषणाएं की थी। 1.21 करोड़ महिलाओं के खाते में 10-10 हजार रुपए दिये गए। इसके अलावा और कई योजनाओं की घोषणाएं की गई। महागठबंधन भी इस मामले में पीछे नहीं है, उसने भी माई-बहिन मान योजना के तहत महिलाओं को मासिक 25000 रु. देने का वादा किया है। कुल मिलाकर बिहार का प्रथम चरण का चुनाव दिलचस्प होने जा रहा है।