बिहार विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण के लिए मतदान की तिथि नजदीक आने के साथ ही सियासी माहौल गरमा गया है। प्रथम चरण के लिए 6 नवंबर को मतदान है। प्रथम चरण में बिहार के 18 जिलों के 121 विधानसभा सीटों के लिए कुल 1314 उम्मीदवार अपना भाग्य आजमा रहे हैं। प्रथम चरण के लिए कुल 1690 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन भरा था जिसमें से 1375 उम्मीदवारों के नामांकन वैध पाये गए। 61 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन वापस ले लिया। अब सभी उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतर चुके हैं। प्रथम चरण में उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, दूसरे उप-मुख्यमंत्री विजय सिन्हा तथा नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। सम्राट चौधरी तारापुर से, विजय सिन्हा लखीसराय से, तेजस्वी यादव राघोपुर से अपना भाग्य आजमा रहे हैं। इसके अलावा छपरा विधानसभा क्षेत्र से भोजपुरी अभिनेता खेसारीलाल यादव राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की टिकट से, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय (भाजपा) सीवान से, नितिन नवीन (भाजपा) बाकीपुर से, मंत्री विजय कुमार चौधरी (जदयू) सरायगंज से तथा महेश्वर हजारी (जदयू) कल्याणपुर से प्रतिद्वंद्विता कर रहे हैं। प्रथम चरण में 36 सीटों पर राजद और जदयू का, 23 सीटों पर राजद और भाजपा का, 12 सीटों पर कांग्रेस और जदयू का तथा 10 सीटों पर (लोजपा-आर) तथा राजद का सीधा मुकाबला है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने सभी 243 सीटों के लिए तालमेल कर लिया है, जबकि तमाम मशक्कत के बावजूद महागठंबधन में सीट बंटवारे की गुत्थी सुलझ नहीं पायी है। बृहस्पतिवार को महागठबंधन के नेताओं ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर कहा है कि सभी घटक दल मिलकर चुनाव लड़ेंगे तथा आ रही सारी कठिनाइयों को सुलझा लिया गया है। इसके बावजूद अभी भी कई सीटों पर महागठबंधन के घटक दलों के बीच मित्रवत मुकाबला होना तय है। महागठबंधन के नेताओं ने मित्रवत मुकाबला शब्द देकर मामले को हल्का करने की कोशिश की है। महागठबंधन में तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री के चेहरा के रूप में पेश किया गया है, जबकि वीआईपी के मुकेश सहनी को उप-मुख्यमंत्री के रूप में पेश किया गया है। इसके साथ ही बिहार में चुनावी माहौल चरम पर पहुंच गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 24 अक्तूबर को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. कर्पूरी ठाकुर के गांव से अपने चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत करने जा रहे हैं, जबकि महागठबंठन 28 अक्तूबर को संयुक्त घोषणापत्र जारी कर अपने चुनाव प्रचार को हवा देने की तैयारी में है। प्रधानमंत्री के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ ङ्क्षसह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई दिग्गज प्रचार अभियान में उतर चुके हैं। महागठबंधन की तरफ से तेजस्वी यादव, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा तथा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे स्टार प्रचारकों में शामिल हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही मैदान में उतर चुके हैं। वे लगातार राजद के नेतृत्व वाली पिछली सरकारों पर हमला बोल रहे हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2005 से पहले बिहार में जंगलराज था, जहां कानून एवं व्यवस्था की स्थिति बदतर थी। उनका कहना था कि शाम के बाद लोग घर से बाहर निकलने से डरते थे। इधर जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर राजग और महागठबंधन दोनों पर तीखा हमला कर रहे हैं। उनका कहना है कि जन सुराज पार्टी ही बिहार को विकास के पथ पर तेजी से अग्रसर कर सकती है। प्रशांत किशोर दोनों गठबंधन के नेताओं को लगातार कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। इस बार के चुनाव में राजग और महागठबंधन दोनों के नेता महिला मतदाताओं को अपनी तरफ खींचने के लिए पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। जहां नीतीश कुमार ने बिहार के 1 करोड़ 21 लाख महिलाओं के खाते में 10-10 हजार रुपए भेजकर महिला मतदाताओं में अपनी पकड़ मजबूत की है, वहीं तेजस्वी यादव भी महिलाओं के लिए बड़ी-बड़ी घोषणाएं कर रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में महिलाओं ने 54 प्रतिशत से ज्यादा मतदान किया था जिसमें से 37 प्रतिशत से ज्यादा राजग के पक्ष में रहा था। यही कारण है कि दोनों पक्ष महिला मतदाताओं पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। बिहार चुनाव पर पूरे देश की नजर है। बिहार का चुनाव परिणाम राष्ट्रीय राजनीति पर काफी असर डालेगा। यही कारण है कि सभी राजनीतिक पाॢटयां अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक चुकी हंै।
बिहार में चुनावी महाभारत