अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरे देशों को धमकाने एवं दबाव में लाने के लिए टैरिफ को एक हथियार बना लिया है। कई देशों में ट्रंप का यह प्रयोग सफल हुआ है, ङ्क्षकतु भारत और चीन जैसे देश में ट्रंप का यह फार्मूला सफल होता नहीं दिख रहा है। ट्रंप के टैरिफ वार से अमरीका भी प्रभावित हो रहा है। ट्रंप की वर्तमान नीति से अमरीकी जनता महंगाई की मार झेल रही है। लेकिन ट्रंप पर इसका कोई असर पड़ता नहीं दिख रहा है। हाल ही में ट्रंप ने चीन पर 100 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जो 1 नवंबर से लागू होगा। अमरीका ने पहले ही चीन पर 55 प्रतिशत टैरिफ लगा रखा है। नवंबर से चीन पर अमरीका का कुल टैरिफ 155 प्रतिशत हो जाएगा। चीन ने भी ट्रंप की दादागिरी पर जवाबी पलटवार करते हुए अमरीका को आपूॢत की जाने वाली रेयर अर्थ मेटल पर पूर्ण रोक लगा दी है। चीन के इस कदम से अमरीका के इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन टर्बाइनों एवं रक्षा उपकरणों के निर्माण से जुड़े उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। रेयर अर्थ मेटल के मामले में चीन का वर्चस्व है। वैश्विक खनन के मामले में 69 प्रतिशत तथा रिफाइङ्क्षनग के मामले में 90 प्रतिशत रेयर अर्थ मेटल के व्यापार पर चीन का कब्जा है। होल्मियम, एॢबयम, यूलियम, यूरोपियम एवं शटरबियम जैसे 12 रेयर अर्थ मेटल पर चीन का दबदबा है। सन् 2040 तक रेयर अर्थ मेटल का उपयोग 50 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। रेयर अर्थ मेटल खनिज नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और राष्ट्रीय सुरक्षा की रीढ़ है। चीन द्वारा इस पर रोक लगाने से अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप बौखला गए हैं। चीन ने सितंबर महीने में अमरीका से खरीद की जाने वाली सोयाबिन को बंद कर दूसरा बड़ा झटका दिया है। चीन अमरीका के 50 से 60 प्रतिशत सोयाबिन का खरीददार है जो अब पूर्ण रूप से बंद हो गया है। अमरीका के 30 प्रतिशत किसान सोयाबिन की प्रमुखता से खेती करते हैं। चीन के इस कदम से अमरीकी किसानों को बड़ा झटका लगा है। अब देखना है कि चीन और अमरीका के बीच दोबारा शुरू हुआ ट्रेड वार किस मुकाम तक पहुंचता है? अमरीका ने भारत पर भी 50 प्रतिशत टैरिफ लगा रखा है। अमरीकी राष्ट्रपति का कहना है कि भारत रूस से तेल खरीद रहा है, इसलिए टैरिफ लगाया गया है। लेकिन पर्दे के पीछे कुछ और कहानी है। अमरीकी राष्ट्रपति यह चाहते थे कि भारत नोबेल पुरस्कार के लिए उनको नामित करे। दूसरी बात यह है कि अमरीका अपने कृृषि उत्पादों के लिए भारत के बाजार को खुलवाना चाहता है। अमरीका अपने अनाज मक्का को भारत में बेचना चाहता है, जो भारत को मंजूर नहीं है। 50 प्रतिशत टैरिफ लगने के बाद भारत की तरफ से अमरीका को निर्यात होने वाली वस्तुओं में 11.9 प्रतिशत की कमी आई है। जिन उत्पादों पर भारी-भरकम टैरिफ लगा है उनके निर्यात में 33 प्रतिशत की कमी आई है। भारत टैरिफ से उपजी समस्याओं को देखते हुए दूसरे विकल्पों की तलाश में जुट गया है। दुनिया के 24 देशों में भारतीय वस्तुओं के निर्यात में 10.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। भारत अमरीका से होने वाले घाटे को दूसरे देशों से व्यापार बढ़ाकर पूरा करने में लगा है। अमरीकी राष्ट्रपति की मनमानी को देखते हुए भारत, रूस और चीन व्यापार के क्षेत्र में एक-दूसरे को मदद करने में लगे हैं। भारत रेयर अर्थ मेटल के क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए दुनिया के कई देशों के साथ समझौता कर रहा है। हाल ही में भारत ने इस संबंध में अफगानिस्तान के साथ एक बड़ा समझौता किया है। कई क्षेत्रों में ट्रंप का टैरिफ वार बेअसर साबित हो रहा है। अमरीका के इस कदम से भारत, रूस, चीन और ब्राजील जैसे देश ज्यादा नजदीक हो रहे हैं। टैरिफ वार के बाद अब वर्ल्ड ऑर्डर भी बदल रहा है।
ट्रंप का टैरिफ वार