कहते हैं कि यदि आपका पड़ोसी सही नहीं है तो आपकी परेशानी सदैव बरकरार रहेगी। यह बात भारत और अफगानिस्तान पर सही साबित हो हो चुकी है। पाकिस्तान सदैव अपने अविश्वसनीय चरित्र के लिए जाना जाता है। अपने पड़ोसियों को परेशान करना उसके चरित्र का हिस्सा है, जिसे वह समय-समय पर दोहराते रहता है। भारत कई बार पाकिस्तान की अविश्वसनीयता का शिकार हो चुका है और फिलहाल अफगानिस्तान हो रहा है। पाकिस्तान ने सीजफायर के बावजूद अफगानिस्तान पर एयर स्ट्राइक कर दिया है,जिसमें अफगानिस्तान के तीन स्थानीय क्रिकेटरों की मौत हो गई है। अफगानिस्तान के क्रिकेट बोर्ड ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि बीते शुक्रवार को पक्तिका प्रांत में पाकिस्तान की एयस्ट्राइक में इन तीन खिलाड़ियों की जानें चली गईं। एक्स पर बोर्ड ने लिखा कि इस हमले में क्रिकेटर कबीर, सिबगतुल्लाह और हारुन समेत कुल 17 नागरिकों की जान गई है।  इसके साथ ही इस एयरस्ट्राइक में कुछ बच्चों समेत कुल 16 लोग घायल भी हुए हैं। 48 घंटों के संघर्ष-विराम के एलान के बावजूद पाकिस्तान की ओर से यह एयरस्ट्राइक की गई। ये खिलाड़ी पक्तिका प्रांत के शराना जिले में एक स्थानीय मैच में हिस्सा लेने गए थे। वहां से लौटने के दौरान वे एक घर में स्थानीय लोगों के साथ इक_ा थे, जिसे एयरस्ट्राइक में निशाना बनाया गया। हमले की निंदा करते हुए बोर्ड ने नवंबर में पाकिस्तान के साथ होने वाली त्रिकोणीय टी-20 सिरीज से हटने का फैसला लिया है। इस हमले की अफगानिस्तान नेशनल टीम के क्रिकेटरों ने भी निंदा की है। टीम के कप्तान राशिद खान ने इस हमले को अनैतिक और बर्बर बताते हुए एक्स पर लिखा कि वे पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक में हुई नागरिकों की मौत से बेहद दुखी हैं। साथ ही उन्होंने लिखा कि इस त्रासदी में महिलाओं, बच्चों और युवा क्रिकेटरों की जान गई जो अपने देश का अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रतिनिधित्व करने का सपना देख रहे थे। उन्होंने अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के सीरीज से हटने के फैसले की भी सराहना की।  टीम के एक और खिलाड़ी मोहम्मद नबी ने कहा कि यह घटना ना सिर्फ पक्तिका प्रांत के लिए बल्कि पूरे देश और अफगानिस्तान के पूरे क्रिकेट परिवार के लिए एक त्रासदी है। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन ने भी इस हमले की निंदा की है। साथ ही दूसरे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से अपील की है कि वे इस घटना और अफगानिस्तान में स्थानीय लोगों के खिलाफ जारी हिंसा की जांच करें।  अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र मिशन (यूएनएएमए) के मुताबिक पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच चल रहे सीमा तनाव में अब तक 37 आम नागरिकों की मौत हुई है और करीब 425 घायल हुए हैं, इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। बढ़ते तनाव के बीच तालिबान के रक्षा मंत्री और इंटेलिजेंस प्रमुख के नेतृत्व में वरिष्ठ नेताओं का एक दल शनिवार को पाकिस्तानी अधिकारियों से बातचीत करने कतर की राजधानी दोहा पहुंचा। इस बैठक की पुष्टि दोनों ही देशों की सरकारों की तरफ से की जा चुकी है।  पाकिस्तान की ओर से इस बैठक में इंटेलिजेंस प्रमुख जनरल आसिम मलिक और रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ हिस्सा लेंगे। अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भी इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उनके लिए इस विवाद को सुलझाना एक आसान काम है।  इस साल मई में भारत पाकिस्तान संघर्ष को सुलझाने का एक बार फिर श्रेय लेने के बाद उन्होंने कहा कि मैं जानता हूं कि पाकिस्तान अफगानिस्तान पर हमले कर रहा है। इस संघर्ष को सुलझाना मेरे लिए आसान है। इस बीच मुझे अमरीका को भी चलाना है, लेकिन मुझे युद्ध सुलझाना पसंद है। बीते 16 अक्तूबर को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि अगर तालिबान अफगानिस्तान की मांग पूरी करेगा तो अस्थायी युद्धविराम संधि को आगे बढ़ाया जा सकता है। पाकिस्तान चाहता है कि अफगानिस्तान पाकिस्तानी तालिबान को पूरी तरह खत्म कर दे और उनका इस्तेमाल पाकिस्तान पर हमले के लिए ना करे, जबकि अफगानिस्तान लगातार इस बात से इनकार करता आया है कि पाकिस्तानी तालिबान उनकी जमीन से अपना ऑपरेशन चला रहा है।