केंद्र सरकार देश से वामपंथ उग्रवाद खासकर नक्सलवाद (माओवाद) को खत्म करने के लिए कड़ा प्रहार कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कई बार सार्वजनिक मंचों से कहा है कि 31 मार्च 2026 तक देश में नक्सलवादियों को पूरी तरह कुचल दिया जाएगा। सरकार द्वारा उठाये गए कड़े कदम का असर है कि छत्तीसगढ़ में नक्सली आंदोलन अंतिम सांसें ले रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार के अनुसार 17 अक्तूबर को नक्सलियों के प्रवक्ता तथा बड़े नेता रूपेश उर्फ सतीश उर्फ आसन्न सहित 120 नक्सली मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के सामने आत्मसमर्पण करेंगे। इनके साथ 20 और नक्सली राष्ट्र की मुख्य धारा में लौटेंगे। इसमें से कई बड़े नक्सलियों पर सरकार ने पकड़ने के लिए ईनाम की बड़ी राशि घोषित कर रखी थी। रूपेश ने सरकार से शांति वार्ता के लिए ऑपरेशन को छह माह के लिए स्थगित करने का अनुरोध किया था, ङ्क्षकतु केंद्र सरकार ने इसे सिरे से खारिज कर दिया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में भाजपा के सत्ता में आने के बाद वर्ष 2024 से अब तक 2100 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जबकि 1785 को गिरफ्तार किया गया है। सुरक्षा बलों द्वारा चलाये गए ऑपरेशन में 477 नक्सलियों को मौत के घाट उतारा जा चुका है। अमित शाह ने स्पष्ट कर दिया है कि नक्सलियों को हर हालत में ङ्क्षहसा छोड़कर, हथियार डालकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल होना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो सुरक्षा बल कड़ी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी। इससे पहले छत्तीसगढ़ के सुकमा 27 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था, जबकि 15 अक्तूबर को कोईलीबैड स्थित बीएसएफ शिविर में 50 नक्सलियों ने हथियार डाले थे। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में भी 125 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। कुल मिलाकर सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाकर उनकी कमर तोड़ दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विदेशों में भागे नक्सलियों को भारत लाने के लिए पहल की है। केंद्र ने उनके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाई है। देश में आर्थिक अपराध, आतंकवाद तथा ड्रग तस्करी से जुड़े 338 आरोपी विभिन्न देशों में पलायन कर गए हैं, जिनको लाने के लिए सरकार प्रयत्नशील है। कई देश भारत में जेलों में अंतर्राष्ट्रीय मानक के अनुसार व्यवस्था नहीं होने का आरोप लगाकर आरोपियों प्रत्यॢपत करने में आना-कानी करते हैं। जरूरत इस बात की है कि भारतीय जेलों में हो रही कमियों को दूर किया जाए ताकि इस मामले में आ रही बाधा को दूर किया जाए। भारत के कई राज्य पिछले कई दशकों से नक्सलवाद से प्रभावित रहे हैं। नक्सली राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित पहाड़ों एवं बीहड़ जंगलों का फायदा उठाकर एक राज्य से दूसरे राज्य में पलायन कर जाते थे जिससे सुरक्षा बलों को परेशानी होती थी। यही कारण है कि केंद्र सरकार ने केंद्रीय बलों को अभियान की जिम्मेवारी सौंपकर प्रभावित राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों को तालमेल के लिए तैयार कर लिया है। देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बने नक्सली अब घुटनों पर आ गए हैं।