अफगानिस्तान में तालिबानी शासन के बावजूद भारत और अफगानिस्तान के संबंध लगातार प्रगाढ़ होते जा रहे हैं। हालांकि भारत ने अभी तक अफगानिस्तान को मान्यता नहीं दी है, ङ्क्षकतु भारत अफगान के लोगों को हमेशा मदद करता रहा है। यही कारण है कि तालिबानी शासक भारत के साथ बेहतर संबंध बनाने पर जोर दे रहे हैं। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच दुश्मनी जगजाहिर है। जो पाकिस्तान अफगानिस्तान के तालिबान सरकार को अपना कट्टर समर्थक समझता था वही तालिबानी आज उसके जानी दुश्मन बने हुए हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच वर्षों से दुश्मनी चली आ रही है। ऐसी अवस्था में भारत और तालिबान का साथ आना स्वाभाविक है। ताबिलान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी भारत के दौरे पर हैं। उसी वक्त पाकिस्तान ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) पर कार्रवाई के लिए काबुल पर मिसाइल दागा था। इसके जवाब में तालिबानी लड़ाकों ने सात जगहों से हमला कर पाकिस्तान के 50 से अधिक सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया। तालिबानी लड़ाकों ने पाकिस्तान की लगभग दो दर्जन चौकियों पर कब्जा कर लिया है। इस घटना के बाद पाक और अफगानिस्तान में तनाव बढ़ गया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि मुत्ताकी के भारत में रहते यह घटना होना दुनिया को कई संदेश देता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पाकिस्तान के दो कट्टर समर्थक देश चीन और सऊदी अरब दोनों देशों से शांति बनाये रखने की बात कर रहे हैं। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि दोनों देश उसके समर्थन में खड़े होंगे, ङ्क्षकतु ऐसा नहीं हो पाया। अफगानिस्तान में चीन की भी दिलचस्पी है, क्योंकि वह अपने बीआरआई प्रोजेक्ट का विस्तार अफगानिस्तान तक करना चाहता है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच स्थित डूरंड लाइन को अफगानिस्तान अपनी सीमा मानने से इनकार करता रहा है। उसका कहना है कि अफगानिस्तान की जमीन डूरंड लाइन से आगे भी है। अफगानी विदेश मंत्री ने पाक अधिकृृत कश्मीर के मुद्दे पर भारत के समर्थन में बयान देकर दुनिया को चौंका दिया है। अफगानिस्तान का कहना है कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। गृह युद्ध में घिरे पाकिस्तान के लिए अफगान के विदेश मंत्री का बयान किसी सदमे से कम नहीं है। एक तरफ जहां पीओके में वहां की जनता शहबाज सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, वहीं दूसरी तरफ टीएलपी के हजारों कार्यकर्ताओं ने गाजा शांति समझौत के समर्थन में पाकिस्तान के कदम को लेकर भयंकर प्रदर्शन किया है। टीएलपी कार्यकर्ताओं को नियंत्रित करने के लिए वहां के सुरक्षा बलों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। टीटीपी ने अलग से पाकिस्तान की नाक में दम कर रखा है। बलूच विद्रोही बीएलए ने बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कब्र खोद रखी है। बीएलए के भय से पाकिस्तान के अधिकारी एवं जवान बलूचिस्तान में जाने से परहेज कर रहे हैं। भौगोलिक स्थिति के कारण अफगानिस्तान विश्व राजनीति के केंद्र में है। चीन, यूरोप तथा अमरीका इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बनाए रखने के लिए अफगानिस्तान को हाथ से जाने देना नहीं चाहते। भारत तालिबानी सरकार के साथ संबंध बेहतर कर अपनी उपस्थिति और मजबूत करना चाहता है। तालिबानी विदेश मंत्री के भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण विषयों पर सहमति बनी है जिस पर आगे काम होगा। भारत अफगानिस्तान में स्थित खनिज पदार्थों को निकालने तथा सेना को प्रशिक्षण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
भारत-अफगान संबंध