बीटीसी में हुए चुनाव में इस बार बोड़ो पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) का जलवा रहा। बीटीसी के मतदाताओं ने यूपीपीएल के खिलाफ जमकर मतदान किया। इसका नतीजा यह हुआ है कि प्रमोद बोड़ो की सत्ता चली गई है, जबकि भाजपा को भी करारा झटका लगा है। इस बार के चुनाव में सरकार विरोधी लहर मतदाताओं पर हावी रहा। 40 सदस्यीय बीटीसी में हाग्राम महिलारी की नेतृत्व वाली बीपीएफ ने 28 सीटों पर परचम लहरा कर भारी बहुमत हासिल किया, जबकि बहुमत के लिए 21 सदस्यों की जरूरत है। चंदन ब्रह्म एवं गोङ्क्षवद बसुमतारी जैसे नेताओं की हार यह दर्शाता है कि हवा यूपीपीएल के खिलाफ चल रही थी। वर्ष 2020 के चुनाव में यूपीपीएल को 12 तथा भाजपा को 9 सीट मिली थी, ङ्क्षकतु इस बार यूपीपीएल को 7 तथा भाजपा को 5 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। 2020 के चुनाव में भी बीपीएफ को सबसे ज्यादा 17 सीटें मिली थीं। यूपीपीएल, भाजपा एवं गण सुरक्षा पार्टी ने मिलकर सरकार का गठन कर लिया था। 2020 से पहले बीटीसी में 15 साल तक बीपीएफ का शासन था। इस बार के चुनाव में भाजपा ने यूपीपीएल के साथ चुनावी गठबंधन नहीं किया था। इसका नतीजा सामने आया है। दोनों पाॢटयों के मतों में विभाजन का लाभ भी बीपीएफ को मिला है। बीटीसी में रहने वाले लगभग 31 लाख गैर-बोड़ो मतदाताओं में विभाजन हुआ है। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा राज्य में हिमंत विश्वशर्मा के नेतृत्व में भाजपा की सरकार है। डबल इंजन सरकार के रहते बीपीएफ की शानदार जीत हाग्रामा की लोकप्रियता को दर्शाता है। यह सही है कि प्रमोद बोड़ो के शासनकाल में बीटीसी में शांति एवं सद्भाव का वातावरण बना रहा। शिक्षा तथा विकास के क्षेत्र में बहुत काम हुआ, लेकिन सरकार का काम मतदाताओं तक नहीं पहुंच सका। राजनीति विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा और बीपीएफ में तालमेल बन सकता है। अगर हाग्रामा को केंद्रीय फंड चाहिए तो उनको भाजपा के साथ रहना ही पड़ेगा। हालांकि हाग्रामा ने भाजपा के सामने यह शर्त रखा है कि वह यूपीपीएल के साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल नहीं होगा। ऐसी स्थिति में भाजपा को यूपीपीएल को छोड़कर हाग्रामा से हाथ मिलाना पड़ सकता है। वर्ष 2026 में असम में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। भाजपा बोड़ोलैंड में अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए हाग्रामा को अपने साथ जरूर रखेगी। गौरव गोगोई के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद ऊपरी असम में भाजपा के लिए चुनौती बढ़ी है। भाजपा इसकी भरपाई बोड़ोलैंड क्षेत्र से करना चाहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने बीटीसी चुनाव में भाजपा की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरा जोर लगाया था। मुख्यमंत्री ने बोड़ोलैंड में भाजपा के पक्ष में जमकर चुनाव प्रचार किया था। इस दौरान उन्होंने यूपीपीएल पर निशाना साधने में कोई कोताही नहीं बरती थी। इसके बावजूद भाजपा का नंबर 9 से घटकर 5 पर आना गंभीर ङ्क्षचता का विषय है। बीटीसी चुनाव के बाद हाग्रामा फिर से असम की राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। जनता ने जिस तरह उनका समर्थन किया है, उनपर जिम्मेवारी भी बढ़ गई है। भाजपा को भी अपनी नाकामयाबी पर ङ्क्षचतन करने जरूरत होगी।
बीटीसी में बीपीएफ का जलवा