गुवाहाटी : असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्वशर्मा ने रविवार को आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के निमंत्रण पर पाकिस्तान का दौरा किया था और उन्होंने पड़ोसी देश के प्रतिष्ठान के साथ करीब से काम किया था। शर्मा ने यहां एक आधिकारिक कार्यक्रम के इतर पत्रकारों से कहा कि सरकार के पास इस दावे के समर्थन में दस्तावेजी सबूत हैं और उचित सत्यापन के बाद हर सबूत 10 सितंबर तक जनता के सामने पेश किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि गौरव गोगोई आईएसआई के निमंत्रण पर पाकिस्तान गए थे। मैं यह पहली बार कह रहा हूं। हमारे पास इसके दस्तावेज हैं। वह पर्यटन के उद्देश्य से नहीं गए थे। वह निश्चित रूप से प्रशिक्षण लेने के लिए वहां गए थे। मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता पाकिस्तान सरकार के सीधे निमंत्रण पर वहां गए थे और यह खतरनाक बात है। उन्होंने कहा कि वह पाकिस्तानी प्रतिष्ठान के साथ करीब से काम कर रहे थे। गृह विभाग कब निमंत्रण भेजता है? यह केवल प्रशिक्षण देने के लिए होता है। नहीं तो आईएसआई उन्हें क्यों आमंत्रित करती? मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने कहा कि विदेश मामलों (विभाग) या किसी विश्वविद्यालय से आमंत्रण मिलना एक अलग बात है। यह विदेश मामलों या सांस्कृृतिक विभागों से नहीं था। वह पाकिस्तान के गृह विभाग के सीधे निमंत्रण पर वहां गए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के पास गोगोई के कृत्यों के सबूत हैं और इससे बचने का कोई रास्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके सारे रास्ते बंद हो चुके हैं। हमने सबूत देख लिए हैं। बस हमें कागजात हासिल करने के लिए सितंबर तक का समय चाहिए। हमें एक नोटिस जमा करना होगा और फिर दूतावास हमें दस्तावेज उपलब्ध करायेगा। दस सितंबर अंतिम तारीख है और कृृपया उस समय तक इस बारे में फिर से न पूछें। मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद गौरव गोगोई पर उनकी पत्नी के आईएसआई से कथित संबंधों को लेकर निशाना साध रहे हैं। शर्मा ने दावा किया था कि गोगोई की ब्रिटिश पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न ने भारत और पाकिस्तान के बीच 19 बार यात्रा की थी। उन्होंने मीडिया के एक वर्ग की भी आलोचना की और कहा कि कुछ स्थानीय मीडिया द्वारा यह प्रचारित किया जा रहा है कि गोगोई पाकिस्तान के गृह विभाग से पत्र मिलने के बाद वहां गए थे। उन्होंने कहा कि यह बहुत गंभीर मामला है। दस सितंबर तक इंतजार कीजिए और आपको विवरण जानकर हैरानी होगी। डॉ. शर्मा ने कहा कि जब वह मुख्यमंत्री की कुर्सी से हर 24 घंटे में कह रहा है कि हमारे पास पक्के सबूत हैं, तो आपको मुख्यमंत्री पर विश्वास करना चाहिए और (गोगोई के लिए) अपने प्यार और स्नेह का त्याग करने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के मामले को लेकर कोई समझौता नहीं हो सकता। यह चुनाव के दायरे से बाहर का बहुत गंभीर अपराध है। अन्यथा, मैं इसे अगले साल अप्रैल में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पेश कर सकता था। उन्होंने कहा कि खेलकूद या धार्मिक उद्देश्यों के लिए लोग जाते हैं। पंजाब से कांग्रेस और भाजपा के सभी सदस्य पाकिस्तान के गुरुद्वारा जाते हैं; यह अलग बात है और इसकी अनुमति विशेष अनुमति के तहत दी जाती है। हालांकि, यदि भाजपा से कोई व्यक्ति व्यापार में लगा है या पाकिस्तान सरकार के निमंत्रण पर वहां गया है, तो निश्चित रूप से मैं आवश्यक कार्रवाई के लिए हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा के पास नाम भेजूंगा। उन्होंने गोगोई को सबूत मांगने वाले ''बचकाने बयानÓÓ न देने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि गौरव गोगोई भी जानते हैं कि मुख्यमंत्रीे पास सबूत हैं। केवल उन्हें अदालत द्वारा प्रमाणित किए जाने की आवश्यकता है, और उन्हेें उस प्रक्रिया के लिए तीन महीने चाहिए। जब उनसे 'ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि में आतंकवाद से निपटने के भारत के संकल्प को सामने रखने के लिए विश्व की राजधानियों की यात्रा करने वाले सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में गोगोई को शामिल न किए जाने के बारे में पूछा गया तो शर्मा ने कहा कि पूर्वोत्तर के तीन सांसदों को इसमें शामिल किया गया है और यहां के लोग इस बात से बहुत खुश हैं। उन्होंने कहा कि नगालैंड से एक और असम से दो सांसद वहां हैं। हमें बेहद गर्व है और हमें लगता है कि हमारे तीन सांसद वैश्विक मंच पर भारत का पक्ष रखने में सार्थक योगदान दे सकेंगे। शर्मा ने कहा कि पाकिस्तान एक आतंकवादी देश है और अब वह बांग्लादेश में भी अशांति फैलाने की कोशिश कर रहा है, जिसका सीधा असर पूर्वोत्तर क्षेत्र पर पड़ सकता है। इसलिए, मेरा मानना है कि असम के सांसद भुवनेश्वर कलिता और प्रदान बरुवा भारत और पूर्वोत्तर क्षेत्र की चिंताओं को विश्व मंच के सामने रखने में सक्षम होंगे।
भारत ने बांग्लादेश पर लगाए कई..
व्यापार निदेशालय ने शनिवार को बांग्लादेश से तैयार कपड़ों, फलों या फलों के स्वाद वाले पेय पदार्थों, कपास, सूती धागे के उत्पादों, प्लास्टिक और पीवीसी उत्पाद आदि के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि केवल नदी के बंदरगाहों पर नहीं, बल्कि जमीन के रास्ते भी बांग्लादेशी सामानों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। हालांकि, नवा शेवा और कोलकाता बंदरगाहों के जरिए माल की आवाजाही पर कोई प्रतिबंध नहीं है। भारत सरकार ने बांग्लादेश में उत्पादित वस्तुओं के आयात पर कड़ा रुख अपनाया है। भारत सरकार के इस कड़े रूख से बांग्लादेश में उत्पादित सामग्री के निर्यात में एक बड़ी चुनौती आना निश्चित है। उल्लेखनीय है कि बांग्लदेश की 93 प्रतिशत निर्यातित सामग्री भूमि बंदरगाहों के माध्यम से भारत में आते हैं। मंत्रालय के नोटिस के तहत असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम के लेंड कास्टम स्टेशन यानी भूमि कॉस्टम स्टेशन और इंटिग्रेटेड चेक पोस्ट के जरिए फल, फलों के रस, शेक, चिप्स और मिठाइयों जैसे प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, कपास और सूती धागे से बने उत्पाद, कपास और सूती धागे से बने उत्पाद, प्लास्टिक, पीवीसी सामग्री, पेंट, लकड़ी के फर्नीचर आदि को भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार ने पश्चिम बंगाल के चंग्राबांध और फूलबाड़ी के भूमि निकासी स्टेशनों के माध्यम से बांग्लादेशी सामानों के आयात को भी रद्द कर दिया है। हालांकि, यह प्रतिबंध बांग्लादेश से मछली, एलपीजी और खाद्य तेल पर लागू नहीं होगा। निर्देश में कहा गया है कि यह कदम देश की आयात नीति को तत्काल प्रभाव से संशोधित करने के लिए है। हालांकि, नया निर्देश नवा शेवा और कोलकाता बंदरगाहों के माध्यम से बांग्लादेशी रेडीमेड कपड़ों के आयात को प्रतिबंधित नहीं करेगा। इसके अलावा, भारत सरकार ने पहले बांग्लादेश से किसी तीसरे देश में निर्यातित वस्तुओं के ट्रांसशिपमेंट को निलंबित कर दिया था। हालांकि, बांग्लादेश से पड़ोसी नेपाल और भूटान में माल के आयात पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। इससे पहले, 9 अप्रैल 2025 में, भारत ने बांग्लादेश से अपनी ट्रांस-शिपमेंट सुविधा वापस ले ली थी। बांग्लादेश ट्रांस-शिपमेंट सुविधाओं के माध्यम से भारतीय बंदरगाहों और दिल्ल हवाई अड्डों के माध्यम से मध्य पूर्व और यूरोप को माल निर्यात करता था।
असम सरकार ने 22,900 करोड़ के...
के प्रस्तावित निवेश के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। हाल की प्रगति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पहले ही तीन प्रमुख बुनियादी ढांचे से संबंधित परियोजनाओं के कार्यान्वयन की शुरुआत कर दी है। पहली के बारे में उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल सितंबर में गुवाहाटी रिंग रोड पर नारंगी-कुरुआ पुल की आधारशिला रखने वाले हैं, जिसकी अनुमानित लागत 7,800 करोड़ रु. है। उन्होंने यह भी बताया कि गुवाहाटी-सिलचर एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेस-वे को केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी मिल गई है और इसके लिए 23,000 करोड़ रु. का बजट आवंटित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एडवांटेज असम 2.0 पहल के बाद राज्य सरकार ने बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में 30,000 करोड़ रुपए का निवेश हासिल किया है और विश्वास व्यक्त किया कि निकट भविष्य में यह आंकड़ा और बढ़ने की संभावना है। उन्होंने बताया कि एडवांटेज असम 2.0 शिखर सम्मेलन के दौरान सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। परिणामस्वरूप, इस आयोजन में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापनों के आधार पर कुल 22,900 करोड़ रुपये के निवेश वाली 20 प्रमुख परियोजनाओं के लिए कार्यान्वयन शुरू हो गया है। ग्वालपाड़ा के मटिया में, कोहिनूर पल्प एंड पेपर प्राइवेट लिमिटेड और आरपीएन स्पेशियलिटी प्राइवेट लिमिटेड 1,800 करोड़ रु. के निवेश से दो प्रमुख पेपर मिलों की स्थापना की प्रक्रिया में हैं और निर्माण कार्य पहले ही शुरू हो चुका है। एसकेजे क्लीन एनवायरो वेंचर्स लिमिटेड 137 करोड़ रु. के निवेश से चांगसारी में एक प्लास्टिक रीसाइक्लिंग प्लांट स्थापित करने की योजना बना रहा है और इस साल दिसंबर तक इस परियोजना के शुरू होने की उम्मीद है। मैथेसन हाइड्रोजन के साथ हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि तीन इथेनॉल उत्पादन कंपनियों के साथ समझौतों को भी अंतिम रूप दिया गया है। उन्होंने कहा कि कामाख्या बायोफ्यूल्स, गुलशन पॉलीओल्स, आधार ग्रीन और सिस बायोटेक द्वारा शुरू की गई परियोजनाओं में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। इसके अतिरिक्त उन्होंने कहा कि टिहू में ब्रह्मपुत्र की परियोजना ने भी काफी प्रगति की है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा कई कंपनियों ने निवेश का काम शुरू कर दिया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने रविवार को दावा किया कि वर्तमान समय में वामपंथी और उदारवादी विचारधाराएं अब बीती बातें हो गई हैं और कहा कि छात्र जीवन में बड़े उद्योगपतियों का विरोध करने वाले युवा जीवन में आगे चलकर ऐसे व्यापारिक घरानों के लिए काम करते हैं। मुख्यमंत्री डा.शर्मा ने यह भी कहा कि युवा पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए राज्य में निवेशकों का स्वागत जरूरी हो गया है और अपील की कि लोगों को बड़े युवा नेता के जाल में नहीं फंसना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम टाटा, अदाणी, अंबानी जैसे बड़े नामों का विरोध कर सकते हैं; लेकिन जब बाद में नौकरी पाने की बात आती है तो लोग उनके लिए काम करते हैं। शर्मा ने कहा कि राज्य में निवेशकों का स्वागत करना आवश्यक है, ताकि दूसरे शहरों में 7,000-8,000 रुपए के मामूली मासिक वेतन पर रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं को अपने घर के पास नौकरी मिल सके। उन्होंने कहा कि अगर युवाओं को राज्य से बाहर जाकर बड़ी कंपनियों में इतनी मामूली रकम पर काम करना पड़ता है तो उन निवेशकों को हमारे राज्य में क्यों नहीं लाया जाता? मुख्यमंत्री शर्मा ने दावा किया राज्य के 20 लाख युवा कम वेतन वाले पदों पर बाहर काम कर रहे हैं और उन्हें श्रम कानूनों या सामाजिक सुरक्षा के तहत कोई सुरक्षा नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए निवेशकों का स्वागत करना आवश्यक है। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि हम किसी बड़े युवा नेता के बहकावे न आएं। हम समझदार हो चुके हैं। हमारे लिए हमारे 20 लाख युवाओं का जीवन और भविष्य इस नेता से अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्य इस बहकावे में नहीं आए और अब सबसे समृद्ध राज्यों में से हैं।
आतंक और व्यापार एक साथ नहीं...
के बीच अमित शाह राष्ट्र ध्वज थामे जुलूस के आगे चलते दिखे। गृह मंत्री तिरंगा थामे हुए नल सरोवर चौकड़ी से एकलिंगजी रोड पर महाराणा प्रताप चौक तक पैदल चले। यहां उन्होंने 16वीं सदी के महान योद्धा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। पैदल मार्च में हिस्सा लेने वालों में गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी, स्थानीय विधायक, भाजपा नेता और कार्यकर्ता तथा यहां के शिक्षक और प्राथमिक एवं माध्यमिक विभागों के पदाधिकारी शामिल थे। गुजरात भाजपा ने कहा कि यात्रा में साणंद और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग, सामाजिक और राजनीतिक नेता तिरंगा यात्रा में शामिल हुए और भारत माता की जय के नारे लगाए तथा सशस्त्र बलों के साहस और वीरता को सलाम किया। ऑपरेशन सिंदूर के बाद देशभर में भाजपा की ओर से सेना के सम्मान में तिरंगा यात्रा निकाली जा रही है।
सांसद दिलीप सैकिया को प्रतिष्ठित...
में संसदीय लोकतंत्र में उत्कृृष्ट और निरंतर योगदान के लिए चार विशेष पुरस्कार दिए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि पिछले 15 साल में पहली बार पूर्वोत्तर से किसी सांसद को संसद रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इस पुरस्कार के लिए चुने जाने पर दिलीप सैकिया ने पूर्वांचल प्रहरी को बताया कि यह पुरस्कर असम की जनता को समॢपत है। संसद रत्न पुरस्कार के चयन से असम की जनता के प्रति हमारी जिम्मेदारी और बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि हम असम के विकास तथा असम के लोगों के कल्याण के लिए पूरी ताकत के साथ काम करते रहेंगे।
तीसरे चरण में दबाव की समस्या के...
सामान्य था। तीसरे चरण में मोटर सही से चालू हो गई थी लेकिन इस चरण के संचालन के दौरान मिशन पूरा नहीं हो सका...। तीसरा चरण एक ठोस मोटर प्रणाली है। नारायणन ने कहा कि मोटर केस के चैम्बर दबाव में गिरावट आई और मिशन पूरा नहीं हो सका। हम पूरे प्रदर्शन की समीक्षा कर रहे है तथा जल्द ही और जानकारी देंगे। रविवार के प्रक्षेपण का परिणाम कई लोगों के लिए आश्चर्यजनक रहा होगा क्योंकि पीएसएलवी इसरो का सबसे विश्वसनीय प्रक्षेपण यान बनकर उभरा है। उड़ान भरने के बाद चार चरणों वाले रॉकेट से दूसरे चरण में अलग होने तक मिशन नियंत्रण केंद्र में यह घोषणा की गई कि देश के विभिन्न भागों में स्थित इसरो के अन्य केंद्रों द्वारा उन पर नजर रखी जा रही है। इसरो द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, पीएस1 (प्रथम चरण) का पृथक्करण प्रक्षेपण के बाद 111.64 सेकंड में निर्धारित किया गया था, लेकिन यह 110 सेकंड में ही पूरा हो गया। इसके अलावा रॉकेट के दूसरे चरण का 'इग्निशनÓ 111.84 सेकंड पर प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन यह प्रक्रिया 110.2 सेकंड में पूरी हो गई जिससे मामूली अंतर रह गया। इसी प्रकार, पीएस2 (द्वितीय चरण) पृथक्करण का लक्ष्य 264.34 सेकंड में निर्धारित था, लेकिन यह 261.8 सेकंड में हुआ। चीजें अपेक्षित रूप से आगे बढ़ रही थीं जो मिशन की प्रगति के बारे में वैज्ञानिकों द्वारा की जा रही नियमित घोषणाओं से पता चल रहा था लेकिन तीसरे चरण पर पहुंचने के बाद एक गड़बड़ी सामने आई।
पाक में लश्कर आतंकी सैफुल्लाह मारा गया
रहा था। उन्होंने बताया कि खालिद आज (रविवार को) दोपहर सिंध के मतली में अपने घर से निकला था और सिंध प्रांत के बदनी में एक चौराहे के पास हमलावरों ने उसे गोली मार दी। लश्कर के अबू अनस का करीबी सहयोगी खालिद नागपुर में संघ मुख्यालय पर हमले का मास्टरमाइंड था, जिसमें तीनों आतंकवादी मारे गए थे। संघ मुख्यालय पर हमले के अलावा, लश्कर का यह आतंकवादी खालिद 2005 में बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान पर हुए आतंकी हमले में भी शामिल था, जिसमें आईआईटी के प्रोफेसर मुनीश चंद्र पुरी की मौत हो गई थी और चार अन्य लोग घायल हुए थे। आतंकवादी घटनास्थल से भाग निकले थे, हालांकि बाद में पुलिस ने मामले की जांच की और अबू अनस के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। अनस अब भी फरार है। खालिद 2008 में उत्तर प्रदेश के रामपुर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) शिविर पर हुए हमले का भी मास्टरमाइंड था, जिसमें सात जवान और एक नागरिक की मौत हो गई थी। दोनों आतंकवादी अंधेरे का फायदा उठाकर भाग गए थे।
सोनोवाल ने किया 'सागर में सम्मान...
है। वर्ष 2014 में 341 महिला नाविकों की तुलना में वर्ष 2024 में यह संख्या 2,557 तक पहुंच गई है, जो कि 649 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि है। वहीं पंजीकृत महिला नाविकों की संख्या 2015 के 1,699 से बढ़कर 2024 में 14,255 हो गई है — जो 739 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नारी शक्ति को राष्ट्र निर्माण की धुरी मानते हुए सरकार ने इस दिशा में विविध प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, जागरूकता अभियान और नौवहन कंपनियों को प्रोत्साहन जैसी योजनाएं शुरू की हैं। सागर में सम्मान नीति के माध्यम से महिलाओं को तकनीकी और निर्णयात्मक भूमिकाओं में लाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 2030 तक 12 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की योजना है। इस कार्यक्रम के दौरान 10 विशिष्ट महिला समुद्री पेशेवरों को भी सम्मानित किया गया, जो इस क्षेत्र में बदलाव और प्रेरणा की प्रतीक हैं। यह आयोजन 'वूमेन इन मेरीटाइम : लीडिंग ट्रांसफॉर्मेशन एंड सस्टेनेबिलिटी विषय पर आयोजित हुआ और भारत की वैश्विक समुद्री शक्ति बनने की दिशा में नारी समावेशन की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।
हैदराबाद में इमारत में आग लगने...
शॉर्ट सर्किट होना प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि आग लगने के समय इमारत में कुल 21 लोग थे, जिनमें से अग्निशमन विभाग द्वारा 17 को अचेत अवस्था में अस्पताल पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि इमारत से बाहर निकलने का सिर्फ एक ही रास्ता था जो कि एक सीढ़ी थी जो काफी संकरी थी और इसी कारण वहां मौजूद लोग सुरक्षित बाहर नहीं निकल पाए। तेलंगाना अग्निशमन विभाग ने एक बयान में बताया कि आग भूतल पर लगी और ऊपरी मंजिलों तक फैल गई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हैदराबाद में आग लगने की घटना में जानमाल की हानि पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये दिये जाने की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट किया कि तेलंगाना के हैदराबाद में आग लगने की घटना में लोगों की मौत होने से बहुत दुखी हूं। प्रियजनों को खोने वालों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं। मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये दिए जाएंगे। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने घटना पर शोक व्यक्त किया और वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया कि इमारत में फंसे लोगों को बचाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं। इससे पहले, अग्निशमन विभाग के एक अधिकारी ने बताया था कि सुबह करीब 06.16 बजे आग लगने की सूचना मिली थी जिसके बाद दमकलकर्मी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि कई लोग अचेत अवस्था में मिले और उन्हें अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
मणिपुर में जबरन वसूली के आरोप...
मामला है और इसके लिए वे व्यक्तिगत झगड़े, पारिवारिक झगड़े और यहां तक कि वैवाहिक विवाद भी सुलझाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर आपको कोई समस्या है और आपके पास सही 'कनेक्शनÓ है, तो वे आपका 'समाधान बन जाते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें निश्चित रूप से कीमत चुकानी पड़ती है। अधिकारियों ने बताया कि हाल ही में मणिपुर पुलिस ने इंफाल पूर्वी से 'टाइगर नामक एक व्यक्ति को उस समय हिरासत में लिया, जब वह एक दंपति के परिवारों के बीच वैवाहिक विवाद को सुलझाने के काम में लगा था। बाद में उसकी पहचान प्रतिबंधित यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) से जुड़े लैशराम रमेश सिंह के रूप में हुई। प्रारंभिक जांच के दौरान, उसने पुलिस को बताया कि वह सितंबर 2024 में संगठन में शामिल हुआ था और वर्तमान में इसके वित्त अनुभाग में काम कर रहा था। अधिकारियों ने दावा किया कि उसने पैसों की मांग और धमकियां देकर तथा इंफाल और इसके आसपास के इलाकों में स्थित सरकारी अधिकारियों से धन एकत्र करके जबरन वसूली की गतिविधियों में शामिल होने की बात कबूल की है। इसके अलावा उसने विभिन्न सरकारी निविदाओं में व्यापारिक घरानों से भी पैसे वसूलने की बात कबूल की है। उसके पास से दो मोबाइल हैंडसेट और 21,50,000 रुपये की जबरन वसूली की रकम बरामद की गई। अधिकारियों ने कहा कि उग्रवादी समूह इस काम में लगातार प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनकी एक रणनीति में किसी भी पूर्वोत्तर राज्य से झूठे दस्तावेज के साथ सिम कार्ड प्राप्त करना और उनका उपयोग व्हाट्सऐप, टेलीग्राम आदि पर वाई-फाई नेटवर्क के माध्यम से 'वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉलÓ (वीओआईपी) कॉल करना शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि पीड़ितों को सीमा पार से एक कॉल आती थी और उन्हें एक कोड दिया जाता था। फिर उन्हें निर्देश दिया जाता था कि जो भी व्यक्ति वह कोड बताएगा, उसे मांगे गए पैसे सौंप दें। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में, कुछ संदिग्ध नागरिक संगठन जबरन वसूली में शामिल थे, जिसे बाद में कुछ कटौती के बाद उग्रवादी समूहों तक पहुंचा दिया गया। इस वर्ष फरवरी में मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद अनुच्छेद 356 के तहत पूर्वोत्तर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था, जिसका उद्देश्य जातीय संघर्ष से प्रभावित राज्य में व्यवस्था बहाल करना था। असम राइफल्स, जो मणिपुर में कानून और व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, ने जबरन वसूली में लिप्त 77 उग्रवादियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें चुराचांदपुर के पहाड़ी आधारित समूहों के सात उग्रवादी भी शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में जबरन वसूली मुख्य रूप से प्रतिबंधित यूएनएलएफ, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए), कांगलेई यावोल कानबा लुप (केवाईकेएल) और पीपुल्स रिवॉल्यूशनरी पार्टी ऑफ कांगलेईपाक (पीआरईपीएके) के लोगों द्वारा की जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में यूएनएलएफ के सदस्यों की संख्या 530 है, जिसके बाद पीएलए के 450 तथा केवाईकेएल के 25 सदस्य हैं।
नौ देश, 12000 न्यूक्लियर बम...
पर इसे गिरा दिया। नतीजा इतना भयानक था कि इन दोनों शहरों में आज भी उसका असर देखा जा सकता है। अमेरिका के हाथ जब ये खतरनाक हथियार लगा, तो बाकी दुनिया में भी इसे हासिल करने की होड़ शुरू हो गई। न्यूक्लियर बम बनाने के चार साल बाद, 1949 में सोवियत संघ (अब रूस) दूसरा ऐसा देश बना जिसने परमाणु बम बना लिया। फिर 1952 में ब्रिटेन भी इस कतार में शामिल हुआ और न्यूक्लियर टेस्ट कर न्यूक्लियर पावर कंट्री बन गया। आठ साल बाद, 1960 में फ्रांस ने भी परमाणु परीक्षण कर दुनिया का चौथा परमाणु शक्ति संपन्न देश बनने का दावा किया। ऐसा कहा जाता है कि फ्रांस को इस मामले में अमेरिका से कुछ मदद भी मिली थी। चीन पर भी दबाव बढ़ता गया और चार साल बाद यानी 1964 में चीन ने भी सफल परमाणु परीक्षण किया और पांचवां न्यूक्लियर पावर देश बना। इजरायल ने कभी आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया कि उसके पास परमाणु बम हैं, लेकिन माना जाता है कि 1967 तक पश्चिमी देशों की मदद से इजरायल ने भी परमाणु बम बना लिया था। हालांकि, इसकी पुष्टि पहली बार 1986 में हुई और तब दुनिया ने उसे छठे न्यूक्लियर पावर देश के रूप में स्वीकार किया। चीन के परमाणु शक्ति बनने के बाद भारत में भी इस दिशा में गंभीर प्रयास शुरू हुए। भारत के लिए न सिर्फ चीन बल्कि पाकिस्तान भी हमेशा से एक खतरा रहा है। आखिरकार 1974 में ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा के तहत भारत ने सफल परमाणु परीक्षण किया और दुनिया का सातवां परमाणु शक्ति संपन्न देश बन गया। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका ने भी 1977 में सफल न्यूक्लियर टेस्ट कर लिया था, लेकिन ये देश इस लिस्ट में एक अलग मिसाल है। उसने अपने बनाए गए परमाणु हथियार खुद ही नष्ट कर दिए और न्यूक्लियर होड़ से खुद को अलग कर लिया। भारत के परमाणु परीक्षण के बाद पाकिस्तान ने भी अपनी कोशिशें तेज कर दीं, लेकिन उसे सफलता पाने में 24 साल का वक्त लगा। 1998 में पाकिस्तान ने अपने पहले न्यूक्लियर टेस्ट के साथ दुनिया के नौवें परमाणु संपन्न देश के तौर पर नाम दर्ज कराया। इसके बाद जो आखिरी देश इस लिस्ट में शामिल हुआ, वो था नॉर्थ कोरिया। चीन और रूस की मदद से नॉर्थ कोरिया ने 2006 में पहला परमाणु परीक्षण किया और दसवां न्यूक्लियर पावर देश बना। लेकिन चूंकि दक्षिण अफ्रीका न्यूक्लियर हथियारों से खुद को अलग कर चुका था,इसलिए फिलहाल दुनिया में सिर्फ 9 देश हैं जिनके पास परमाणु हथियार हैं।
गाजा में इजराइल के हमलों में...
के स्वास्थ्य मंत्रालय की आपातकालीन सेवाओं के अनुसार, उत्तरी गाजा में जबालिया शरणार्थी शिविर में एक मकान पर हुए हमले में एक ही परिवार के नौ लोग मारे गए। वहीं नागरिक सुरक्षा सेवा के अनुसार, जबालिया में ही एक परिवार के घर पर हुए एक अन्य हमले में सात बच्चों और एक महिला समेत 10 लोगों की मौत हो गई। बीती रात हुए हमलों के बारे में इजराइल की सेना की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। यह रक्तपात ऐसे समय में हुआ है जब इजराइल ने गाजा में हमले तेज कर दिए हैं। इजराइल ने कहा है कि वह क्षेत्र पर कब्जा करने, गाजा के दक्षिण में लाखों फलस्तीनियों को विस्थापित करने और सहायता के वितरण पर अधिक नियंत्रण करने की योजना बना रहा है।इस बीच, स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि उत्तरी गाजा में लोगों की सेवा करने वाले मुख्य अस्पताल को इजराइली हमले बढ़ने तथा घेराबंदी के कारण बंद करना पड़ा है।