हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व अत्यधिक महत्व रखता है। नौ दिनों के इस पावन पर्व के दौरान मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा का विधान है। प्रत्येक दिन देवी के एक विशिष्ट रूप की आराधना की जाती है। यह पर्व आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष प्राप्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इन नौ दिनों में माता रानी की पूजा के साछ व्रत का भी बड़ा महत्व होता है। मान्यता है कि जो लोग इन नौ दिनों में उपवास रखते हैं उनके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति के लिए यह व्रत उपयुक्त नहीं होता। कुछ लोगों को यह व्रत नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे लाभ के बजाय हानि हो सकती है। आइए जानते हैं कि किन लोगों को उपवास न रखने की सलाह दी जाती है।

किन लोगों को नहीं रखना चाहिए नवरात्रि का व्रत?

यदि कोई महिला मासिक धर्म में है, तो उसे नवरात्रि का व्रत रखने से बचना चाहिए। वहीं अगर उपवास के दौरान मासिक धर्म शुरू हो जाए, तो वह इसे जारी रख सकती है।

गर्भवती महिलाओं को नौ दिन तक उपवास नहीं करना चाहिए, क्योंकि इस दौरान अनाज के सेवन की मनाही होती है। ऐसे में गर्भस्थ शिशु को सही पोषण न मिलने पर उसका विकास प्रभावित हो सकता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान उपवास से बचना चाहिए।

जिन महिलाओं ने हाल ही में शिशू को जन्म दिया हो, उन्हें भी नवरात्रि का व्रत नहीं करना चाहिए। मां के भोजन से ही शिशु को पोषण मिलता है, इसलिए मां के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार लेना जरूरी है।

एनीमिया से ग्रस्त लोगों को भी व्रत नहीं रखना चाहिए। खून की कमी के कारण शरीर में कमजोरी बढ़ जाती हैं। ऐसे में व्रत रखना स्वास्थ्य के लिए और भी हानिकारक साबित हो सकता है। 

डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए खानपान का संतुलन बनाए रखना आवश्यक होता है। व्रत के कारण ब्लड शुगर लेवल अस्थिर हो सकता है, जिससे स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में उपवास रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

नवरात्रि के दौरान व्रत के नियम

नवरात्रि के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। इन नौ दिनों में काले कपड़े पहनने से बचना चाहिए। साथ ही व्रत रखने वालों को दिन में सोने से परहेज करना चाहिए। इन बातों का पालन करने से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है और मां दुर्गा की कृपा बनी रहती है।