सदन मोहन महाराज गुवाहाटी: महानगर गुवाहाटी के सरूसजाय स्टेडियम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में कला और संस्कृति के असाधारण संगम के प्रतीक झुमुर नृत्य के भव्य आयोजन ने अपनी भव्यता और आकर्षण से न केवल दर्शकों का मन मोहा, बल्कि एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी स्थापित किया। इस ऐतिहासिक आयोजन का प्रधानमंत्री मोदी, राज्यपाल लक्षमण प्रसाद आचार्य, मुख्यमंत्री हिमंत विश्वशर्मा, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ,कई केंद्रीय मंत्री और करीबन 60 देशों के राजदूत इसके गवाह बने। यह आयोजन न केवल एक सांस्कृतिक उत्सव था,बल्कि यह आदिवासी समुदाय की कला और संस्कृृति को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का एक अद्वितीय अवसर था। झुमुर नृत्य का यह आयोजन अपनी भव्यता और उद्देश्य में अनोखा था। इसका मुख्य उद्देश्य केवल नृत्य की प्रस्तुतियों से मनोरंजन करना नहीं था,बल्कि इसके माध्यम से आदिवासी समुदाय के लोक नृत्यों के महत्व को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने के साथ ही यह आयोजन असम के चाय उद्योग के 200 साल पूरे और अदिवासी समुदाय के अवदानों को रिकॉर्ड के साथ विश्वभर में स्थापित करना था। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को असम की अपनी दो दिवसीय यात्रा की शुरुआत एक भव्य झुमर नृत्य प्रदर्शन देखकर की, जिसमें लगभग 9,000 नर्तक और ढोल वादक शामिल हुए। इस अवसर पर पारंपरिक ढोल के साथ झुमुर नृत्य प्रस्तुति के साथ ही बिहू के बाद असम के नाम के साथ एक और विश्व रिकार्ड दर्ज हो गया। मालूम हो कि प्रधानमंत्री मोदी लगभग तीन घंटे देरी से आए और आने के साथ ही वे एक खुले वाहन पर चढ़कर पूरे स्टेडियम में उपस्थित कलाकारों के साथ ही वहांं खचाखच भरी भीड़ का भी आभिवादन किया। उसके बाद प्रधानमंत्री ने चाय जनजाति समुदाय के पारंपरिक ढोल बजाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस दौरान मुख्यमंत्री हिमंत विश्वशर्मा, केंद्रीय मंत्री, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा और राज्य के सांसद भी उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि असम सरकार द्वारा इंदिरा गांधी एथलेटिक स्टेडियम में आयोजित इस कार्यक्रम में असम के चाय उद्योग के 200 साल पूरे होने पर इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आप को चाय जनजाति समुदाय से जोड़ते हुए कहा कि कि चाय की महक और गुणवत्ता को चायवाले से बेहतर कौन समझ सकता है? चाय बगान की सुंदरता और उसकी सुगंध एक चाय वाला ही समझ सकता है, क्योंकि चाय से हमारा पुराना नाता रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि चाय जनजाति समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत आज पूरी दुनिया इस जश्न को देखी। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के गौरव को वर्षों से अनदेखी की गई, लेकिन भाजपा सरकार आने के बाद इस दिशा में कई कदम उठाए गए। उन्होंने कहा कि एक समय था जब असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों पर उचित ध्यान नहीं दिया जाता था और यहां तक कि इसकी संस्कृति को भी नजरअंदाज कर दिया जाता था,लेकिन अब समय बदल गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मोदी अब पूर्वोत्तर की संस्कृति के सबसे अच्छे ब्रांड एंबेसडर हैं। उन्होंने कहा कि चराईदेव मैेदाम को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया, जिसमें भाजपा ने प्रमुख भूमिका निभाई, असमिया भाषा को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया और आहोम जनरल लचित बरफुकन की 400वीं जयंती भी राष्ट्रीय स्तर पर भव्य तरीके से मनाई गई। मोदी ने कहा कि मैं काजीरंगा (असम में राष्ट्रीय उद्यान) में एक रात बिताने वाला पहला प्रधानमंत्री था और दुनिया को इसकी अनूठी विविधता के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि चाय जनजाति और आदिवासी समुदाय न केवल असम का गौरव है बल्कि वे भारत की विविधता को भी दर्शाते हैं। मोदी ने कहा कि आज विभिन्न देशों के 60 से अधिक राजदूत असम को महसूस कर रहे हैं। वे चाय का स्वाद अपने साथ ले जाएंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा जनजाति दिवस के माध्यम से आदिवासियों की विरासत का जश्न मनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जबकि बहादुर पुरुषों और महिलाओं और उनके योगदान को एक आदिवासी संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाएगा, जिसे स्थापित किया जा रहा है। पीएम ने कहा कि असम में भाजपा सरकार ने असम चाय निगम लिमिटेड के कर्मचारियों के लिए बोनस की घोषणा,गर्भवती महिलाओं को 15000 आर्थिक मदद, महिलाओं और बच्चों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं, चाय बागानों में मॉडल स्कूल, नौकरियों में आरक्षण और स्वरोजगार के लिए योजनाओं जैसी कई पहल की है। ये सभी उपाय असम में चाय उद्योग को बढ़ावा दे रही है। मोदी ने कहा कि झुमुर नृत्य करने वाले कलाकारों की इतनी बड़ी संख्या एक रिकॉर्ड बनाई। 2023 में असम की अपनी यात्रा को याद करते हुए जब 11,000 से अधिक कलाकारों ने बिहू नृत्य करते हुए एक रिकॉर्ड बनाया था, पीएम ने कहा कि यह उनके लिए एक अविस्मरणीय स्मृति है। असम के गौरव के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि असम में लाचित बरफुकन की 125 फीट की कांस्य प्रतिमा बनाई गई है। हमने आदिवासी समाज की विरासत का जश्न मनाने के लिए जनजातीय गौरव दिवस की भी शुरुआत की है। आदिवासी वीरों के योगदान को अमर बनाने के लिए देश भर में आदिवासी संग्रहालय स्थापित किए जा रहे हैं। चाय बागानों में 350 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर खोल रही है। मोदी ने कहा कि चाय जनजाति के बच्चों के लिए 100 से अधिक आदर्श चाय बागान स्कूल खोले गए हैं, तथा 100 अन्य स्कूलों की योजना बनाई गई है। उन्होंने चाय जनजाति के युवाओं के लिए ओबीसी कोटे में तीन प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान तथा असम सरकार द्वारा स्वरोजगार के लिए 25,000 रुपए की सहायता का भी उल्लेख किया।
चायवाला ही समझ सकता है चाय श्रमिकों को : मोदी
