पूर्वांचल प्रहरी कार्यालय संवाददाता गुवाहाटी :असम विधानसभा में बजट सत्र के दूसरे दिन का माहौल बेहद गरम था, जब सदन में सत्तापक्ष और विपक्षों के बीच तीव्र हंगामा हुआ जिसके कारण कार्यवाही तीन बार के लिए स्थगित करनी पड़ी। उल्लेखनीय है कि बुधवार को सत्तापक्ष और विपक्ष के नेताओं द्वारा किए गए हंगामे के कारण विधनासभा अध्यक्ष विश्वजीत दैमारी के बार-बार शांत रहने के बाद भी नहीं मानने पर सदन की कार्यवाही को तीन बार स्थगित करनी पड़ी, क्योंकि सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के सदस्य अन्य नियमित कामकाज को स्थगित करके विभिन्न मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग कर रहे थे। मालूम हो कि आज प्रश्रकाल जैसे ही खत्म हुआ विपक्ष की ओर से चार अलग-अलग स्थगन प्रस्ताव लाया गया, जबकि सत्तारूढ़ दल ने असम लोक सेवा आयोग (एपीएससी) से जुड़े नौकरी के बदले नकद घोटाले की हालिया रिपोर्ट पर चर्चा कराने की मांग की। गौरतलब है कि सदन में नेता प्रतिपक्ष देवब्रत सैकिया ने कांग्रेस की ओर से उमरांग्सू की कोयला खदान त्रासदी पर सदन स्थगन प्रस्ताव लाया गया, जबकि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) द्वारा कोयला  सिडिकेट और अन्य पर लाया गया, वहीं ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) द्वारा डिटेंशन कैंप में भारतीय नागरिकों को कथित तौर पर यातना देने पर और राइजर दल के एक मात्र विधायक अखिल गोगोई द्वारा असम लोक सेवा आयोग में पैसे लेकर नौकरी देने से जुड़े घोटाले को लेकर सदन में स्थगन प्रस्ताव पेश किए गए थे। उल्लेखनीय है कि जैसे ही प्रश्नकाल समाप्त हुआ दोनों पक्ष विस अध्यक्ष आसन के सामने आ गए और सदन में पेश अपने-अपने प्रस्ताव पर चर्चा कराने की मांगों पर जोर देने लगे। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले गठबंधन ने नारे लगाए और विधानसभा अध्यक्ष से एपीएससी घोटाले पर गठित एक सदस्यीय न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त)बिप्लव कुमार शर्मा आयोग की रिपोर्ट पर चर्चा की अनुमति देने की मांग की। इसके विपरीत पूरा विपक्ष मांग कर रहा था कि अध्यक्ष उनके चारों नोटिस स्वीकार करें। इस बीच एआईयूडीएफ ने डिटेंशन कैंप में रहने वाले लोगों के लिए न्याय की मांग करते हुए हाथ में तख्तियां दिखाई, जिन्हें कथित तौर पर विदेशी होने के नाम पर डिटेंशन कैंप में प्रताड़ित किया गया और हिरासत केंद्र में रखा गया। विधानसभा अध्यक्ष विश्वजीत दैमारी ने सभी मांगों को खारिज कर दिया और कहा कि आप अन्य तरीकों से विषयों को उठा सकते हैं। कृपया वापस जाएं और अपनी सीट से मुद्दे को उठाएं। उल्लेखनीय है कि बार-बार विस अध्यक्ष द्वारा समझाने के बाद भी दोनों पक्ष के विधायक उनकी बातें अनदेखी कर  दी।  किसी ने भी उनके अनुरोध को स्वीकार नहीं किया और सदन में नारेबाजी करने लगे। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन को 10 मिनट के लिए स्थगित कर दिया। जब सदन फिर से शुरू हुआ तो हंगामा जारी रहने से पहले जैसी स्थिति बनी रही। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने दूसरी बार 10 मिनट के लिए और तीसरी बार स्थिति हंगामेदार रहने के कारण फिर 20 मिनट के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।  इसके बाद जब विधानसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो मुख्यमंत्री हिमंत विश्वशर्मा ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सरकार सभी चार मुद्दों पर चर्चा कराने क को तैयार है। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्षी की सभी मांग पर गौर करते हुए चर्चा कराएगी, लेकिन अभी राज्यपाल के अभिभाषण पर चचा होने दिया जाए। इसके बाद दोनों पक्ष के सदस्य शांत हो गए और विधानसभा की कार्यवाही सुचारु रूप से आगे बढ़ी। सदन में इस पूरे घटनाक्रम नेता प्रतिपक्ष देवब्रत सैकिया ने सरकार के खिलाफ  कड़े आरोप लगाए और विभिन्न मुद्दों पर सरकार से जवाब की मांग की। सैकिया ने कहा कि राज्य में जिस प्रकार से अवैध कोयला खनन करने के दौरान जाने गई है उस पर चर्चा होनी चाहिए। वहीं सत्ता के विपक्ष ने इन आरोपों का तीखा जवाब दिया और विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया। सत्तापक्ष की ओर से संसदीय कार्यमंत्री पीयूष हजारिका का कहना है कि  विपक्ष केवल सत्र में बाधाएं डालने और हर मुद्दे पर राजनीति के उद्देश्य से हंगामा कर रहा है ताकि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं पर चर्चा नहीं हो। उन्होंने कहा कि विस में हंगामा होने पर विधानसभा की कार्यवाही पर असर पड़ता है। इस प्रकार का असहमति और गतिरोध राज्य की राजनीतिक स्थिति को भी प्रभावित कर सकता है, क्योंकि इससे विधायिका की कार्यप्रणाली पर प्रतिकूल असर पड़ता है। सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित होने के कारण राज्य के लोगों के बीच विपक्ष के प्रति असंतोष भी बढ़ रहा है।