लखनऊ : केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन की अगुवाई करने वाले किसान संगठनों के समूह संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के आह्वान पर सोमवार को यहां बंगला बाजार (पुरानी जेल रोड) स्थित इको गार्डन में आयोजित ‘किसान महापंचायत’ में देश के विभिन्न राज्यों के किसान पहुंचे। किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर कानून बनाने और लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा टेनी की बर्खास्तगी समेत अन्य प्रमुख मांगों को उठाया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से शुक्रवार को तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा से काफी पहले लखनऊ में इको गार्डन में किसान महापंचायत आयोजित करने की घोषणा संयुक्त किसान मोर्चा ने की थी। प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद भी किसानों ने अपनी महापंचायत आयोजित की और अपनी छह सूत्रीय मांगों पर जोर दिया। महापंचायत में पहुंचे भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने पीटीआई-भाषा से बातचीत में कहा कि तीन कानूनों को निरस्त करने की घोषणा के अलावा और भी कई मुद्दे हैं जिनका समाधान किये जाने की जरूरत है। ऐसा लगता है कि कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने की घोषणा के बाद सरकार किसानों से बात नहीं करना चाहती है। सरकार को यह स्पष्ट कर देना चाहिए कि उसने कानूनों को निरस्त कर दिया है और वह हमसे बात करना नहीं चाहती है ताकि हम गांवों में जाना शुरू कर सकें। उन्होंने कहा कि सिंघु बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन के बाद सरकार के साथ 12 दौर की बातचीत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अब तक हमारे 750 किसान आंदोलन में शहीद हो गये हैं। टिकैत ने बातचीत में मोर्चा की छह सूत्रीय मांगों को दोहराया। उत्तराखंड से एसकेएम नेता गुरप्रीत सुकिया ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और उत्तराखंड के किसान लखनऊ में किसान महापंचायत में हिस्सा लेने आए हैं।अखिल भारतीय महिला जनवादी समिति (एडवा) की प्रदेश अध्यक्ष मधु गर्ग ने कहा कि हमारी रोटी और थाली सीधे किसानों और उनके कल्याण से जुड़ी हुई हैं। हमें खुशी है कि कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा की गई है।
किसान महापंचायत में देशभर से आए किसान