पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान,गुवाहाटी (आईआईटी, गुवाहाटी) और बोस इंस्टीट्यूट कोलकाता के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में एक बहु-संस्थागत शोध में स्थानीय कैंसर उपचार के लिए एक उन्नत इंजेक्टेबल हाइड्रोजेल विकसित किया गया है। यह अभिनव हाइड्रोजेल-आधारित थेरेपी ट्यूमर साइटों पर सीधे कैंसर विरोधी  दवाओं को पहुंचाती है, जिससे पारंपरिक कैंसर उपचारों से जुड़े दुष्प्रभावों में काफी कमी आती है। गौरतलब है कि कैंसर एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है, जिससे दुनिया भर में लाखों मरीज प्रभावित हैं। कीमोथेरेपी और सर्जिकल हस्तक्षेप जैसे मौजूदा उपचारों में अक्सर गंभीर सीमाएं होती हैं। ट्यूमर को सर्जिकल तरीके से हटाना कभी-कभी संभव नहीं होता,जबकि कीमोथेरेपी की प्रणालीगत डिलीवरी अक्सर कैंसरग्रस्त और स्वस्थ दोनों कोशिकाओं को प्रभावित करके हानिकारक दुष्प्रभावों का कारण बनती है। आईआईटी गुवाहाटी के रसायन विज्ञान विभाग के प्रोफेसर देवप्रतीम दास और उनकी टीम ने एक हाइड्रोजेल डिजाइन करके इन चुनौतियों का समाधान किया है जो ट्यूमर स्थल पर दवाओं को सटीक रूप से पहुंचाता है, जिससे स्थानीयकृत क्रिया सुनिश्चित होती है। यह नव विकसित हाइड्रोजेल कैंसर रोधी दवाओं के लिए एक स्थिर भंडार के रूप में कार्य करता है और ट्यूमर माइक्रोएनवायरनमेंट में विशिष्ट स्थितियों पर प्रतिक्रिया करते हुए उन्हें नियंत्रित तरीके से जारी करता है। इस सफलता के बारे में आईआईटी गुवाहाटी के रसायन विज्ञान विभाग के प्रो. देवप्रतीम दास ने कहा कि कैंसर के उपचार के लिए वैज्ञानिक नवाचार महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। हाइड्रोजेल के अनूठे गुण इसे जैविक वातावरण के साथ सामंजस्य और सटीकता में काम करने की अनुमति देते हैं, जहां इसकी सबसे अधिक आवश्यकता होती है। स्तन कैंसर के म्यूरिन मॉडल पर प्रीक्लिनिकल परीक्षणों में हाइड्रोजेल ने उल्लेखनीय प्रभावकारिता दिखाई। कीमोथेरेपी दवा डॉक्सोरूबिसिन से भरे हाइड्रोजेल के एक ही इंजेक्शन से 18 दिनों के भीतर ट्यूमर के आकार में 75 प्रतिशत की कमी आई।