भारतीय संस्कृति के सनातन धर्म में पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीगणेशजी की महिमा अपरम्पार है। गौरीपुत्र श्रीगणेशजी की आराधना से सुख-समृद्धि, खुशहाली मिलती है, साथ ही जीवन के समस्त संकटों का निवारण भी होता है। हिन्दू धर्मशास्त्रों में प्रथम पूज्य देव भगवान श्रीगणेशजी को सर्वोपरि माना जाता है। हर शुभकार्यों के प्रारंभ में श्री गणेशजी की पूजा-अर्चना सर्वप्रथम करने का विधान है। सुख-समृद्धि के लिए संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी का व्रत रखने की धाॢमक मान्यता है। यह व्रत महिला एवं पुरुष के लिए समान रूप से फलदाई है। ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि इस बार पौष कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि बुधवार, 18 दिसंबर को प्रात: 10 बजकर 07 मिनट पर लगेगी जो कि अगले दिन गुरुवार, 19 दिसंबर को दिन में 10 बजकर 04 मिनट तक रहेगी। पुष्य नक्षत्र मंगलवार, 17 दिसंबर को अद्र्धरात्रि 12 बजकर 44 मिनट से बुधवार, 18 दिसंबर अद्र्धरात्रि के पश्चात 12 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। पुष्य नक्षत्र में श्रीगणेशजी की पूजा-अर्चना विशेष फलदाई रहती है। चंद्रोदय रात्रि 08 बजकर 15 मिनट पर होगा। फलस्वरूप संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत बुधवार, 18 दिसंबर को रखा जाएगा। बुधवार के दिन संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी पडऩे से यह व्रत और भी शुभ फलदाई हो गया है। रात्रि में चंद्र उदय होने के पश्चात् चंद्रमा को अघ्र्य देकर उनकी पूजा-अर्चना की जाएगी। ऐसे करें श्रीगणेशजी को प्रसन्न : विमल जैन के अनुसार संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत के दिन प्रात:काल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर समस्त दैनिक कार्यों से निवृत्त हो, स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। तत्पश्चात् अपने आराध्य देवी-देवता की पूजा-अर्चना करने के बाद अपने दाहिने हाथ में जल, पुष्प, फल, गंध व कुश लेकर संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी के व्रत का संकल्प लेना चाहिए। संपूर्ण दिन निराहार रहते हुए व्रत के दिन सायंकाल पुन: स्नान करके श्रीगणेश जी की पंचोपचार, दशोपचार अथवा षोडशोपचार से पूजा-अर्चना करनी चाहिए। श्रीगणेशजी को मोदक एवं दूर्वा अति प्रिय है, दूर्वा की माला, ऋतुफल, मेवे एवं मोदक अवश्य अॢपत करने चाहिए।
किस पाठ से होती है मनोरथ की पूॢत : ज्योतिषविद् के मुताबिक श्रीगणेशजी की महिमा में श्रीगणेश स्तुति, श्रीगणेश संकटनाशन स्तोत्र, श्रीगणेश अथर्वशीर्ष, श्रीगणेश स्तोत्र, श्रीगणेश सहस्रनाम, श्रीगणेश चालीसा एवं श्रीगणेश जी से संबंधित मंत्र-स्तोत्र आदि का पाठ जो भी संभव हो, अवश्य किया जाना चाहिए। ऐसी धाॢमक व पौराणिक मान्यता है कि श्रीगणेश अथर्वशीर्ष का प्रात:काल पाठ करने से रात्रि के समस्त पापों का नाश होता है। संध्या समय पाठ करने पर दिन के सभी पापों का शमन होता है, यदि विधि-विधानपूर्वक एक हजार पाठ किए जाएं तो मनोरथ की पूॢत होती है और धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति भी होती है।