नई दिल्ली : रेलवे संशोधन विधेयक 2024 बुधवार को लोकसभा में पारित हो गया। विधेयक को बहस के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इसे लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि संशोधन विधेयक से रेलवे का निजीकरण नहीं होगा। विपक्ष केवल झूठ फैला रहा है। संविधान को लेकर विपक्ष की फर्जी कहानी पहले ही बेनकाब हो गई है। अब उनका यह झूठ भी विफल हो जाएगा। उन्होंने लोकसभा में 'रेल (संशोधन)  विधेयक, 2024 पर चर्चा का जवाब देते हुए यह भी कहा कि भारतीय रेल का पूरा ध्यान गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर है, वहीं युवाओं को रेलवे में अवसर देने के उद्देश्य से इस समय 58,642 रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। विधेयक पर गत चार दिसंबर को सदन में चर्चा में भाग लेते हुए कई विपक्षी दलों के सदस्यों ने सरकार पर रेलवे के निजीकरण की दिशा में बढऩे का आरोप लगाया था। चर्चा में 72 सांसदों ने भाग लिया था। पिछले कई दिन से विभिन्न मुद्दों पर सदन में गतिरोध के कारण रेल मंत्री का जवाब नहीं हो सका था। बुधवार को रेल मंत्री वैष्णव के जवाब के बाद सदन ने ध्वनिमत से 'रेल (संशोधन) विधेयक, 2024Ó को पारित कर दिया। वैष्णव ने चर्चा के जवाब में कहा कि कई सदस्यों ने निजीकरण होने का विमर्श बनाने की कोशिश की। कृपया फर्जी विमर्श बनाने की कोशिश मत करिए। आपका संविधान वाला फर्जी विमर्श विफल हो चुका है। अब कोई फर्जी विमर्श नहीं गढ़ें।  उनका कहना था कि कहीं निजीकरण का कोई प्रश्न नहीं है। मैं हाथ जोड़कर निवेदन करता हूं कि कृपया इस फर्जी विमर्श को आगे नहीं बढ़ाएं। रक्षा और रेलवे दो ऐसे विषय हैं, जिन्हें राजनीति से दूर रखकर इन्हें आगे बढ़ाने की जरूरत है। रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे का पूरा ध्यान गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर है। रेलगाडिय़ों में गैर-एसी डिब्बे दो तिहाई होते हैं और एसी डिब्बे एक तिहाई हैं...करीब 12,000 नए सामान्य कोच बनाए जा रहे हैं। हमारा प्रयास है कि हर ट्रेन में जनरल डिब्बे ज्यादा हों। उनके अनुसार, रेलवे सुरक्षा पर पूरा जोर दिया गया है और व्यापक पैमाने पर काम हुआ है। मंत्री ने कहा कि 1.23 लाख किलोमीटर लंबी पुरानी पटरियों को बदला गया है तथा नई प्रौद्योगिकी का सहारा भी लिया गया है।  वैष्णव ने कहा कि हम हर घटना की जड़ में जाते हैं और प्रक्रिया, तकनीक समेत जहां भी बदलाव जरूरी हो, वह करके रेलगाडय़िों के पटरी से उतरने तथा ट्रेन हादसों की संख्या को कम करेंगे और सुरक्षा बढ़ाएंगे। इसके लिए मोदी सरकार प्रतिबद्ध है। वैष्णव ने कहा कि बहुत स्पष्ट तौर पर बताना चाहता हूं कि कानूनी ढांचे में सरलीकरण के लिए यह विधेयक लाया गया है। रेलवे बोर्ड का कानून 1905 में बना था। 1905 और 1989 के रेलवे संबंधी कानूनों की जगह एक ही कानून होता है तो आसानी होती है। रेलवे अधिनियम 1989 में भारतीय रेलवे बोर्ड अधिनियम 1905 को एकीकृत करने के लिए यह विधेयक लाया गया है। रेल मंत्री ने कुछ सदस्यों की आपत्ति के संदर्भ में कहा कि संसद की भूमिका पहले जैसे ही रहेगी और इस भूमिका में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में रेलवे में व्यापक बदलाव हुआ है। वैष्णव के अनुसार, सभी अधिकृत रेलवे क्रॉसिंग पर व्यक्तियों की तैनाती है या फिर वहां फ्लाईओवर बना दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में 2,000 फ्लाईओवर और अंडरपास बनाए गए हैं जो संप्रग सरकार की तुलना में तीन गुना हैं।  रेल मंत्री ने कहा कि गत 10 वर्षों में रेलगाडय़िों में 3.10 लाख नए शौचालय बनाए गए हैं। उन्होंने 'वंदे भारत ट्रेन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह रेलगाड़ी 'आत्मनिर्भर भारत की पहचान बन गई है तथा यह विश्व की कई रेलगाडिय़ों की तुलना में कई पैमानों पर बेहतर है। वैष्णव ने कहा कि 60 वर्षों में विद्युतीकरण 21 हजार किलोमीटर में हुआ था, लेकिन 10 वर्षों में यह 44 हजार किलोमीटर में हुआ है। उनका कहना थ कि 140 करोड़ लोगों का देश है। यहां रेलवे की क्षमता को व्यापक रूप से बढ़ाने की जरूरत है। मंत्री के अनुसार, इस सरकार से पहले रेलवे का बजट 25-30 हजार करोड़ रुपए का होता था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में उसे बढ़ाकर 2.52 लाख करोड़ रुपए किया गया है। उनका कहना था कि इन 10 वर्षों में 31 हजार किलोमीटर नई पटरियां बिछाई गई हैं। वैष्णव ने कहा कि 15 हजार किलोमीटर रेलवे पटरियों पर रेल सुरक्षा प्रणाली 'कवच' का काम हुआ है। वैष्णव का कहना था कि जो काम समृद्ध देशों में 20 साल में हुआ है, वह भारत में पांच साल में हुआ है।