पृथ्वी के एक नजदीकी एस्टेरॉयड से मिली चट्टान पर सूक्ष्मजीवों की मौजूदगी का पता चला है। वैज्ञानिकों ने पाया कि इसकी सतह पर मौजूद बैक्टीरिया लगभग निश्चित रूप से पृथ्वी से आए हैं। यह सैंपल 5.4 ग्राम वजनी चट्टान का हिस्सा है जिसे जापान का हायाबुसा 2 स्पेसक्राफ्ट 2020 में रयुगु नामक एस्टेरॉयड की सतह से उठाकर धरती पर ले आया था। अंतरिक्ष यान के धरती पर उतरने के बाद, रिसर्चर्स ने चट्टान को एक क्लीन रूम के भीतर बने वैक्यूम रूम में खोला ताकि संक्रमण न हो। इसके बाद उसे प्रेशराइज्ड नाइट्रोजन से भरे कमरे में रख दिया गया। फिर सैंपल्स को नाइट्रोजन से भरे कैनिस्टर्स में रखकर एनालिसिस के लिए पूरी दुनिया में भेजा गया। लेकिन बीच रास्ते में, इस चट्टान का एक सैंपल शायद धरती के वातावरण के संपर्क में आ गया।

धरती से मिलते-जुलते माइक्रोब्स मिले : वैज्ञानिकों ने नई स्टडी में बताया है कि लंदन (यूके) के इंपीरियल कॉलेज को भेजा गया सैंपल रेजिन में एम्बेड किया गया था। वैज्ञानिकों को इसमें तंतुमय सूक्ष्मजीव मिले, जो स्थलीय प्रोकैरियोटिक बैक्टीरिया से काफी मिलते-जुलते थे। उन्होंने अपने निष्कर्ष 13 नवंबर को मेटियोरिक्स एंड प्लैनेटरी साइंस जर्नल में प्रकाशित किए। रिसर्चर्स ने लिखा, उल्कापिंडों में सूक्ष्मजीवों की मौजूदगी को बाह्यग्रहीय जीवन के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल किया गया है। हालांकि, लोकल कंटामिनेशन की संभावना उनकी व्याख्या को बहुत ज्यादा विवादास्पद बना देती है। खोज इस बात पर जोर देती है कि कंटामिनेशन कंट्रोल से जुड़ी सावधानियों के बावजूद स्थलीय जीव तेजी से बाह्यग्रहीय नमूनों पर खुद को आबाद कर सकते हैं।

एस्टेरॉयड के नमूने का एनालिसिस कर दंग रह गए वैज्ञानिक : वैज्ञानिक लंबे समय से बहस करते आए हैं कि धरती पर जीवन के ब्लूप्रिंट यहीं से आए या कहीं और से। पृथ्वी पर पाए गए उल्कापिंडों के पिछले एनालिसिस से पता चला है कि इनमें से कुछ अंतरिक्ष चट्टानों में जीवन के लिए जरूरी पांच न्यूक्लियोबेस मौजूद हैं। लेकिन ये कंपाउंड चट्टानों पर अंतरिक्ष से आए थे या पृथ्वी पर आने के बाद उल्कापिंडों को दूषित कर दिया था, यह सवाल लंबे समय से बना हुआ है। जापान से जो नमूना यूके भेजा गया था, रिसर्चर्स ने एक्स-रे की मदद से उस चट्टान को स्कैन किया और इसकी सतह पर बैक्टीरिया के कोई संकेत नहीं पाए। फिर, तीन सप्ताह के बाद, उन्होंने नमूने को एक राल में डाल दिया, और एक स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप (स्श्वरू) का इस्तेमाल करते हुए एक सप्ताह के बाद इसका और बारीकी से अध्ययन किया। रिसर्चर्स को निराशा हाथ लगी क्योंकि बैक्टीरिया की वृद्धि दर, आकार और अचानक प्रकट होना, सभी पृथ्वी पर पाए जाने वाले सूक्ष्म जीवों से काफी मेल खाते थे। इससे पता चलता है कि नमूना रेजिन के अंदर रखे जाने के कुछ समय बाद ही कंटामिनेट हो गया था।