भारतीय संस्कृति के सनातन धर्म में हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार प्रत्येक माह के तिथि-पर्व कीविशेष महिमा है। ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि अमावस्या तिथि के दिन कुल देवी-देवता एवं शिवपूजा भी कल्याणकारी होती है। विमल जैन ने बताया कि कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि गुरुवार, 31 अक्तूबर को दिन में 3 बजकर 54 मिनट पर लगेगी जो कि अगले दिन शुक्रवार, 01 नवंबर को सायं 6 बजकर 17 मिनट तक रहेगी। स्वाती नक्षत्र गुरुवार, 31 अक्तूबर को अर्द्धरात्रि 12 बजकर 45 मिनट से शुक्रवार, 01 नवंबर को अर्द्धरात्रि के पश्चात् 3 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। प्रीतियोग गुरुवार, 31 अक्तूबर को प्रातः 9 बजकर 51 मिनट से शुक्रवार, 01 नवंबर को प्रातः 10 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। अमावस्या तिथि पर स्नान-दान-व्रत एवं श्राद्ध करने का विशेष महत्व है। ऐसे करें पूजा-अर्चना : ज्योतिषविद् ने बताया कि व्रतकर्ता को प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर अपने समस्त दैनिक कृत्यों से निवृत्त हो स्वच्छ व धारण करना चाहिए। अपने इष्ट देवी-देवताओं की पूजा अर्चना के पश्चात् अपने दाहिने हाथ में जल, पुष्प, फल, गंध व कुश लेकर अमावस्या तिथि के पूजन का संकल्प लेना चाहिए। सोमवती अमावस्या पर भगवान् श्रीविष्णुजी एवं पीपल वृक्ष की पूजा-अर्चना से सुख-समृद्धि, खुशहाली मिलती है। अमावस्या तिथि पर विधि-विधान पूर्वक पितरों की भी पूजा-अर्चना की जाती है। पितरों के आशीर्वाद से जीवन में भौतिक सुख-समृद्धि, खुशहाली का आगमन होता है। इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा-अर्चना के पश्चात् पीपल वृक्ष की परिक्रमा करने पर आरोग्य व सौभाग्य की प्राप्ति का सुयोग बनता है।
पीपल वृक्ष की विशेष महिमा धार्मिक मान्यता के अनुसार पीपल वृक्ष में समस्त देवताओं का वास माना गया है। पीपल के वृक्ष को जल से सिंचन करके विधि-विधान पूर्वक पूजा के पश्चात् 108 बार परिक्रमा करने पर सौभाग्य में वृद्धि होती है। इस दिन व्रत उपवास रखकर इष्ट-देवी देवता एवं आराध्य देवी देवता की पूजा अर्चना करनी चाहिए। ब्राह्मण को घर पर निमंत्रित करके उन्हें भोजन करवाकर सफेद रंग की वस्तुओं का दान जैसे—चावल, दूध, मिश्री, चीनी, खोवे से बने सफेद मिष्ठान्न, सफेद वस्त्र, चांदी एवं अन्य सफेद रंग की वस्तुएं दक्षिणा के साथ देकर, उनका चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेना चाहिए।