असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्वशर्मा ने मंगलवार को बड़ा ऐलान किया। उन्होंने राज्य के करीमगंज जिले का नाम बदलकर श्रीभूमि रखने का फैसला किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी घोषणा करते हुए उन्होंने लिखा, लम्बे समय से हमारे लोगों की यह मांग थी जिसे असम कैबिनेट ने पूरा कर दिया है। असम के इतिहास में करीमगंज का भी रोल अहम रहा है। वो करीमगंज जिसका नाम मोहम्मद करीम चौधरी के नाम पर पड़ा।

क्या है मोहम्मद करीम चौधरी की कहानी? : करीमगंज जिला (अब श्रीभूमि) दक्षिणी असम में स्थित है और इसकी सीमा त्रिपुरा के साथ-साथ बांग्लादेश से भी लगती है। यह बराक घाटी क्षेत्र बनाने वाले तीन जिलों में से एक है और भारत के विभाजन से पहले सिलहट जिले का हिस्सा हुआ करता था। बंगाली लेखक और इतिहासकार अच्युत चरण चौधरी के मुताबिक, करीमगंज का नाम एक बंगाली मुस्लिम जमींदार के नाम पर पड़ा था, जो अपने दौर में खास रुतबा रखते थे। वो थे मुहम्मद करीम चौधरी। करीम चौधरी ने एक बाजार की नींव रखी थी, जिसे करीमगंज कहा गया। उस बाजार के नाम पर पूरे जिले का नाम करीमगंज पड़ गया। मुख्यमंत्री हिमंत विश्वशर्मा के मुताबिक, करीमगंज जिले का नाम रवींद्रनाथ टैगोर के सम्मान में बदलकर ‘श्रीभूमि’ रखा जाएगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, 100 साल से भी पहले, कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर ने असम के आधुनिक करीमगंज जिले को ‘श्रीभूमि’- मां लक्ष्मी की भूमि बताया था। अब करीमगंज को श्रीभूमि के नाम से जाना जाएगा। अब कैबिनेट ने स्थानीय लोगों की मांग को मान लिया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट में गांवों, कस्बों और जिलों का नाम बदलकर आधुनिक असमिया नाम की रखने की योजना का भी हवाला दिया गया है। कहा गया है कि मुख्यमंत्री ने गुवाहाटी में काला पहाड़ का नाम बदलकर नीलाचल नगर करने का भी हवाला दिया।

क्यों बदला गया नाम? : स्थानीय मीडिया रिपोर्ट में मुख्यमंत्री के हवाले से लिखा गया है कि हम धीरे-धीरे उन स्थानों के नाम बदल रहे हैं जिनमें ऐतिहासिक उल्लेख या शब्दकोश अर्थ का अभाव है। कालापहाड़ का कोई ऐतिहासिक महत्व नहीं है। इसका कोई अर्थ नहीं है। ‘कालापहाड़’ शब्द न तो असमिया या बंगाली शब्दकोशों में आता है, न ही ‘करीमगंज’ में। स्थानों के नाम आम तौर पर भाषाई अर्थ में निहित होते हैं, और ऐसे कई नाम पहले ही संशोधित किए जा चुके हैं, जिनमें बारपेटा के भासोनी चौक जैसे कई गांव भी शामिल हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में असम के मुख्यमंत्री के बयानों का हवाला देते हुए लिखा गया है कि विभिन्न गांवों, कस्बों और जिलों का नाम बदलकर आधुनिक असमिया नाम रखा जा रहा है, जिसमें कोई सांप्रदायिक कनेक्शन नहीं है। रिपोर्ट में गुवाहाटी में काला पहाड़ का नाम बदलकर नीलाचल नगर करने का भी हवाला दिया गया है। असम के मुख्यमंत्री यह कदम काफी चर्चा में है, जिसको लेकर सोशल मीडिया यूजर बंट गए हैं। सोशल मीडिया यूजर्स का एक वर्ग इसे अच्छा कदम बता रहा है, वहीं दूसरा वर्ग इसकी आलोचना कर रहा है।