पिछले कुछ महीनों से चल रही शांति के बाद मणिपुर फिर से अशांत हो गया है। कुछ दिन ही पहले कुकी उग्रवादियों द्वारा जिरीबाम जिले में स्थित मैतेई गांव पर हमला किया गया। उग्रवादियों ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल तथा पुलिस थानों को भी नहीं छोड़ा। सुरक्षा बलों द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में 11 कुकी उग्रवादी मारे गए। विरोध में उग्रवादियों ने मैतेई समुदाय के कई घरों में आग लगा दिया गया। दो लोग जिंदा जल गए, जबकि कुकी उग्रवादियों ने तीन महिलाओं को उनके तीन बच्चों के साथ अपहरण कर लिया। इसके विरोध में मैतेई पक्ष की तरफ से भी मंगलवार की शाम से इंफाल बंद का बंद का आह्वान किया गया था। पिछले वर्ष मई माह से मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदाय के बीच शुरू हुआ जातीय संघर्ष खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। लगभग डेढ़ वर्षों चल रहे हिंसात्मक टकराव में 200 से ज्यादा लोंगों जानें जा चुकी हैं, जबकि हजारों लोग बेघर हुए हैं। मणिपुर में मैतेई समुदाय की आबादी 53 प्रतिशत है जो मैदानी इलाके के कुल क्षेत्रफल के 10 प्रतिशत भूभाग पर निवास करते हैं। कुकी और नगा जनजाति के लोग मुख्य रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में रहते हैं, जो इलाका मणिपुर की आबादी का 90 प्रतिशत है। हालांकि कुकी और नगा लोगों की आबादी 40 प्रतिशत है। मैतेई और कुकी दोनों समुदाय एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाते रहे हैं। मणिपुर की वर्तमान हिंसा ने यह साबित कर दिया है कि वहां कानून का शासन नहीं रह गया है। केंद्र सरकार तथा गृह मंत्रालय की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। फिर बेकाबू होती स्थिति को देखकर गृह मंत्रालय ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस की 20 कंपनियों को तत्काल रवाना कर दिया है। केंद्र सरकार ने मणिपुर के पांच जिलों के छह थाना क्षेत्रों में फिर से अफस्पा लागू कर दिया है। इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, जिरीबाम, कांग्कोकपी तथा विष्णुपुर जिले में स्थिति बिगड़ी हुई है। केंद्र सरकार ने पिछले अक्तूबर में मणिपुर के जिन 19 थाना क्षेत्रों से अफस्पा हटाया था, उसमें उपरोक्त छह थाना क्षेत्र भी शामिल थे। कुकी लोगों का आरोप है कि मैतेई समुदाय के कारण उनकी पहचान, संस्कृृति तथा जमीनी अधिकार को खतरा है। दूसरी तरफ मैतेई समुदाय का मानना है कि अनुसूचित जनजाति श्रेणी के तहत मिले संवैधानिक सुरक्षा के अधिकार के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में जमीन खरीद नहीं सकते। अब केंद्र सरकार को इस मामले में टाल-मटोल नीति का त्याग कर समस्या के समाधान के लिए आगे आना चाहिए। म्यामां से सटे होने के कारण मणिपुर संवेदनशील राज्यों की सूची में आता है। अगर केंद्र की तरफ से गंभीर प्रयास नहीं हुए तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है।