पूर्वांचल प्रहरी कार्यालय संवाददाता तिनसुकिया/डिबू्रगढ़ : अखिल असम मोरान छात्र संस्था एवं मटक युवा छात्र सम्मेलन द्वारा छह जनगोष्ठियों को जनजातिकरण का दर्जा देने की मांग को लेकर आज तिनसुकिया एवं डिबू्रगढ़ जिले में सुबह पांच बजे से 12 घंटे का बंद आहूत किया गया था। जिसका दोनों जिलों में असर देखा गया। तिनसुकिया से मिली जानकारी के अनुसार इस दौरान बंद समर्थकों द्वारा तिनसुकिया बाइपास और तिनसुकिया जिला आयुक्त कार्यालय के समक्ष आज सुबह टायर जलाकर प्रतिवाद किया। हालांकि पुलिस प्रशासन द्वारा इसमें बाधा भी दी गई, जिसे लेकर बंद समर्थकों और पुलिस के बीच नोक झोंक भी हुई। बंद कर दौरान पूरे जिले में सभी दुकान प्रतिष्ठान के साथ वित्तीय प्रतिष्ठान जैसे बैंक, बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा आदि सभी कार्यालय बंद देखे गए। हालांकि स्कूलों और कॉलेजों को खुला रखने की बंद समर्थकों द्वारा रिहाई दी गई। क्योंकि कई विद्यालयों और कॉलेजो में परीक्षा चल रही है। बंद के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना की कोई खबर नहीं मिली है। वहीं दूसरी ओर तिनसुकिया जिले के जिला मजिस्ट्रेट एवं जिला आयुक्त स्वप्निल पाल ने नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और व्यवधानों को रोकने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत किसी भी तरह के बंद पे प्रतिबंध लागू किया था। जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी एक आदेश के अनुसार जिले में अनधिकृृत हड़तालें, सड़क अवरोध, मूर्ति जलाना और अन्य गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि इस आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। लेकिन इस आदेश का कोई असर पड़ते नहीं देखा गया। लोगों ने खुद ही अपने-अपने दुकान-प्रतिष्ठान बंद कर रखे थे। डिब्रूगढ़ से मिली जानकारी के अनुसार ऑल मोरन स्टूडेंट्स यूनियन (एएमएसयू) और ऑल असम मटक युवा छात्र संघ (एएएमवाईसीएस) द्वारा सोमवार को आहूत 12 घंटे के सुबह से शाम तक बंद से सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा। असम में मोरान और मटक समुदायों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने में हो रही देरी के विरोध में आहूत बंद को दोनों जिलों के लोगों का व्यापक समर्थन मिला। डिब्रूगढ़ जिला आयुक्त बिक्रम कैरी द्वारा बंद और प्रदर्शनों के खिलाफ निषेधाज्ञा जारी किए जाने के बावजूद भी डिब्रूगढ़ की सड़कों पर बंद समर्थक बंद को लागू करने के लिए बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे। दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे और सड़कों पर वाहन नहीं चले। बंद के समर्थक विभिन्न बाजारों में गए और जबरन दुकानें बंद कराई और अपने समुदायों के लिए एसटी का दर्जा दिए जाने की मांग करते हुए नारे लगाए। बंद के दौरान डिब्रूगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्ग-37 पर कई स्थानों पर टायर जलाए गए, जिससे यातायात बाधित हुआ। पुलिस सुरक्षा के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने डिब्रूगढ़ में बाइपास पर एक वाहन में तोड़फोड़ की। शाम के बाद बाजार खुले पर बाजार में सन्नाटा पसरा रहा। ऑल मोरन स्टूडेंट्स यूनियन के महासचिव जॉयकांत मोरन ने बंद की सफलता पर संतोष व्यक्त किया और लोगों को उनके भारी समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि मोरन और मटक समुदायों के लिए एसटी दर्जे की लंबे समय से चली आ रही मांग की ओर केंद्र और राज्य सरकारों का ध्यान आकर्षित करने के लिए बंद एक अंतिम उपाय था। मटक ने इस बात पर प्रकाश डाला कि 2014 के लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा असम के छह स्वदेशी समुदायों को एसटी मान्यता देने का वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने इस मुद्दे पर निष्कि्रयता के लिए केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल ओराम की आलोचना की और सरकार से उनके समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया।
एसटी की मांग को लेकर बंद से डिब्रूगढ़-तिनसुकिया में जनजीवन प्रभावित