भारतीय सनातन परंपरा के हिंदू धर्मशास्त्रों में सभी तिथियों का किसी न किसी देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना से संबंध है। तिथि विशेष के अनुसार पूजा-अर्चना करने पर मनोरथ की पूर्ति बताई गई है। इसी क्रम में कार्तिक माह की एकादशी तिथि की विशेष महत्ता है। कार्तिक मास का यह प्रमुख पर्व है। कार्तिक शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि को देव प्रबोधिनी, हरिप्रबोधिनी, डिठवन या देवउठनी (देवोत्थान) एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। कार्तिक शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि से कार्तिक पूर्णिमा तक शुद्ध देशी घी के दीपक जलाने से जीवन के सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। भगवान श्रीविष्णु आषाढ़ शुक्ल एकादशी के दिन क्षीरसागर में योगनिद्रा हेतु प्रस्थान करते हैं। कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन भगवान् श्रीविष्णु के योगनिद्रा से जागृत होने के पश्चात् समस्त मांगलिक शुभ कार्य शुभ मुहूर्त में प्रारंभ हो जाएंगे। इस बार यह पर्व 12 नवंबर, मंगलवार को मनाया जाएगा। स्मार्त व वैष्णवजन व्रत रखकर भगवान श्रीविष्णुजी की आराधना करके उनसे आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। हरिशयनी एकादशी (16 जुलाई, बुधवार) से प्रारंभ चातुर्मास्य का व्रत, यम, नियम, संयम आदि का समापन आज देव (हरि) प्रबोधिनी एकादशी (12 नवंबर, मंगलवार) को हो जाएगा। ज्योतिषविद् ने बताया कि कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 11 नवंबर, सोमवार को सायं 6 बजकर 47 मिनट पर लगेगी जो कि अगले दिन 12 नवंबर, मंगलवार को सायं 4 बजकर 06 मिनट तक रहेगी। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र 12 नवंबर, मंगलवार को प्रातः 7 बजकर 53 मिनट से उसी दिन अर्द्धरात्रि के पश्चात् 5 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। हरिप्रबोधिनी एकादशी का व्रत उदयातिथि के अनुसार 12 नवंबर, मंगलवार को रखा जाएगा। आज के दिन व्रत-उपवास रखकर भगवान् श्रीविष्णु जी की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। व्रतकर्ता को प्रातःकाल समस्त दैनिक कृत्यों से निवृत्त हो स्वच्छ वस्त्र धारणकर अपने आराध्य देवी-देवता की पूजा-अर्चना के पश्चात् देव प्रबोधिनी एकादशी के व्रत एवं भगवान श्रीविष्णुजी की पूजा-अर्चना का संकल्प लेना चाहिए। तत्पश्चात् उनकी महिमा में श्रीविष्णु सहस्रनाम, श्रीपुरुषसूक्त तथा श्रीविष्णुजी से सम्बन्धित मन्त्र ‘ॐ श्रीविष्णवे नमः’ का जप करना चाहिए। पूजा का विधान : उन्होंने बताया कि आज के दिन गन्ने का मंडप बनाकर शालिग्राम जी के साथ तुलसीजी का विवाह रचाया जाता है।
देव प्रबोधिनी एकादशी : भगवान श्रीहरि विष्णु योगनिद्रा से होंगे जागृत
