पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : असम में बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए केंद्र सरकार राज्य के 271 जलाशयों में ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियों का मार्ग बदलेगी। गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की थी कि वे असम में बाढ़ की समस्या को हल करने के लिए ब्रह्मपुत्र के पानी की निकासी के लिए विशाल तालाब खोदेंगे। अब मोदी सरकार नए तालाब खोदने के बजाय राज्य के जलाशयों को मानसून जल भंडार में बदलने पर विचार कर रही है। गुवाहाटी में दो दिवसीय दौरे पर आए केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने असम सरकार को बाढ़ नियंत्रण के लिए राज्य के 271 जलाशयों का उपयोग करने की सलाह दी है। केंद्रीय गृह सचिव ने बुधवार को गुवाहाटी में असम सरकार के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में जलाशयों को पुनर्जीवित करके मानसून बाढ़ की रोकथाम को व्यवहार्यता के रूप में विकसित करने के लिए सर्वेक्षण कर योजना के क्रियान्वयन करने का निर्देश दिया। बैठक में असम सरकार के मुख्य सचिव रवि कोटा ने भाग लिया और उत्तर पूर्वी अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र द्वारा पहचाने गए जलाशयों की व्यवहार्यता पर चर्चा की। बैठक में असम सरकार के जल संसाधन विभाग को उत्तर पूर्वी अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र द्वारा पहचाने गए 271 जलाशयों की व्यवहार्यता का आकलन करने और एक रिपोर्ट तैयार करने का भी निर्देश दिया गया। केंद्रीय गृह सचिव के साथ हुई बैठक में जलाशयों में जल संरक्षण के संबंध में राज्य के मुख्य सचिव रवि कोटा ने केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन को यह भी बताया कि यह महत्वाकांक्षी परियोजना अगर ब्रह्मपुत्र के जल स्तर को नियंत्रित नहीं कर पाती तो कम से कम सहायक नदियों को नियंत्रित करने में कामयाब हो सकती है। मुख्य सचिव रवि कोटा ने मीडिया को बताया कि इस प्रोजेक्ट से ब्रह्मपुत्र को नियंत्रित करना संभव नहीं होगा, लेकिन हम राज्य के विभिन्न गांवों और कस्बों से बहने वाली सहायक नदियों के जल स्तर को नियंत्रित करने का प्रयास करेंगे। उस प्रयोजन के लिए बड़े जलाशयों को कई महत्वपूर्ण सहायक नदियों से जोड़ने की व्यवहार्यता का अध्ययन किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि बैठक में केंद्रीय गृह सचिव ने इस परियोजना में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) को शामिल करते हुए केंद्रीय एजेंसी की देखरेख में एक सर्वेक्षण कराने पर विचार करने का भी असम सरकार को आश्वासन दिया। इसके अलावा उन्होंने असम सरकार द्वारा पहले चरण में 380.60 करोड़ रुपए की लागत से 7 जिलों में 9 जलाशयों की पहचान कर स्थानीय सहायक नदियों को जोड़ने की योजना तैयार करने और केंद्र से सहायता लेने की भी जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि जैसा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने आश्वासन दिया था, ब्रह्मपुत्र बाढ़ को नियंत्रित करने के लिए बड़े तालाब खोदने के बजाय राज्य में सहायक नदियों को जलाशयों से जोड़ने से भी बाढ़ की समस्या का समाधान हो सकता है।
ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियों का बदला जाएगा मार्ग