नई दिल्ली : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मेधावी विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए पीएम-विद्यालक्ष्मी योजना को बुधवार को मंजूरी दे दी, ताकि वित्तीय बाधाएं उन्हें गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्राप्त करने से न रोक सकें। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह जानकारी दी। पीएम-विद्यालक्ष्मी योजना के अनुसार, गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा संस्थानों (क्यूएचईआई) में दाखिला लेने वाला कोई भी विद्यार्थी पाठ्यक्रम से संबंधित ट्यूशन शुल्क और अन्य खर्चों की पूरी राशि को कवर करने के लिए बैंकों और वित्तीय संस्थानों से बिना किसी जमानत या गारंटर के ऋण हासिल करने के लिए पात्र होगा। इस योजना के लिए 3,600 करोड़ रुपए के परिव्यय को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग ढांचा (एनआईआरएफ) के आधार पर देश के शीर्ष 860 क्यूएचईआई में प्रवेश पाने   वाले छात्रों को शिक्षा ऋण की सुविधा दी जाएगी। इसमें हर साल 22 लाख से अधिक छात्र शामिल होंगे। वैष्णव ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मंत्रिमंडल ने मेधावी छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए पीएम-विद्यालक्ष्मी योजना को मंजूरी दी है, ताकि वित्तीय बाधाएं भारत के किसी भी युवा को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्राप्त करने से न रोक सकें। इस योजना में एनआईआरएफ के समग्र, श्रेणी-विशिष्ट और विषय विशिष्ट रैंकिंग में शीर्ष 100 में स्थान रखने वाले सरकारी एवं निजी सभी एचईआई शामिल हैं। एनआईआरएफ रैंकिंग में 101-200 में स्थान रखने वाले राज्य सरकार के उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईआई) और केंद्र सरकार द्वारा संचालित सभी संस्थानों को इसमें शामिल किया गया है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह सूची हर साल नवीनतम एनआईआरएफ रैंकिंग का इस्तेमाल करके अद्यतन की जाएगी, और शुरुआत में 860 योग्य क्यूएचईआई के साथ 22 लाख से अधिक छात्रों को शामिल किया जाएगा, ताकि वे चाहें तो पीएम-विद्यालक्ष्मी का लाभ उठा सकें। साढ़े सात लाख रुपए तक की ऋण राशि के लिए, छात्र बकाया चूक के 75 प्रतिशत की ऋण गारंटी के लिए भी पात्र होगा। बयान में कहा गया कि इससे बैंकों को इस योजना के तहत विद्यार्थियों को शिक्षा ऋण उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। इसके अलावा, जिन विद्यार्थियों की वार्षिक पारिवारिक आय आठ लाख रुपए तक है और वे किसी अन्य सरकारी छात्रवृत्ति या ब्याज छूट योजनाओं के तहत लाभ के पात्र नहीं हैं, उन्हें 10 लाख रुपए तक के ऋण पर अधिस्थगन अवधि के दौरान तीन प्रतिशत की ब्याज छूट भी प्रदान की जाएगी।