नई दिल्ली : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख एस सोमनाथ ने सोमवार को कहा कि अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण यान (एनजीएलवी) के विकास मॉडल की घोषणा जल्द ही की जाएगी और इससे डिजाइन के आरंभ में ही उद्योगों को अंतरिक्ष क्षेत्र में आने का बड़ा अवसर मिलेगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले महीने एनजीएलवी के विकास को मंजूरी दी थी। यह भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना और संचालन के साथ-साथ 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय चालक दल के उतरने की क्षमता विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। एनजीएलवी का उल्लेख करते हुए सोमनाथ ने सोमवार को कहा कि इसरो इसके विकास में सहयोग करेगा, लेकिन उत्पादन और प्रक्षेपण का काम शुरुआत में ही उद्योग जगत को सौंप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि एनजीएलवी को विकसित करने के बारे में घोषणा जल्द की जाएगी। उन्होंने कहा कि डिजाइन की शुरुआत में ही उद्योगों के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र में आने का यह एक बड़ा अवसर होगा। गत 18 सितंबर को जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया कि एनजीएलवी विकास परियोजना का क्रियान्वयन भारतीय उद्योग की अधिकतम भागीदारी से किया जाएगा, जिसके द्वारा शुरुआत में ही विनिर्माण क्षमता में निवेश किए जाने की भी उम्मीद है। केंद्र सरकार द्वारा 2023 में घोषित अंतरिक्ष नीति में अंतरिक्ष में निजी उद्योगों की सहभागिता बढ़ाने का लक्ष्य है। यहां फ्रेंच एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (जीआईएफएएस) द्वारा आयोजित सम्मेलन में सोमनाथ ने कहा कि फ्रांस के एरियन रॉकेट द्वारा 20 से अधिक उपग्रहों को प्रक्षेपित किया गया है और उम्मीद है कि भविष्य में और भी उपग्रह प्रक्षेपित किए जाएंगे।  उन्होंने कहा कि हम विभिन्न संभावनाओं पर भी चर्चा कर रहे हैं, जिसमें लिम्डि इंजन का विकास भी शामिल है, जो फ्रांस में पहले से ही विकसित किया जा रहा है, साथ ही भविष्य में उच्च थ्रस्ट इंजन का विकास भी शामिल है।