पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : राज्य में आदिवासी बेल्ट और ब्लॉकों की संख्या वर्तमान के 47 से बढ़कर 447 या इससे अधिक हो सकती है। राज्य सरकार पहले ही राज्य में आदिवासी बेल्ट और ब्लॉकों की संख्या बढ़ाने के लिए कैबिनेट निर्णय ले चुकी है। जनजातीय बेल्ट और ब्लॉकों से बाहर रखे गए एससी और एसटी गांवों की पहचान कर 30 अक्तूबर में राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपने के लिए अखिल असम आदिवासी संघ और आदिवासी संगठनों की समन्वय समिति को जिम्मेदारी दी गई है। आदिवासी संघ ने पहले ही सदिया से धुबड़ी तक 1,200 एससी/एसटी गांवों की सूची राज्य सरकार को सौंप दी है। अधिक गांवों की पहचान के लिए अध्ययन जारी है। राज्य में आदिवासी ब्लॉकों की मौजूदा संख्या वर्तमान 47 से बढ़कर 447 या उससे अधिक हो सकती है। इस संबंध में अखिल असम आदिवासी संघ के महासचिव आदित्य खाखलारी ने कहा कि असम भूमि और राजस्व अधिनियम में अध्याय 10 को जोड़कर 1947 से आज तक असम में कुल 47 जनजातीय क्षेत्र और ब्लॉक गठित किए गए हैं। इसमें 30 ब्लॉक और 17 ब्लैट हैं। जब ट्राइबल ब्लैट व ब्लॉक का गठन किया गया था तब कई एसटी और एससी गांव इसके दायरे से बाहर रह गए थे। इसलिए आदिवासी या अनुसूचित जाति के गांव आज सुरक्षित नहीं हैं। नतीजतन अखिल असम आदिवासी संघ और असम के आदिवासी संगठनों की समन्वय समिति सरकार से और अधिक आदिवासी ब्लॉक बनाने की मांग करती है। हमारी मांगों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व वाली असम सरकार ने मौजूदा जनजातीय ब्लैट व ब्लॉकों के बाहर शेष जनजातीय और अनुसूचित गांवों को कवर करते हुए नए छोटे जनजातीय आधार और ब्लॉक बनाने का कैबिनेट निर्णय लिया था। यह बहुत अच्छा कदम है। भविष्य में मूल निवासियों की भूमि की रक्षा की जाएगी। आदिवासी संघ ने 27 सितंबर में असम के राजस्व मंत्री योगेन मोहन और जनजातीय मामलों और शिक्षा मंत्री डॉ. रनोज पेगू के साथ कई चर्चाएं कीं। हमने उस बैठक में संघ की ओर से कुछ समय लिया है। हमारे पास 30 अक्तूबर तक का समय है। हम नए बेल्ट और ब्लॉक में शामिल होने वाले गांवों की सूची सरकार को सौंपेंगे। जनजातीय बेल्ट और ब्लॉक वर्तमान में 47 हैं, जो बढ़ सकते हैं। हम पहले ही 2500 गांवों की सूची सरकार को सौंप चुके हैं।  हम 30 अक्तूबर को पूरी रिपोर्ट असम सरकार को सौंप देंगे।