स्पेस में आपने एस्ट्रोनॉट्स को कभी काले, लाल या हरे रंग के कपड़ों में नहीं देखा होगा। अंतरिक्ष से आई उनकी तस्वीरों में आपने हमेशा उनको सफेद रंग में ही देखा होगा। वहीं अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरने के दौरान वो ऑरेंज कलर का सूट पहनते है। ऐसे में ये सवाल उठता है कि आखिर रंगों में ऐसा क्या है, जो धरती से लेकर स्पेस तक इतने महत्वपूर्ण है। दरअसल इन रंगों के पीछे भी एक विज्ञान है। वैसे भी अंतरिक्ष की यात्रा कोई आम यात्रा तो नहीं है। वहां नेचर के अलग कायदे-कानून चलते हैं। ये धरती से अलग होते हैं। अब आप ग्रैविटेशनल फोर्स को ही देख लीजिए, ये धरती पर काम करता है लेकिन अंतरिक्ष में नहीं। हवा पानी जैसे वहां की कई चीजें धरती से अलग हैं। एस्ट्रोनॉट्स के सूट के लिए वैज्ञानिकों ने कई रिसर्च की। इसके बाद उन्होंने दो सूट बनाए। एक एंडवास्ड क्रू एस्केप सूट  और दूसरा एक्सट्रा व्हीकुलर एक्टीविटी सूट । इसमें ऑरेंज कलर वाले ड्रेस को एंडवास्ड क्रू एस्केप सूट और सफेद कलर वाले को एक्सट्रा व्हीकुलर एक्टीविटी सूट कहते हैं। कपड़ों के हिसाब से धरती से अंतरिक्ष की यात्रा दो चरणों में होती है। पहली धरती से लॉन्च की और दूसरी स्पेस के अंदर प्रवेश करने की यात्रा।

एस्ट्रोनॉट ऑरेंज सूट कब पहनते हैं? : लॉन्चिंग के समय एस्ट्रोनॉट ऑरेन्ज कलर का सूट पहनते हैं। दरअसल लॉन्चिंग पैड किसी ऐसी जगह होता है, जहां चारों ओर सिर्फ पानी हो। यूं समझिए हर तरफ झील, नदी या समुद्र हो। भारत में मौजूदा लॉन्चिंग पैड पर नजर डाले तो श्रीहरिकोटा को ही देख लीजिए, ये बंगाल की खाड़ी में बाधा द्वीप पर मौजूद है। लॉन्चिंग के वक्त स्पेसक्राफ्ट समुद्र के ऊपर से गुजर रहा होता है, तो उसका बैकग्राउंड ब्लू कलर का हो जाता है। इसपर वैज्ञानिकों का मानना है कि ब्लू बैकग्राउंड में ऑरेंज कलर आसानी से और क्लैरिटी के साथ दिखता है, जिससे किसी हादसे के दौरान अगर एस्ट्रोनॉट गिरे तो उसे आसानी से देखकर बचाया जा सके। इतनी ही नहीं ये रंग भी सूर्य की रोशनी को परावर्तित करता है। इसीलिए आमतौर पर आपने बचाव कार्य के कर्मियों को भी ऑरेंज कलर का ही सूट दिया जाता है।

एस्ट्रोनॉट के सूट का कलर सफेद क्यों ? : ये तो हो गई आरेंज सूट की बात अब बात करेंगे सफेद सूट की। यहां भी मामले बैकग्राउंड से ही शुरू होता है। दरअसल अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद एस्ट्रोनॉट्स का बैकग्राउंड काला हो जाता है। इसीलिए सफेद रंग सूरज के कारण इस्तेमाल किया जाता है। धरती के मुकाबले अंतरिक्ष में यात्री सूरज की रोशनी के काफी करीब होता है। ऐसे में उसकी गर्मी से बचने के लिए सूट को सफेद रंग से डिजाइन किया जाता है। सफेद रंग लाइट को रिफ्लेक्ट करता है। इसीलिए इस सूट को सफेद रंग का बनाया जाता है। क्योंकि ये रंग अगर लाइट को रिफ्लेक्ट करेगा तो जाहिर तौर पर गर्मी कम लगेगी। इसको और ज्यादा अच्छे तरके से समझने के लिए गांव के गलियारों में चलते हैं। आपने अधिकतर देखा होगा कि गांव के घरों में बाहरी दीवार सफेद चूने से रंगी होती है। वो इसलिए क्यों कि सूरज की रोशनी को बाहरी दीवार का सफेद रंग रिफलेक्ट कर देता है, जिससे घरों में कम गर्मी लगती है। मुख्यतौर पर एस्ट्रोनॉट को इसीलिए सफेद सूट दिया जाता है, क्योंकि ये लाइट को रिफ्लेक्ट करता है।