पृथ्वी 24 घंटे में एक दिन पूरा करती है। यानि सूर्य का चक्कर लगाती है। धरती के एक हिस्से पर जब दिन होता है तो कई हिस्से ऐसे भी होते हैं, जहां उस वक्त रात होती है। बचपन में हमें पढ़ाया भी गया है कि ऐसा पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमने की वजह से होता है, मगर क्या आपने कभी ये सोचा है कि आखिर पृथ्वी घूमती क्यों है? सिर्फ पृथ्वी ही नहीं बल्कि अंतरिक्ष के सभी ग्रह, तारे, धरती से छोड़े जाने वाले सैटेलाइट ये सभी घूमते क्यों रहते हैं। ब्रह्मांड में कुछ भी स्थिर नहीं है। पृथ्वी अपने सबसे नजदीकी तारे सूर्य की परिक्रमा करती है और सूर्य आकाशगंगा के चारों ओर घूमता है। आकाशगंगाएं भी स्पेस में लगातार गतिशील रहती हैं। वैज्ञानिक इसका कारण बिग बैंग थ्योरी को मानते हैं, यह एक ऐसा सिद्धांत है जो ब्रह्मांड की उत्पत्ति, विकास और गुणों की व्याख्या करता है। यह थ्योरी बताती है कि कैसे ब्रह्मांड की रचना हुई और लगातार ए फैल रहा है।
क्या है बिग बैंग थ्योरी? : ब्रह्मांड लगातार अपना विस्तार कर रहा है। ऐसे में वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया कि अब इसका विकास हो रहा है तो कभी ए बेहद छोटा रहा होगा। बेल्जियम के खगोलशास्त्री जॉर्जेस लेमेत्रे ने हबल के अद्भुत प्रयोग कर इस सवाल को सुलझाया और ए पता लगाया कि ब्रह्मांड की शुरुआत कैसे हुई। इस खोज में सामने आया कि ब्रह्मांड कभी एक छोटी सी गेंद था, इसी में ही सब समाहित था जो एक दिन फट गया और ब्रह्मांड की शुरुआत हुई। वैज्ञानिकों का दावा है कि ऐसा 13.8 अरब साल पहले हुआ था। हालांकि इस विस्फोट का कारण क्या था ये अभी तक रहस्य है। बिग बैंग के बाद सब कुछ गैसों से बना था। अरबों सालों बाद धीरे धीरे गैस और धूल से आकाशगंगाएं बनीं, सितारे बने और फिर ग्रहों का निर्माण हुआ। स्पेस में सब गतिशील रहता है, सब आपस में एक निश्चित दूरी पर घूमते रहते हैं। हर ग्रह की अपनी ऑर्बिट होती है और वह उसी में चक्कर लगाता रहता है। स्पेस टेलीस्कोप साइंस इंस्टीट्यूट में हबल स्पेस टेलीस्कोप के खगोल भौतिकविद् वैज्ञानिक कैरोल क्रिश्चियन ने लाइव साइंस से हुई बातचीत में बताया कि जब अंतरिक्ष में कोई दो चीजें आसपास आती हैं तो उनका गुरुत्वाकर्षण एक-दूसरे को खींचता है। अगर किसी ग्रह का गुरुत्वाकर्षण ज्यादा तो वह दूसरे को अपने पास खींच सकता है। अगर दोनों ग्रहों का गुरुत्वाकर्षण बराबर है तो दोनों ग्रह एक-दूसरे को खीचेंगे इससे दोनों के बीच पर्याप्त दूरी बनी रहेगी। हालांकि गुरुत्वाकर्षण बल की वजह से एक ग्रह दूसरे के चारों ओर घूमने लगेगा। यह क्रम चलता रहता है। कैरोल का दावा है कि सिर्फ ग्रह ही नहीं बल्कि स्पेस में छोटे खनिज कणों से लेकर बड़ी आकाशगंगाओं तक सभी गुरुत्वाकर्षण की वजह से ही घूमती रहती हैं। आपने सूर्य का चक्कर लगाते ग्रहों की एक डिस्क जैसी तस्वीर देखी होगी, जब कई सारे ग्रह और तारे आसपास इकट्ठा हो जाते हैं तो गुरुत्वाकर्षण की वजह से ही यह चक्कर लगाने लगते हैं। इनमें कोई ग्रह तेज तो कोई धीमी गति से घूमता है।
इसे कोणीय गति कहते हैं। यह गुरुत्वाकर्षण की वजह से ही होता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि जब किसी नए ग्रह या तारे की रचना होती है तो गैस और धूल के विशेष कण घूमकर एक केंद्र पर जमा होते हैं। जब निर्माण पूरा हो जाता है तो शेष गैस और धूल नवजात तारे के चारों ओर घूमती है और धीरे-धीरे एक डिस्क की तरह फैल जाती है। चूंकि स्पेस में ऐसा कोई साधन नहीं कि इस गति को थाम सके इसलिए सबकुछ घूमता रहता है। अब तक आप समझ चुके होंगे कि आखिर स्पेस में सब कुछ घूमता क्यों हैं, शायद आपके मन में ए सवाल हो कि क्या सभी ग्रह एक ही दिशा में घूमते हैं या इनकी दिशा अलग होती है। अगर आप याद करें तो बचपन में आपने पढ़ा होगा कि पृथ्वी का हमशक्ल ग्रह शुक्र उल्टी दिशा में घूमता है। दरअसल स्पेस में कई ग्रह ऐसे हैं जो विपरीत दिशा में घूमते हैं। शुक्र के अलावा यूरेनस भी ऐसा ग्रह है जो 90 डिग्री अक्ष पर घूमता है। ऐसा क्यों होता है वैज्ञानिक इसका पता तो नहीं लगा पाए, लेकिन वह ऐसा मानते हैं कि हो सकता है जब इन ग्रहों का निर्माण हुआ हो तब ए किसी ऐसे ग्रह या क्षुद्रग्रह से टकराए होंगे जिससे इनके घूमने की दिशा बदल गई। वैज्ञानिक ए भी मानते हैं कि हो सकता है सूर्य के गुरुत्वाकर्षण की वजह से शुक्र के घूमने की दिशा उल्टी हो गई हो।