नई रिसर्च ने ‘सेरेस’ के बारे में बनी-बनाई धारणाओं का तोड़ दिया है। इस बौने ग्रह के क्रेटर्स को देखकर यह माना जाता था कि यहां बहुत ज्यादा बर्फ नहीं होगी। वैज्ञानिकों ने यहां की अधिकतम 30 प्रतिशत सतह बर्फ से ढकी होने का अनुमान लगाया था। हालांकि, नेचर एस्ट्रोनॉमी जर्नल में छपी रिसर्च के अनुसार, सेरेस न सिर्फ बर्फ से ढका हुआ है, बल्कि कभी यहां पृथ्वी की तरह कीचड़ वाली, महासागरीय दुनिया रही होगी। सेरेस को 1801 में इटैलियन एस्ट्रोनॉमर ग्यूसेप पियाजी ने खोजा था। इसे पहले एस्टेरॉयड समझा गया और लंबे समय तक सेरेस की वही पहचान बनी रही। सेरेस मेन एस्टेरॉयड बेल्ट का सबसे बड़ा पिंड है, जो मंगल और बृहस्पति की कक्षाओं के बीच स्थित है। यह अपने चट्टानी पड़ोसियों से काफी बड़ा और अलग है। 2006 में तमाम स्टडीज के बाद वैज्ञानिकों ने सेरेस को बौने ग्रह का खिताब दिया। NASA के मुताबिक, सेरेस हमारे आंतरिक सौरमंडल का इकलौता बौना ग्रह है। 2015 मे नासा का Dawn स्पेसक्राफ्ट सेरेस पर उतरा और यह पहला बौना ग्रह बना जिसका किसी अंतरिक्ष यान ने दौरा किया। भले ही सेरेस का द्रव्यमान, एस्टेरॉयड बेल्ट के कुल द्रव्यमान का 25 प्रतिशत हिस्सा हो, फिर भी प्लूटो इससे 14 गुना बड़ा है। सेरेस की त्रिज्या 476 किलोमीटर है, जो पृथ्वी की त्रिज्या का 1/13 है। 257 मिलियन मील (413 मिलियन किलोमीटर) की औसत दूरी से, सेरेस सूर्य से 2.8 खगोलीय इकाई दूर है। सूर्य से पृथ्वी की दूरी को एक खगोलीय इकाई (जिसे AU लिखा जाता है) कहते हैं। यानी, सेरेस तक पहुंचने में सूर्य के प्रकाश को 22 मिनट लगते हैं।
सेरेस पर कभी थे महासागर : रिसर्च : अमरीका की परड्यू यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने कहा कि सेरेस की सतह पर काफी सारा पानी-बर्फ मौजूद है। उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि सेरेस की सतह के पास बहुत अधिक जल-बर्फ है, और जैसे-जैसे आप गहराई में जाते हैं, इसकी बर्फ धीरे-धीरे कम होती जाती है। रिसर्चर्स ने कंप्यूटर सिमुलेशन के जरिए यह दिखाने की कोशिश की कि अरबों साल के दौरान, पानी की मौजूदगी के चलते उसके क्रेटर विकृत हो गए होंगे।