आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि का 9 दिनों तक चलने वाला पावन पर्व आरंभ हो जाता है। नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा को समर्पित होता है। इस दौरान 9 दिनों तक मां दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा अर्चना की जाती है और व्रत रखे जाते हैं। नवरात्रि का उत्सव मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त करने का एक सुनहरा अवसर होता है। इस दौरान विधि विधान के साथ मां दुर्गा की पूजा अर्चना करने और व्रत रखने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। नवरात्रि की पूजा अर्चना में मां दुर्गा की प्रसन्नता के लिए पूरे 9 दिनों तक अखंड ज्योत जलाने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दौरान अखंड ज्योत जलाने से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है। इसी कारण बहुत से भक्तजन नवरात्रि के दौरान अखंड ज्योत जलाते हैं, लेकिन अखंड ज्योत जलाने के भी कुछ जरूरी नियम माने जाते हैं। अगर आप भी नवरात्रि में अखंड ज्योत जलाने की सोच रहे हैं तो आइए जानते हैं अखंड ज्योत जलाने के कुछ जरूरी नियम।
अखंड ज्योत जलाने के जरूरी नियम
-नवरात्रि के दौरान अखंड ज्योत ज्योत जलाते समय इस मंत्र का जाप जरूर करें, ‘करोति कल्याणं, आरोग्यं धन संपदाम्, शत्रु बुद्धि विनाशाय, दीपं ज्योति नमोस्तुते’। अखंड ज्योत की बाती के लिए कलावे या मौली का इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है।
-अखंड ज्योत वाले दीपक को कभी भी सीधे भूमि पर नहीं रखना चाहिए रखें। इस दीपक को हमेशा जौ, चावल या गेहूं की ढेरी के ऊपर ही रखना चाहिए। -भक्तजन अखंड ज्योत जलाने के लिए घी या तेल का इस्तेमाल करते हैं। ध्यान रखें अगर आप घी से अखंड ज्योत जला रहे हैं, तो इसे हमेशा दाईं ओर रखे, और अगर आप तेल से अखंड ज्योत जला रहे हैं तो दीपक को हमेशा बाईं ओर रखना चाहिए।
-एक बार अखंड ज्योत जलाने के बाद घर को कभी भी खाली न छोड़ें। इस दौरान घर में ताला भी न लगाएं। घर में हमेशा कोई न कोई सदस्य जरूर होना चाहिए। इस बात का खास ख्याल रखें कि अखंड ज्योत जलाने के लिए कभी भी खंडित या टूटे हुए या पहले इस्तेमाल हो चुके दीपक का उपयोग भूल से भी न करें। धातु के दीपक को अच्छे से साफ कर आप अखंड ज्योत जलाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
- नवरात्रि के समापन के बाद ज्योत को कभी भी खुद से न बुझाएं बल्कि दीपक को अपने आप बुझने दें।