पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : क्या जलजीवन मिशन फ्लॉप शो बन जाएगा? शिकायतें हैं कि हर घर को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई जल जीवन योजना के तहत पीने का पानी नहीं मिल रहा है। कई जगहों में जल जीवन योजना के नाम पर बांस के खंभों पर लटके एक नल के अलावा लोगों को एक बूंद पीने का पानी नहीं मिला है। आश्चर्यजनक विषय यह है कि जल जीवन मिशन के तहत मुफ्त पेयजल का वादा किया गया था, लेकिन मंत्री जयंत मल्लबरुवा के सार्वजनिक स्वास्थ्य और तकनीकी विभाग पर पानी की पाइप और नल के कनेक्शन के लिए ग्राहक से फीस वसूली का भी आरोप है। दावा किया गया है कि असम में जल जीवन योजना का करीब 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। लेकिन खराब गुणवत्ता वाले काम और व्यावहारिक प्रमाणपत्र जमा न करने के कारण केंद्रीय जल जीवन मिशन (सीजेजेएम) ने असम को फंड देना बंद कर दिया है। केंद्रीय निधि बंद होने पर पिछले तीन माह से बिल न मिलने पर ठेकेदार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य तकनीकी विभाग के एक सूत्र ने कहा कि केंद्र ने जल जीवन मिशन के लिए 1,000 करोड़ रुपए से अधिक धन जारी नहीं किए हैं। बकाया बिल नहीं मिलने पर हाल ही में, ऊपरी असम के जलजीवन मशन में काम कर रहे ठेकेदारों ने डिब्रूगढ़ में सार्वजनिक स्वास्थ्य तकनीकी विभाग के क्षेत्रीय कार्यालय के सामने धरना दे चुके हैं। ठेकेदारों ने अपना हक मांगने के लिए दिसपुर पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। नतीजतन हाल ही में मुख्य सचिव रवि कोटा ने जल जीवन निधि जारी करने के लिए केंद्र सरकार को पत्र भी भेजा है।
जल जीवन मिशन बन रहा फ्लॉप शो