अक्तूबर से हिंदुओं के पावन पर्व शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। ये पर्व नौ दिनों तक चलता है जिसमें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। इन दिनों माता रानी के अलग-अलग नौ स्वरूपों को उनका मनपसंद भोग अर्पित किया जाता है। कहते हैं ऐसा करने से माता रानी बेहद प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। माता रानी को क्या अलग-अलग भोग अर्पित किए जाते हैं।
पहले दिन : नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित है। इस दिन ही घटस्थापना की जाती है और फिर 9 दिनों तक नवरात्रि का उत्सव मनाया जाता है। नवरात्रि के पहले दिन माता रानी को गाय के घी से बना हुआ भोग चढ़ाने का नियम है।
दूसरे दिन : शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। इस दिन आप शक्कर और पंचामृत का भोग बनाकर माता रानी को चढ़ा सकती है।
तीसरे दिन : शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित होता है। इस दिन माता रानी के इसी रूप की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन्हें दूध बहुत पसंद है। इसलिए नवरात्रि के तीसरे दिन दूध से बने पकवान भोग के रूप में चढ़ाने का नियम है।
चौथे दिन :नवरात्रि का चौथा दिन मां कुष्मांडा को समर्पित होता है। कहा जाता है कि इन्हें मालपुए बेहद पसंद हैं। इसलिए नवरात्रि के चौथे दिन माता रानी को मालपुए का भोग लगाना सबसे शुभ माना जाता है।
पांचवें दिन : नवरात्रि के पांचवें दिन माता रानी के स्कंदमाता स्वरूप की पूजा की जाती है। इस दिन भोग के रूप में माता रानी को फल चढ़ाने का नियम है।
छठे दिन : शारदीय नवरात्रि का छठा दिन ऋषि पुत्री मां कात्यायनी को समर्पित है। नवरात्रि के छठे दिन के भोग में अन्य पकवानों के साथ लौकी, शहद और मीठे पान को जरूर शामिल करना चाहिए।
सातवें दिन : शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। सातवें दिन गुड़ से बने प्रसाद का भोग लगाने का नियम है।
आठवें दिन : आठवां दिन मां महागौरी को समर्पित है। नवरात्रि के आठवें दिन नारियल का प्रसाद चढ़ाना उचित माना जाता है। इस दिन हरे नारियल का गोला चढ़ाने के साथ, आप नारियल के लड्डू भी प्रसाद के रूप में चढ़ा सकते हैं।
नवें दिन : नवरात्रि का नवां दिन मां सिद्धिदात्री को समर्पित होता है। इस दिन नवरात्रि पर्व का समापन होता है। नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना के बाद, नवें दिन माता रानी की विदाई की जाती है। इसलिए इस दिन भोग में चना, हलवा, पूड़ी, खीर का प्रसाद चढ़ाने का नियम है।