पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : देश के 16वें वित्त आयोग का प्रतिनिधिमंडल असम की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर बुधवार को गुवाहाटी पहुंचा। आयोग के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के वित्त से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के लिए बृहस्पतिवार को असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा से दिसपुर के लोकसेवा भवन स्थित उनके कार्यालय में मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने आयोग की टीम को असम आने के लिए धन्यवाद दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि असम में कानून व्यवस्था की स्थिति बेहतर होने से राज्य में निवेश काफी बढ़ा है। मुख्यमंत्री ने आयोग को बताया कि राज्य की जीडीपी बढ़ी है और प्रति व्यक्ति आय भी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि असम अब एक आश्रित राज्य बनने की बजाए एक ऐसा राज्य बनना चाहता है जो अन्य विकसित राज्यों की तरह देश के आर्थिक विकास में योगदान दे सके। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने 16वें वित्त आयोग के समक्ष कहा कि केंद्रीय करों में असम की हिस्सेदारी भारी दर से घट रही है। इसका एक कारण पूर्वोत्तर के अन्य पड़ोसी राज्यों में शराब और पेट्रोलियम उत्पादों पर कम कर है। वित्त आयोग पड़ोसी राज्यों को कम करों के लिए मुआवजा देता है जिसके परिणामस्वरूप असम के राजस्व का नुकसान होता है। देश का 16वें वित्त आयोग और असम सरकार के बीच हुई चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ राहत के लिए राष्ट्रीय आपदा कोष के तहत असम को प्राप्त धनराशि पर्याप्त नहीं है। यह पैसा सहायता वितरण पर ही खर्च किया जाता है। बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास के लिए पैसा नहीं नहीं बचता। हर साल बाढ़ से पुलों, सड़कों आदि के साथ नागरिकों के घरों और मवेशियों का भी भारी नुकसान होता है। बाढ़ से निपटने के लिए केवल राहत राशि ही पर्याप्त नहीं है। इसके बाद सीएम डॉ शर्मा की उपस्थिति में आयोग के अध्यक्ष समेत सात सदस्यों के साथ सभी कैबिनेट मंत्री और मुख्य सचिव सहित राज्य सरकार के सभी विभागों के शीर्ष अधिकारियों की बैठक हुई। बैठक में राज्य के विभिन्न विभागों के वित्तीय पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई और वित्त विभाग ने ऊर्जा, उद्योग, जल जीवन, आपदा प्रबंधन, आवास और शहरी मामले, जल संसाधन, पूंजी निवेश और जल परिवहन जैसे विभागों की गतिविधियों पर आयोग को जानकारी दी। बैठक में 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया, सचिव ऋत्विक पांडे, संयुक्त सचिव राहुल जैन, सदस्य अजय नारायण झा, एनी जॉर्ज मैथ्यू, डॉ. मनोज पांडा, डॉ. सौम्यकांति घोष, असम सरकार के मंत्रीगण, मुख्य सचिव डॉ. रवि कोटा और सभी विभागों के शीर्ष अधिकारी उपस्थित थे। गौरतलब है कि 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया ने राज्य सरकार के साथ चर्चा के बाद गुवाहाटी के विवांता होटल में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. पनगढ़िया ने कहा कि राज्य सरकार के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने कई प्रासंगिक मुद्दे उठाए। डॉ. पनगढ़िया ने कहा कि असम सरकार ने केंद्रीय कर में हिस्सेदारी प्राप्त करने के लिए प्रत्येक राज्य के लिए अलग-अलग मानदंड तय करने का सुझाव दिया। असम ने बहुआयामी गरीबी के लिए 5 प्रतिशत कर हिस्सेदारी की मांग की। डॉ. पनगढ़िया ने कहा कि असम की जीडीपी 23.5 प्रतिशत है। ऐसे में असम स्वीकृत सीमा तक उधार ले सकता है। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने बृहस्पतिवार को रिजर्व बैंक की प्रतिभूतियों को बेचने और 750 करोड़ रुपए उधार लेने के लिए नोटिस जारी किया। पहली अक्तूबर को कर्ज लिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि सीएजी रिपोर्ट से राज्य के वित्तीय संकट की तस्वीर पहले ही सामने आ चुकी है। सीएजी रिपोर्ट में कहा कहा गया कि राज्य सरकार रिजर्व बैंक के पास न्यूनतम जमा राशि रखने में विफल रही है। पिछले साल राज्य पर कर्ज 107.34 प्रतिशत बढ़ गया है। इसके समानांतर, ऋण पर लगने वाली ब्याज दर में 140.50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।