गुवाहाटी : कांग्रेस की असम इकाई के पूर्व प्रमुख रिपुन बोरा तृणमूल कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष पद से हाल में इस्तीफा देने के बाद रविवार को कांग्रेस में लौट आए। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के असम के प्रभारी महासचिव जितेंद्र सिंह ने चराईदेव में विस्तारित कार्यकारी समिति की बैठक की शुरुआत में बोराकांग्रेस की असम इकाई के पूर्व प्रमुख रिपुन बोरा तृणमूल कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष पद से हाल में इस्तीफा देने के बाद रविवार को कांग्रेस में लौट आए। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के असम के प्रभारी महासचिव जितेंद्र सिंह ने चराईदेव में विस्तारित कार्यकारी समिति की बैठक की शुरुआत में बोरा का पार्टी में स्वागत किया। इस अवसर पर सिंह के अलावा कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा, विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया और अन्य नेता भी उपस्थित थे। सिंह ने कहा कि मैं रिपुन बोरा का एआईसीसी की ओर से पार्टी में स्वागत करता हूं। यह उनके लिए घर वापसी है। उन्होंने कहा कि भले ही बोरा तृणमूल में शामिल हो गए थे और इसकी प्रदेश इकाई के अध्यक्ष बन गए थे, लेकिन कांग्रेस उनके डीएनए में है।  सिंह ने कहा कि हमें खुशी है कि वह बिना किसी शर्त के वापस आ गए हैं। वह पार्टी के सदस्य के रूप में हमारे साथ हैं। बोरा ने कांग्रेस में लौटने पर खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मैंने ढाई साल पहले कांग्रेस छोड़ी थी, लेकिन राज्य और देश की मांग है कि भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) को सत्ता से उखाड़ फेंका जाए और कांग्रेस ही एकमात्र पार्टी है जो ऐसा कर सकती है। बोरा ने कहा कि तृणमूल के साथ रहने से विपक्ष के मतों का बंटवारा ही होगा, जिससे अंततः भाजपा को मदद मिलेगी और इसलिए उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस में लौटने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि असम के लोग भाजपा सरकार के कुशासन से तंग आ गए हैं। हम कांग्रेस को और मजबूत करने तथा सत्तारूढ़ गठबंधन के भ्रष्टाचार एवं सांप्रदायिकता का लोगों के सामने पर्दाफाश करने के लिए एक साथ मिलकर काम करेंगे। प्रदेश कांग्रेस प्रमुख भूपेन कुमार बोरा ने कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के साथ चर्चा के बाद पूर्व नेता की वापसी हुई और उम्मीद है कि उनके वापस आने से पार्टी और मजबूत होगी। बोरा के साथ तृणमूल की प्रदेश इकाई के कई शीर्ष पदाधिकारी भी कांग्रेस में शामिल हुए। राज्य मंत्रिमंडल के पूर्व सदस्य और पूर्व सांसद बोरा ने अप्रैल 2022 में कांग्रेस छोड़ी थी। उन्होंने एक सितंबर को तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा देते हुए दावा किया था कि इस पूर्वोत्तर राज्य के लोग उसे पश्चिम बंगाल की एक  ‘क्षेत्रीय पार्टी’  मानते हैं तथा वे अपनी पार्टी के तौर पर उसे   स्वीकार करने के इच्छुक नहीं हैं।