पूर्वांचल प्रहरी कार्यालय संवाददाता गुवाहाटी : असम विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र बृहस्पतिवार को हंगामे के साथ शुरू हुआ। प्रश्र्रकाल समाप्त होने के बाद पूरे विपक्ष ने अपने तीन स्थगन प्रस्तावों पर विधानसभा विश्वजीत दैमारी से चर्चा की मांग की, लेकिन विस अध्यक्ष की ओर से खारिज करने के बाद सभी विपक्षी दलों ने सदन से वाकआउट किया। उल्लेखनीय है कि विधानसभा अध्यक्ष की ओर से प्रस्ताव खारिज किए जाने पर कांग्रेस, ऑल इंडिया यूनाईटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा)और रायजोर दल के विधायक हाथ में तख्तियां लेकर सदन में आसन के निकट आ गए और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करने लगे। विपक्ष के नेता देवब्रत सैकिया ने स्मार्ट मीटर के माध्यम से अत्यधिक शुल्क वसूले जाने का मुद्दा उठाया, जबकि रायजोर दल के विधायक अखिल गोगोई एक नाबालिग राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी पर हमले के हालिया मामले पर चर्चा करने का प्रस्ताव लाया। एआईयूडीएफ के अमीनुल इस्लाम ने दो समुदायों के बीच भूमि बिक्री-खरीद के प्रतिबंध पर प्रस्ताव का मुद्दा उठाया। नेता प्रतिपक्ष सैकिया ने कहा कि बिजली एक बुनियादी सुविधा है और जनता को इससे वंचित नहीं किया जा सकता। यह समवर्ती सूची में भी है। स्मार्ट मीटर से अत्यधिक शुल्क ले रहे हैं और गरीब लोग परेशान हैं। इस विषय पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बिल अधिक आने और उस भुगतान नहीं करने पर बिजली आपूर्ति काट दी जाती है। ऐसी स्थिति में बड़ी संख्या में लोग अधिक पैसे नहीं दे पाते हैं और उसके सामने कई तरह की समस्या खड़ी हो जाती है। सरकार को आज सदन का अन्य कार्यवाही स्थगित कर इस मुद्दे पर चर्चा करनी चाहिए। वहीं एआईयूडीएफ के विधायक इस्लाम ने कहा कि संपत्ति को समान रूप से अर्जित करना एक भारतीय नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इसे धर्म के आधार पर प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने कहा है कि अंतर-सामुदायिक भूमि सौदों पर रोक होगी और इसके लिए उनकी मंजूरी की आवश्यकता होगी।
यह ध्रुवीकरण की राजनीति है और सरकार धर्म के आधार पर लोगों को बांटने की कोशिश कर रही है। इसलिए हम स्थगन प्रस्ताव लाए हैं। इसपर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए। वहीं दूसरी ओर अखिल गोगोई ने आरोप लगाया कि राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति काफी खराब हो गई है और उन्होंने मुख्यमंत्री हिमंत विश्वशर्मा के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि एक राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता नाबालिग खिलाड़ियों को तीन लोगों द्वारा शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया था, यहां तक कि उसके निजी अंगों पर भी हमला किया गया था, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। जब लोग सड़कों पर उतरे, तभी पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया। गोगोई ने यह भी कहा कि यूनाईटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (आई) ने हाल ही में समूचे राज्य में 25 बम लगाए और पुलिस को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। पुलिस लोगों के जान-माल की रक्षा करने में विफल है। राज्य में अराजकता व्याप्त है। मालूम हो कि विपक्ष के तीनों प्रस्ताव पर संसदीय कार्य मंत्री पीयूष हजारिका ने कहा कि स्थगन प्रस्ताव के जरिए मामलों पर चर्चा करने का कोई औचित्य नहीं है और उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से इन्हें खारिज करने का अनुरोध किया। दैमारी ने तब कहा कि इन विषयों पर अन्य माध्यम से चर्चा की जा सकती है। यह कहते हुए उन्होंने उन्होंने तीनों प्रस्तावों को खारिज कर दिया। विपक्षी सदस्यों ने अध्यक्ष के फैसले का विरोध किया और इसके बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया। अध्यक्ष ने कहा कि यह व्यवहार पूर्व नियोजित है और स्वीकार्य नहीं है। इसके बाद उन्होंने सदन का कामकाज जारी रखा और विपक्ष के शोर शराबे के बीच सत्ता पक्ष के सदस्यों को हंगामे से सुनने में हो रही दिक्कतों से बचने के लिए ‘हेडफोन’ का इस्तेमाल करने को कहा। करीब पांच मिनट बाद सभी विपक्षी सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया। हालांकि, वे कुछ समय बाद लौट आए। बताते चलें कि असम विधानसभा में गुरुवार को स्वदेशी भूमि खरीद और बिक्री, असम पशु चिकित्सा और मत्स्य पालन विश्वविद्यालय विधेयक सहित कुल 10 विधेयक पेश किए गए। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा की ओर से संसदीय कार्य मंत्री पीयूष हजारिका ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति संरक्षण विधेयक तथा असम का राजभाषा संशोधन विधेयक पेश किया। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री योगेन मोहन ने स्वदेशी जमीन खरीद-बिक्री संबंधी दो विधेयकों के अलावा असम निरसन विधेयक भी पेश किया। मंत्री अतुल बोरा ने असम पशु चिकित्सा और मत्स्य पालन विश्वविद्यालय विधेयक, 2024 पेश किया। मंत्री पीयूष हजारिका ने असम कौशल विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2024, मोरान स्वायत्त परिषद (संशोधन) विधेयक और मटक स्वायत्त परिषद (संशोधन) विधेयक 2024 पेश किया। मंत्री अशोक सिंहल ने असम शहरी जल पट्टी (रोकथाम और संरक्षण) विधेयक पेश किया।