श्रावण मास में लोकआस्था का लोकप्रिय महापर्व रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते के स्नेह को अटूट व मधुर बनाने के लिए प्रतिवर्ष श्रावण शुक्लपक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन हर्ष उमंग व उल्लास के साथ मनाने की परंपरा है। प्रख्यात ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि इस बार यह पर्व 19 अगस्त, सोमवार को मनाया जाएगा। श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 18 अगस्त, रविवार को अर्द्धरात्रि के पश्चात् 3 बजकर 06 मिनट पर लग रही है जो कि अगले दिन 19 अगस्त, सोमवार को अर्द्धरात्रि 11 बजकर 56 मिनट तक रहेगी। श्रवण नक्षत्र 18 अगस्त, रविवार को प्रातः 10 बजकर 15 मिनट से 19 अगस्त, सोमवार को प्रातः 8 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। इस दिन भद्रा 18 अगस्त, रविवार को अर्द्धरात्रि के पश्चात् 3 बजकर 06 मिनट से 19 अगस्त, सोमवार को दिन में 1 बजकर 31 मिनट रहेगी। भद्रा के बाद ही बहनें अपने भाइयों को रक्षासूत्र बांध सकेंगी। स्नान-दान-व्रतादि की पूर्णिमा 19 अगस्त, सोमवार को है। ज्योतिषविद् ने बताया कि अपने समस्त दैनिक कृत्यों से निवृत्त होकर इस दिन धार्मिक विधि-विधान से अपने आराध्य देवी-देवता की पूजा के पश्चात् सप्तऋषियों की भी पूजा करने का विधान है। उनके आशीर्वाद से मंगल कल्याण होता है। आस्थावान भक्त पूर्णिमा तिथि के दिन श्रीसत्यनारायण व्रत कथा का भी आयोजन करते हैं तथा रात्रि में चन्द्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करते हैं।
भाइयों की कलाइयों पर सजेगी राखी : पूर्णिमा तिथि पर ही राखी बांधने वाली बहनें अपने पारिवारिक रीति-रिवाज के अनुसार पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके, भाइयों के मस्तक पर टीका लगाकर, उनकी कलाई पर राखी बांधती हैं। तत्पश्चात् बहनें भाई को उपहार प्रदान करती हैं, साथ ही भाई भी उन्हें मंगल आशीर्वाद से सन्तुष्ट करके उनके जीवन की रक्षा का वचन देता है। रक्षा बंधन के समस्त पुनीत कार्य पूर्णिमा तिथि पर ही करना लाभप्रद रहता है। रक्षा सूत्र अपने पारिवारिक धार्मिक परंपरा के अनुसार ही बांधना चाहिए। ज्योतिषविद् ने बताया कि रक्षाबंधन के पर्व को और अधिक खुशनुमा बनाने के लिए जन्मतिथि एवं राशियों के रंग के अनुसार बहनें यदि राखी बांधें तो भाइयों के सौभाग्य में वृद्धि तो होगी ही साथ ही उनके जीवन में खुशहाली भी आएगी। सामान्यतः सुनहरा, पीला और लाल रंग की राखी बांधने का रिवाज है। इन रंगों की राखी बांधने के साथ ही भाइयों के राशि के अनुसार भी राखी का रंग रखने से सौभाग्य में वृद्धि होगी। लाल रंग से जीवन में ऊष्मा व ऊर्जा का संचार होता है, वहीं पर सुनहले व पीले रंगों से प्रसन्नता मिलती है। आजकल राखियों के रंग के अनुसार राखी बांधने का प्रचलन बढ़ रहा है।
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