नई दिल्ली : भारत ने वृहस्पतिवार को चीन पर कड़ा निशाना साधा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा है कि भारत ने चीन के अवैध कब्जों को कभी स्वीकार नहीं किया और आगे भी नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश सहित सीमा से सटे इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत किए जा रहे हैं। बॉर्डर से सटे इलाकों में सड़क और पुलों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार देश की सीमा पर होने वाली एक्टिविटी का राजनयिक माध्यमों के जरिए विरोध करती आई है। अफगानिस्तान के मसले पर होने वाली सभी बैठकों में भारत शामिल होता आया है। इस मुद्दे पर दिल्ली में हुई राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में पाकिस्तान नहीं आया है। इससे पता चलता है कि वे अफगानिस्तान के मसले को लेकर कितने चिंतित हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया था कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा मजबूत करने के लिए तिब्बत ऑटोनोमस रीजन और एलएसी के बीच विवादित जगह पर अपना एक गांव बसा दिया है। इस गांव में 100 घर बनाकर नागरिक बसाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने यह गांव साल 2020 में दोनों देशों के बीच पूर्वी लद्दाख में गतिरोध शुरू होने के बाद बसाया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस गांव को बसाने के अलावा भी चीन ने बहुत सारे पक्के इंफ्रास्ट्रक्चर एलएसी से सटे इलाकों में बनाए हैं। इस दौरान चीन की तरफ से सीमा पर यथास्थिति बनाए रखने के लिए लगातार बातचीत भी जारी रखी गई है। रिपोर्ट में बताया गया था कि अमेरिका की ताकत को चुनौती देते चीन ने अब स् को सीधे धमकी देना शुरू कर दिया है। अमेरिका रिपोर्ट में कहा गया था कि ड्रैगन ने अमेरिका को भारत-चीन के रिश्तों में दखलअंदाजी न करने की धमकी दी है। पेंटागन ने अमेरिकी कांग्रेस में ‘मिलिटरी एंड सिक्योरिटी डेवलपमेंट इनवॉल्विंग द पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ नाम से यहां रिपोर्ट जारी की थी।