गुवाहाटी महानगर कृत्रिम बाढ़ की समस्या से त्रस्त हैं। पिछले 5 अगस्त को नगर में हुई भारी बारिश के कारण लोग घंटों तक फंसे रहे। नगर में कहीं घुटनों भर तो कहीं उससे भी ज्यादा पानी होने से आवागमन बिल्कुल ठप हो गया। लोगों को अपने गंतव्य स्थान पर पहुंचने के लिए आधी रात तक इंताजर करना पड़ा। चांदमारी क्षेत्र में 100 एमएम बारिश हुई, जबकि खानापाड़ा क्षेत्र में 130 एमएम बारिश हुई। भारी बारिश के कारण गुवाहाटी महानगर का ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह फेल हो गया। कृत्रिम बाढ़ की समस्या से निपटने के क्षेत्र में सरकार और प्रशासन विफल रही। दूसरी दिन यानी 6 अगस्त को भी नगर के अनिल नगर, नवीन नगर एवं रुक्मिणी नगर सहित कई क्षेत्र में जल जमाव की स्थिति बनी रही। राज्य सरकार द्वारा नगर के विभिन्न भागों में चल रहे नालों एवं फुटपाथों के निर्माण कार्य को लेकर भी लोगों में भारी नाराजगी हैं। बरसात के वक्त नालों एवं फुटपाथ के टूटने से पैदल यात्री लोगों को भारी परेशानी हो रही है तथा समय-समय पर दुर्घटनाएं होती रहती हैं। इससे पहले भी नगर में कई बार भारी बारिश हुई किंतु इस तरह की गंभीर समस्या पहली बार देखने को मिल रही है। राज्य सरकार द्वारा इस समस्या पर दिए जा रहे बयान से भी लोगों में नाराजगी हैं। कोई लोगों का कहना है कि राज्य के मंत्री द्वारा शिलांग से आ रहे पानी का बहाना बनाकर बचाव किया जा रहा है, जो गलत है। शिलांग का पानी केवल दक्षिण गुवाहाटी को ही प्रभावित कर सकता है किंतु गुवाहाटी के दूसरे भागों में कृत्रिम बाढ़ की समस्या के लिए गुवाहाटी प्रशासन ही जिम्मेवार है। वर्ष 2016 में गुवाहाटी को स्मार्ट सिटी घोषित किया गया था। इसके बाद स्मार्ट सिटी के लिए 14 परियोजना के लिए 802 करोड़ रुपए आवंटित हो चुके हैं, किंतु अभी तक उसका सकारात्मक रिजल्ट देखने को नहीं मिल रहा है। कृत्रिम बाढ़ की समस्या के निपटने के लिए प्रशासन निकम्मा साबित हुई है। कृत्रिम बाढ़ के लिए दूरगामी सोच के बिना हो रहा निर्माण कार्य काफी हद तक जिम्मेदार है। पानी के निकासी के लिए भरलू के नाले के आसपास लगातार हो रहे अवैध कब्जे से नाला का दायरा सिकुड़ता जा रहा है। इसके अलावा नाले की सफाई ठीक तरीके से नहीं हो पा रही है। बरसात के वक्त नाले की सफाई होती है फिर वहीं गंदगी बारिश के कारण बहकर नाले में चली जाती है। सड़क और नालों के निर्माण कार्य के दौरान विभिन्न विभागों में समन्वय का अभाव देखा जाता है। गुवाहाटी क्लब से लेकर बामुनीमैदान तक एक तरफ फ्लाइओवर का काम चल रहा है तो दूसरी तरफ नालों की भी खुदाई हो रही है। इसी तरह के स्थिति नगर के दूसरे भागों में भी है। इसका नतीजा यह हो रहा है कि पैदल चल रहे लोगों को लिए फुटपाथ ही नहीं है। कृत्रिम बाढ़ की स्थिति में पैदल यात्रियों के लिए समस्या ओर गंभीर हो रही है। राज्य सरकार द्वारा अनावश्यक तर्क देकर अपनी जिम्मेदारी से भागने का प्रयास किया जा रहा है, जो गलत है। कृत्रिम बाढ़ से जो समस्या पैदा हो रही है उसके समाधान के लिए सरकार को ठोस कदम उठाना चाहिए। पांच अगस्त की भारी बारिश ने राज्य प्रशासन की पोल खोलकर रख दी है। यह समस्या अभी खत्म नहीं हुई है। बरसात के मौसम में और ज्यादा भारी बारिश हो सकती है। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार को ठोस पहल करनी होगी। दुनिया में हो रहे जलवायु परिवर्तन के कारण इस तरह की समस्या पैदा हो रही है। गर्मी के दिनों में भीषण गर्मी तथा बरसात के वक्त भारी बारिश की स्थिति देश के अन्य भागों में भी देखने को मिल रही है। हाल ही दिल्ली तथा पुणे में हुई भारी बारिश ने आवागमन की रफ्तार रोक दी थी। गुवाहाटी में भी लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। एक नागरिक होने के नाते हमारे भी जिम्मेदारी है कि हम नाले में कूड़ा-कड़कट नहीं फेंके। नाला जाम होने से पानी के निकासी में परेशानी होती है। कृत्रिम बाढ़ से निपटने के लिए राज्य सरकार को एक मास्टर प्लान बनाना चाहिए ताकि इस समस्या का स्थायी समाधान खोजा जा सके। केंद्र एवं राज्य सरकार को इस दिशा में मिलकर काम करना होगा ताकि इस समस्या का हल हो सके।
कृत्रिम बाढ़ से त्रस्त गुवाहाटी
