पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता

गुवाहाटी :असम विधानसभा के उपचुनाव के लिए कोविड विधि शिथिल करने वाली सरकार ने रास उत्सव आयोजित करने में कड़ा रूख अपनाया है। रास उत्सव के संदर्भ में सरकार की ओर से कठोर कोविड एसओपी जारी करने को लेकर राज्यभर में प्रतिक्रिया हुई है। चुनावी प्रचार के दौरान शासक तथा विपक्ष दल के मंत्री, नेता, समर्थक सभी ने कोविड दिशानिर्देश पर ध्यान देना आवश्यक नहीं समझा। परंतु रास उत्सव में बच्चे और बुजुर्ग कलाकारों के भाग लेने पर प्रतिबंध लगाए जाने के कारण लोग असंतुष्ट है। खासतौर पर माजूली के रास समितियों के आयोजकों ने सरकारी एसओपी के खिलाफ क्षोभ व्यक्त किया है। अगर चुनावी प्रचार के दौरान कोविड दिशानिर्देश पर ध्यान देना जरूरी नहीं है तो रास उत्सव के दौरान इतना कड़ा रुख अपनाने की क्या जरूरत है। मंगलवार को रास उत्सव के संदर्भ में जारी नई एसओपी को लेकर राज्यभर के रास उत्सव के आयोजक मंडली क्षोभ व्यक्त कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि नई एसओपी के अनुसार इसबार रास उत्सव में 10 साल के नीचे के शिशु तथा 65 साल के ऊपर के बुजुर्ग कलाकार उत्सव में अभिनय नहीं कर सकेंगे। उत्सव के आयोजकों के अनुसार बालकृृष्ण के बिना रास मनाना असंभव है। ग्वालपाड़ा तथा उदलगुड़ी में तैयारी पूरी करने के बावजूद आयोजक समितियों ने रास उत्सव का आयोजन रद्द कर दिया है। लोअर असम में अनेक रास उत्सव स्थल में बड़े-बड़े मेले लगते हैं। पर इसबार मेले सहित अस्थायी खाद्य-सामग्री की दूकानों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। लाखों का बजट बनाकर तैयारी की जाने के बाद एसओपी के कारण उत्सव रद्द करना पड़ रहा है।