जरा सोचिए कि आपके घर के पास एक झील है, और आप उसमें नहा रहे हैं। आपको यह बखूबी मालूम है कि जिस झील में आप नहा रहे हैं, उसमें कभी भी ब्लास्ट हो सकता है। यकीन मानिए यह बेहद डरावनी हकीकत है। एक ऐसी झील जो कभी भी बम की तरफ फट सकती है। अफ्रीका, दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप, यहां डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और रवांडा के बीच एक झील है, जिसका नाम ‘किवु’ है। किवु, अफ्रीका की एक सबसे बड़ी झीलों में से एक है जिसके आसपास करीब बीस लाख लोगों की आबादी है। जब इस झील में आसपास की बस्ती के लोग नहाने जाते हैं, तो वे इस बात से वाकिफ रहते हैं कि इस झील में कभी भी उनके चीथड़े उड़ सकते हैं। इस झील में उनकी मौत से मुलाकात कभी भी हो सकती है। लेकिन यह इतनी जानलेवा और खतरनाक क्यों है? आखिर इस झील में ऐसा क्या है जो भरपूर पानी होने के बावजूद इसे एक बम में तब्दील कर सकता है। आइए जानते हैं।
क्यों जानलेवा है झील? : किवु झील पानी की एक विशाल वाटर बॉडी है जो अपनी गहराई में कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन से भरी पड़ी है। सबसे खतरनाक बात, यह बिना किसी चेतावनी के कभी भी फट सकती है। अफ्रीका की दो अन्य झीलों भी इसी तरह के घातक कैमिकल से अटी पड़ी हैं। एक झील का नाम न्योस है और दूसरी का मोनौन, दोनों झीलें कैमरून में हैं। झील ने ली हजारों की जान : पिछले 40 सालों में न्योस और मोनौन, दोनों झीलें फट चुकी हैं, जिससे कुल मिलाकर लगभग 1,800 लोग और हजारों जानवर मारे गए हैं। वहीं, किवु झील अफ्रीका की बड़ी झीलों में से एक है जो ईस्ट अफ्रीकन रिफ्ट (दरार) नामक टेक्टोनिक प्लेट बाउंडरी पर फैली हुई है। दरार में सोमालियाई टेक्टोनिक प्लेट पूरब की ओर दरक रही है और न्युबियन प्लेट पर महाद्वीप के बाकी हिस्सों से दूर जा रही है। सोमालियाई प्लेट को सोमाली प्लेट के तौर पर भी जाना जाता है, और न्युबियन प्लेट को कभी-कभी अफ्रीकी प्लेट भी कहा जाता है। इस मूवमेंट से क्षेत्र में ज्वालामुखी और भूकंप से जुड़ी एक्टिविटी होती हैं, जो बदले में पृथ्वी के क्रस्ट के अंदर से गैसों को सतह पर लाती हैं। ये किवु झील की गहराई में भी आ जाती हैं।
एक नजर में किवु झील : किवु झील न्योस झील या मोनौन झील से कहीं ज्यादा बड़ी है। इसकी लंबाई 90 किलोमीटर, चौड़ाई 50 किलोमीटर और गहराई 1,560 फीट (475 मीटर) है। मिनेसोटा डुलुथ यूनिवर्सिटी में फिजिकल और जियोकैमिकल लिम्नोलॉजी के प्रोफेसर सर्गेई कात्सेव ने नेशनल जियोग्राफिक को बताया कि झील की बनावट अलग है। इसकी लेयर्स नॉर्मल नहीं हैं। जिसमें सिर्फ ऊपरी 200 फीट (60 मीटर) पानी नियमित तौर पर मिक्स होता है, और निचली परतें ऐसे ही रहती हैं। उन्होंने कहा कि इस सख्त अलगाव का मतलब है कि झील के तल से ऊपर उठने वाली ष्टह्र२ और मीथेन गैस फंस जाती हैं और 850 फीट (260 मीटर) गहरी और नीचे की निचली परत में जमा हो जाती हैं।
किवु में कितनी ष्टह्र२ और मीथेन है? : कात्सेव ने कहा कि किवु झील के तल पर लगभग 300 क्यूबिक किलोमीटर ष्टह्र२ और 60 क्यूबिक किलोमीटर मीथेन है। जिन्हें पृथ्वी के क्रस्ट की गहराई में मौजूद हाइड्रोजन सल्फाइड गैस भी सपोर्ट करती है। यह जहरीला कॉकटेल जल्द ही आस-पास के घनी आबादी वाले क्षेत्र में फैल सकता है। जिसकी वजह से बीमारी और जान जाने का रिस्क बना रहता है।
कनाडा स्थित कंपनी हाइड्रागैस एनर्जी के फाउंडर फिलिप मोर्केल, जो एक इंजीनियर हैं, उन्होंने नेशनल ज्योग्राफिक को बताया कि अगर झील में ब्लास्ट हुआ तो गैस का एक विशाल बादल निकलेगा जो कई दिनों से लेकर हफ्तों तक झील के ऊपर फैला रहेगा। इसके बाद यह पृथ्वी के एटमॉस्फेयर में फैल जाएगा। यह कंपनी किवु झील से मीथेन निकालकर बिजली बनाने का प्लान बना रही है।
किवु झील डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और रवांडा के बीच फैली है। मोर्केल ने कहा कि जब झील नीचे की परत में 100 फीसदी सैचुरेशन तक पहुंच जाएगी, तो यह अपने आप फट जाएगी। फिलहाल, यह झील 60 फीसदी से ज्यादा सैचुरेटेड हो चुकी है। जब इस झील में ब्लास्ट होगा तो ए एक दिन में सालाना ग्लोबल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के 5 फीसदी के बराबर उत्सर्जन कर सकती है। इस तरह के विस्फोट से मरने वालों की संख्या चौंका देने वाली होगी। किवु झील के तट पर लगभग 20 लाख लोग रहते हैं। ब्लास्ट तो छोडç¸ए, मोर्केल के अनुसार, अगर कोई उसके गुबार या धुएं की चपेट में आ गया तो उसे मरने में सिर्फ एक मिनट लगेगा। फिलहाल, साइंटिस्ट्स यह पता लगा सकते हैं कि झील में कितनी गैस फंसी हुई है, और इस तरह विस्फोट से कितना नुकसान पहुंच सकता है। ब्लास्ट से होने वाले जानमाल के नुकसान का अनुमान लगाया जा सकता है। इसके अलावा दूसरे कारण भी इस झील में तबाही लाने का काम कर सकते हैं। कात्सेव ने उदाहरण देते हुए कहा कि भूकंप या अचानक लावा का घुसना झील की परतों को हिला सकता है और विस्फोट का कारण बन सकता है। कात्सेव बताते हैं कि झील से मीथेन पंप करने की चल रही कोशिश से भी ऐसा रिस्क सामने आ सकता है।